संजय सिंह, पटना: बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (BRTP) जीविका-3 को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से लागू की जाएगी। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में उत्पादकता बढ़ाना, आय और रोजगार के अवसर सृजित करना तथा स्वयं सहायता समूहों (SHG) के उत्पादों को मजबूत बाजार उपलब्ध कराना है।

 

परियोजना की कुल लागत 3000 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें 70 प्रतिशत राशि वर्ल्ड बैंक और 30 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। इसकी अवधि छह वर्ष होगी और इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू किया जाएगा।

 

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क्या है सरकार का लक्ष्य?

सरकार का लक्ष्य खेती, पशुपालन और गैर-खेती वाले प्रोडक्ट्स की वैल्यू चेन को मजबूत करना है। मार्केट स्ट्रक्चर, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, डिजिटल और फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। पब्लिक-प्राइवेट-कम्युनिटी पार्टनरशिप मॉडल के जरिए नए इंटरनेशनल ट्रेड के मौके भी बनाए जाएंगे। परियोजना के तहत मत्स्य पालन, डेयरी, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन और वानिकी जैसे क्षेत्रों को विशेष बढ़ावा मिलेगा। साथ ही गैर-कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। ग्रामीण स्तर पर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, सीड प्लांट, प्रसंस्करण इकाइयां, हैचरी और चिलिंग प्लांट विकसित किए जाएंगे। उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जिससे ग्रामीण उद्यमी निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर सकेंगे।

1000 संकुल संगठनों की होगी कायापलट

BRTP-जीविका-3 के तहत एक हजार संकुल स्तरीय संगठनों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना है। इससे छोटे उद्योगों से जुड़े परिवारों को सामाजिक और वित्तीय सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी। लाभ का एक हिस्सा सामुदायिक सेवाओं में पुनर्निवेश किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान और मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा।

 

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छह वर्षों का खर्च रोडमैप

योजना के तहत 2026-27 में 300 करोड़ रुपये, 2027-28 में 450 करोड़, 2028-29 में 600 करोड़, 2029-30 में 900 करोड़, 2030-31 में 450 करोड़ और 2031-32 में 300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

 

बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना जीविका परिवार और समूहों के विकास में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने का काम करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र के छोटे-बड़े उद्योग, धंधों को मजबूती मिलेगी। हजारों, लाखों रोजगार के अवसर बनेंगे। विशेषकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित होगा।