संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आकार ले रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस बार सबसे अहम बात यह है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर निर्णय में बीजेपी की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है, जबकि जेडीयू ने डिप्टी सीएम पद पर सहमति के संकेत दिए हैं।

 

इस राजनीतिक बदलाव को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को बिहार का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी जिम्मेदारी एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता यानी मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया की निगरानी करना है। चौहान का अनुभव और संगठन पर पकड़ इस पूरी प्रक्रिया को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

 

यह भी पढ़ें: बिहार में नया सीएम कौन? NDA में मंथन तेज, बीजेपी के लिए भी मुश्किल

बीजेपी की भूमिका खास

राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने साफ कर दिया है कि इस बार मुख्यमंत्री पद के लिए नाम बीजेपी की ओर से ही प्रस्तावित किया जाएगा। इसके बाद एनडीए विधायक दल उस नाम पर औपचारिक मुहर लगाएगा। इससे यह संकेत साफ है कि बिहार में सत्ता संतुलन अब बीजेपी की ओर झुकता नजर आ रहा है।

सीएम रेस में कौन-कौन?

राजनीतिक गलियारों में कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा नित्यानंद राय, विजय कुमार सिन्हा, संजय जायसवाल और रेणु देवी जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि बीजेपी अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है, इसलिए अंतिम नाम को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है।

जेडीयू की रणनीति

सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू इस बार मुख्यमंत्री पद छोड़कर डिप्टी सीएम पद पर संतोष कर सकती है। माना जा रहा है कि यह फैसला एनडीए के भीतर संतुलन बनाए रखने और गठबंधन को मजबूत रखने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री चयन में नीतीश कुमार की राय का भी सम्मान किया जाएगा।

नई सरकार का टाइमलाइन

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नीतीश कुमार 14 अप्रैल को कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद ‘खरमास’ समाप्त होने के साथ ही 15 अप्रैल के आसपास नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

विपक्ष और अटकलों का दौर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। पप्पू यादव ने दावा किया है कि जिन नामों की चर्चा हो रही है, बीजेपी उनमें से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। इससे सियासी अटकलें और भी तेज हो गई हैं।


यह भी पढ़ें: फर्नीचर हट रहा, खाली हो रहा सीएम आवास, बिहार में क्या खत्म हो रहा है नीतीश युग?

 

फिलहाल सभी की नजर बीजेपी विधायक दल की बैठक पर टिकी है, जहां नए नेता का चयन किया जाएगा। यह तय माना जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा, लेकिन कौन बनेगा। इस पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा। बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां हर फैसला आने वाले चुनावों और सत्ता समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगा।