उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक किशोर का कुत्ते की तरह भौंकने वाला वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में लड़के का अजीब व्यवहार देखकर कई लोगों ने इसे रेबीज से जोड़ दिया। दावा किया जा रहा है कि कुछ महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद उसमें ये लक्षण दिखाई देने लगे। इस घटना ने लोगों के बीच डर और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि, इस पूरे मामले पर विशेषज्ञों ने अलग राय दी है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने इस वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा कि रेबीज होने पर इंसान कुत्ते की तरह भौंकने नहीं लगता। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि के ऐसी जानकारियों पर विश्वास न करें और मेडिकल तथ्यों को समझें।

 

डॉ. चावला के अनुसार, रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो दिमाग के ब्रेनस्टेम को प्रभावित करती है। इस बीमारी में गले की मांसपेशियों में तेज ऐंठन होती है, जिससे मरीज के लिए पानी पीना बेहद कठिन और दर्दनाक हो जाता है। यही कारण है कि इसे 'हाइड्रोफोबिया' यानी पानी से डर भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी मरीज के गले से असामान्य आवाजें निकल सकती हैं लेकिन वे कुत्ते के भौंकने जैसी नहीं होतीं। इसलिए वायरल वीडियो में दिख रहा व्यवहार रेबीज से जुड़ा होना संभव नहीं लगता।

 

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मानसिक कारण हो सकती है वजह

डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला किसी फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर या मानसिक तनाव से जुड़ा हो सकता है। पहले इसे हिस्टीरिया के नाम से जाना जाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि कुत्ते के काटने के डर या मानसिक दबाव के कारण इस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सही इलाज के लिए न्यूरोलॉजिकल और मानसिक जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि असली कारण का पता लगाया जा सके।

अंधविश्वास पड़ा भारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना मिर्जापुर के 17 वर्षीय किशोर की है, जिसे करीब चार महीने पहले कुत्ते ने काटा था। वीडियो वायरल होने के बाद परिजन उसे पहले एक पुजारी के पास ले गए, क्योंकि उन्हें लगा कि उस पर काला जादू किया गया है। बाद में स्थानीय लोगों के समझाने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने रेबीज की आशंका जताते हुए वाराणसी रेफर कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि किशोर ने एंटी-रेबीज वैक्सीन के दो डोज लिए थे लेकिन तीसरा डोज नहीं लिया, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया। हालांकि, खबरगांव इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।