आमतौर पर दिल्ली एनसीआर की सड़को पर जब कोई बड़ी दौड़ती हुई एसयूवी देखता है तो उनमें से तमाम लोगों के ज़ेहन में यही बात आती है कि खेत बेच के लिया होगा। यह बात पूरी तरह से सही नहीं है लेकिन बहुत से मामलों ऐसा है भी। हाल ही में नोएडा में बने जेवर एयरपोर्ट के लिए 12 हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया। इस प्रक्रिया में आस पास के गावों के लोगों को करोड़ों रुपये मिले।
हालांकि, एक बात जो कई बार कही जाती है कि पैसा आना एक बात है और उसका रुकना दूसरी बात। यह भी कहा जाता है कि पैसे को सहेजना और बढ़ा पाना सबके वश की बात नहीं होती। ऐसा ही कुछ देखने को मिला है इन गांवों में भी। इन गांवों में जब तमाम लोगों से बात की गई तो पाया गया कि मुआवजे में दो करोड़, ढाई करोड़ और यहां तक कि पांच करोड़ रुपये पाने वाले लोगों के पास भी इस वक्त गाड़ी में पेट्रोल डलवाने के लिए और मोबाइल का कवर लगवाने तक के पैसे नहीं हैं।
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3.5Cr मिले, बेचेते हैं दूध
एक व्यक्ति से जब हमने बात किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें मुआवजे में साढ़े तीन करोड़ मिले थे जिसमें से उन्होंने तीन करोड़ रुपये चार मंजिला मकान बनवाने में लगा दिए और बाकी के पैसे से दो गाड़ियां खरीद लाए। जब उनसे पूछा गया कि अब आप क्या करते हैं, तो उन्होंने बताया कि क्या करते हैं- दूध बेचते हैं, ताश खेलते हैं और मौज करते हैं।
मिले ढाई करोड़ अब कुछ नहीं बचा
एक और व्यक्ति नरेश (बदला हुआ नाम) से जब पूछा कि कितने पैसे मिले थे तो उन्होंने बताया कि ढाई करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन अब कुछ नहीं बचा। उन्होंने कहा कि पैसों से घर बनवा लिया एक-दो लड़कियों की शादी कर दी और अब न जमीन बची और नहीं करने को कुछ है।
5 करोड़ मिले, पेट्रोल डलवाने के पैसे नहीं
एक वृद्ध व्यक्ति किशोर (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें मुआवजे में पांच करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन अब उनके पास कुछ नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि उनके पास दो थार गाड़ियां हैं, जिसमें अब उनके पास पेट्रोल डलवाने के पैसे भी नहीं हैं।
नही लगवा पा रहे फोन में कवर
रोहित नाम के एक नौजवान ने बताया कि जब उन्हें मुआवजे के पैसे मिले थे तो उन्होंने 90 हजार का आईफोन ले लिया था लेकिन अब स्थिति यह हो गई कि बाकी के भी सारे पैसे खर्च हो गए हैं और अब उनके पास कवर लगवाने के भी पैसे नहीं हैं। उनका फोन टूटा हुआ था और उन्होंने बताया कि वह ऐसे ही टूटा हुआ ऐप्पल का फोन चला रहे हैं।
दोबारा मांग रहे पैसे
अब इन गांवों में लोगों की हालत बदहाल हो चुकी है, क्योंकि काफी लोगों के खेत मुआवजे में जा चुके हैं और अब न ही उनके पास जमीनें बची हैं और न ही पैसे। ऐसे में उनकी स्थिति यह हो चुकी है कि उनके पास न तो रोजगार है और न ही खेत। इनमें से कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें मुआवजे में गई जमीनों के लिए और ज्यादा रकम चाहिए।
दरअसल, जमीन अधिग्रहण का काम कई चरणों में पूरा किया गया। बाद के चरणों में अधिगृहीत की गई जमीन के लिए लगभग दोगुनी रकम दी गई। उदाहरण के लिए शुरुआती चरण जिन जमीनों का अधिग्रहण हुआ उनमें लगभग 20 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया गया जबकि बाद में जिन जमीनों को अधिग्रहण हुआ उसे 40 लाख रुपये प्रति बीघा के रेट पर अधिग्रहण किया गया।
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ऐसे में इन लोगों का कहना है कि उन्हें अब दोबारा 20 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से फिर मुआवजा मिलना चाहिए। हालांकि, सरकार के स्तर पर इस तरह की कोई भी बात नहीं कही गई है।
