उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव की मुलाकात इन दिनों चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के नेता इस मुलाकात को सियासी मुद्दा बना रहे हैं। उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी संतों पर लाठियां चलवाती है, उनका अपमान करती है, कालनेमि बताती है, जबकि समाजवादी पार्टी, संतों का सम्मान करती है, उनके मार्गदर्शन के हिसाब से चलती है। सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के नेता ओम प्रकाश राजभर ने अविमुक्तेश्वरानंद को समाजवादी पार्टी का नेता बना दिया है।

ओम प्रकाश राजभर का कहना है कि वह समाजवादी पार्टी के नेताओं की तरह बात करते हैं, जबकि साधु संतों को ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके बयान ऐसा ही है। कोई संत किसी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलता है। ओम प्रकाश राजभर ने उनकी आलोचना को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है यह संतों का स्वभाव नहीं है।

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ओम प्रकाश राजभर ने क्या कहा है?

ओम प्रकाश राजभर, कैबिनेट मंत्री, यूपी सरकार:-
महाराज जी (अविमुक्तेश्वरानंद) समाजवादी पार्टी के नेता बनकर काम कर रहे हैं. आप उनके बायन, कोई भी साधु संत बयान देता है तो किसी भी सीएम या पीएम के खिलाफ नहीं बोलता है। वह जिस काम में लगे हैं, उस काम में लगना चाहिए।

ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 'वह कभी योगी के खिलाफ बोलते हैं, कभी मोदी के खिलाफ बोलते हैं। आप यह सब मुहिम में लगे हैं, आप अपना मुहिम चलाता है। देखिए सही बात है कि जब आदमी मार खा जाता है तो शरण में चला जाता है।'

ओम प्रकाश राजभर के बयान का मतलब क्या है?

ओम प्रकाश राजभर ने जिस मार खाने वाला बयान का जिक्र किया है, वह अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा है। समाजवादी पार्टी की सरकार में साल 2015 में अविमुक्तेश्वरानंद पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया था। वह वाराणसी में आंदोलन कर रहे थे। तब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। शंकराचार्य को चोट आ गई थी। अखिलेश यादव ने उस घटना को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद से कई बार माफी मांगी है। 

 

 

अविमुक्तेश्वानंद पर ऐसे आरोप क्यों लगते हैं?

अविमुक्तेश्वानंद खुलकर योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना करते हैं। साल 2021 से ही अखिलेश यादव, अविमुक्तेश्वरानंद को साधने की कवायद में लगे हैं। वह कई बार माफी मांग चुके हैं। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान जब उनके शिष्यों से पुलिस ने कथित तौर पर बदसलूकी की थी, तब भी अखिलेश यादव ने मुखर होकर इसका विरोध किया था। 

 

अखिलेश यादव, अविमुक्तेश्वरानंद से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। मार्च 2026 में ही अखिलेश यादव ने लखनऊ में उनसे मुलाकात की थी, जिसमें अखिलेश यादव, उनके सामने जमीन पर बैठे नजर आए थे। जून में अविमुक्तेश्वरानंद अखिलेश यादव के गांव सैफई में पहुंचे, जहां डिंपल यादव ने उनकी आरती उतारी थी। 

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योगी और अविमुक्तेश्वरानंद में झगड़ा क्यों है?

भारतीय जनता पार्टी के समर्थक उनकी आलोचना करते हैं। वह राम मंदिर में रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा, अधूरे मंदिर और सरकार की मंशा पर कई बार सवाल उठा चुके हैं। वह नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकार के धुर आलोचकों में से एक हैं। विपक्ष, अब उनके बयानों का जिक्र कर, बीजेपी सरकार को घेरता है। अविमुक्तेश्वरानंद योगी सरकार पर गो हत्या, खराब कानून व्यवस्था और संतों के अपमान का आरोप लगाते हैं। योगी आदित्यनाथ विधानसभा में भी बिना नाम लिए अविमुक्तेश्वरानंद को कालनेमि बता चुके हैं।