प्राइवेट स्कूलों में अब पढ़ाना आसान नहीं रहा। टीचिंग प्रोफेसर, अब भारत में सबसे मुश्किल पेशा में से एक साबित हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X एक महिला टीचर का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसकी वजह से देश में नई बहस छिड़ गई है। टीचर का कहना है कि अब पढ़ाने के अलावा भी बहुत से काम शिक्षकों को करने पड़ते हैं, जो उनके काम का हिस्सा नहीं है।

वायरल हो रहे वीडियो में महिला टीचर कहती है कि उसने नौकरी छोड़ दी है। स्कूल में कैमरामैन से लेकर कई बार साफ-सफाई करने वाले स्टाफ तक की जिम्मेदारी उसी की होती है। जो काम, शिक्षक की जिम्मेदारी भी नहीं है, वह भी उसे सौंपा जाता है, इस माहौल में अब वहां काम करना, मुश्किल है। महिला टीचर ने यह प्रोफेशन ही छोड़ने का फैसला लिया है।

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कौन है सोशल मीडिया की वायरल टीचर?

दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो, गोरखपुर का है। छात्रा एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है, जहां की व्यवस्था से वह नाराज है। नाराज इसलिए क्योंकि सैलरी टीचर की मिलती है लेकिन काम उसके साफ सफाई कर्मचारी से लेकर कैमरामैन और वीडियो एडिटर का है। किसी भी काम में अगर टीचर चूक जाएं तो उन्हें सुनाया जाता है।

क्या कह रही है टीचर?

वायरल वीडियो में टीचर कहती नजर आ रही है, 'आज मैंने जॉब से रिजाइन कर दिया। एक टॉक्सिक माहौल से मैंने खुद को निकाल लिया है। आजकल टीचिंग प्रोफेशन है जो बहुत सम्मानजनक नौकरी है, वह रह नहीं गया है। सुबह घरवालों को बोलो दिहाड़ी पर जा रही हूं। टीचर को मजदूर कहो।'

'मैंने टेबल्स तक पोछी हैं फंक्शन के दिन। अगर प्यून नहीं आया। टीचर, टीचर नहीं रह गया है, दिहाड़ी मजदूर हो गया है। जिस टीचर की हम पूजा करते थे, अब वह रह नहीं गया है। अगर आपने गलती से हिंदी शब्द का इस्तेमाल किया तो आपको फाइन देना होगा। करना होगा, क्या हुआ आप  टीचर हैं।'

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'हिंदी बोलने पर फाइन लगा देता है स्कूल'

टीचर कहती है, 'एक टीचर की सैलरी में मैंने कई टीचर का रोल निभाया है। मैं अंग्रेजी पढ़ाती हूं, हिंदी पढ़ाती हूं, व्याकरण पढ़ाती हूं, मैं डांस टीचर भी हूं। ये सारे रोल भी करती हूं। अगर हमारे स्कूल में कोई फंक्शन होता था, अगर मैंने कोई वीडियो प्रोग्राम शूट करके, एडिट करके टाइम से नहीं दी तो मुझसे सुनाया जाता है। मैंने टेबल तक पोछा है, क्यों क्योंकि आज टीचर, टीचर नहीं है, दिहाड़ी मजदूर है।'

 

 

'टीचर, टीचर नहीं, गधा मजदूर हो गया है'

टीचर कहती है, '7.30 का स्कूल है, 7.40 पर आईं, सैलरी कट गई। मेरी खुद की 12 से 15 दिन की सैलरी कटी है, क्योंकि मैं 7.30 की जगह 7.40 या 7.45 तक पहुंची हूं। जेन जी, अब टीचिंग की नौकरी हमारे लिए नहीं रह गई है। यहां पर उन्हें टीचर नहीं मजदूर चाहिए, वह मजदूर जो गधा हो, वह मजदूर जिस पर सब लादते जाओ और वह सहता चले जाए।'

डिस्क्लेमर: यह वीडियो कहां का है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि खबरगांव नहीं करता है।