सोशल मीडिया पर इन दिनों पादरी बजिंदर सिंह का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपनी सभा में आए लोगों के बीच 'हालेलुया' चिल्लाते हुए नजर आते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि बजिंदर जैसे ही 'हालेलुया' बोलते हैं या लोगों को छूते हैं, कुछ झूमने लगते हैं और कुछ तो वहीं गिर पड़ते हैं। हालांकि यह वीडियो बहुत पुराना है पर अचानक से इंटरनेट पर बजिंदर की तुलना अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से की जा रही है।
बजिंदर के समर्थकों का दावा है कि उनके पास ऐसी ताकत है जिससे वे कैंसर, लकवा और मानसिक बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं को पल भर में दूर कर देते हैं। जहां एक तरफ उनके फॉलोवर इसे ईश्वर का चमत्कार मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक इसे अंधविश्वास और 'मास हिस्टीरिया' यानी भीड़ का पागलपन बता रहे हैं।
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धीरेंद्र शास्त्री से तुलना क्यों?
बजिंदर सिंह की तुलना बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से की जा रही है। इसके पीछे कई लोग कई कारणों का हवाला देते हें। लोगों का मानना है कि जैसे धीरेंद्र शास्त्री 'पर्चा' लिखकर लोगों की समस्याओं को हल करने का दावा करते हैं, वैसे ही बजिंदर सिंह भी प्रार्थना और 'हालेलुया' के जरिए लोगों के दुख दूर करने की बात कहते हैं।
दोनों के दरबार में भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जिस तरह बागेश्वर धाम में लाखों की भीड़ उमड़ती है, वैसी ही दीवानगी बजिंदर सिंह के कार्यक्रमों में भी देखने को मिलती है, जहां लोग बस एक झलक और आशीर्वाद के लिए घंटों इंतजार करते हैं।
दोनों के शिविरों में एक समानता और भी है कि मौजूद लोग अक्सर भावुक नजर आते हैं। जैसे बजिंदर की सभा में लोग रोते-चिल्लाते और झूमते दिखते हैं, ठीक वैसा ही नजारा कई बार बागेश्वर धाम के दरबार में भी देखा गया है।
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लोग क्या आरोप लगाते हैं?
अगर विवादों की बात करें तो दोनों ही अपनी शक्तियों के दावों के कारण विवादों में रहते हैं। धीरेंद्र शास्त्री पर जहां अंधविश्वास फैलाने के आरोप लगते हैं, वहीं बजिंदर सिंह पर भी धर्म परिवर्तन और मनगढ़ंत कहानियों के जरिए लोगों को गुमराह करने के आरोप लगते रहे हैं।
