पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधासनभा सीट पर, साल 2021 की तरह एक बार फिर दिलचस्प मुकाबला होने वाला है। जिस दोस्त की मदद से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी किले में सेंध लगाई थी और उन्हें ही हरा दिया था, वही दोस्त, अब उनके गढ़ में, उन्हीं की पार्टी के खिलाफ खड़ा है। ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के जिगरी दोस्त और सहोयगी पबित्र कर को नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए मना लिया है। 

नंदीग्राम, सुवेंदु अधिकारी का गढ़ है। यह उनकी पारिवारिक सीट है। अब अपनी ही जमीन पर, वह अपने सबसे करीबी दोस्त को चुनावी मैदान में उतरते देखेंगे। पबित्र कर, उनके सहयोगी रहे हैं। वह भी सुवेंदु अधिकारी के साथ भारतीय जनता पार्टी के नेता थे। उन्होंने बीजेपी छोड़ दी और तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। वापसी करने के 2 घंटे के भीतर, उन्हें टिकट मिल गाय। खुद सुवेंदु अधिकारी, 2021 से पहले तक, तृणमूल कांग्रेस में थे।

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कैसे सुवेंदु अधिकारी को जितवाया था चुनाव?

पबित्र कर ने पश्चिम बंगाल में ही ममता बनर्जी को बाहरी बता दिया था। सुवेंदु और पबित्रा ने मिलकर, ममता बनर्जी को नंदीग्राम में बाहरी साबित किया। यह वही नंदीग्राम था, जहां से साल 2007 में ममता बनर्जी ने आंदोलन छेड़ा था और लेफ्ट की 34 साल की सरकार को उखाड़ फेंका था। 

नंदीग्राम आंदोलन करने वाली ममता बनर्जी, अपना किला हार गईं थीं, सुवेंदु अधिकारी के पिता, शिशिर अधिकारी की लोकप्रियता, यहां मुख्यमंत्री से भी ज्यादा है। इस चुनाव में सुवेंदु, अपने जिस भरोसेमंद के साथ थे, अब वही, नंदीग्राम के संग्राम में उतरने वाला है। 

क्या है ममता बनर्जी की रणनीति?

ममता बनर्जी, उसी रणनीति का इस्तेमाल कर रही हैं, जो 2021 में बीजेपी ने अपनाई थी। नंदीग्राम, ममता बनर्जी के लिए अस्मिता का मुद्दा रहा है। यह वही जमीन है, जहां से टीएमसी ने 'जमीन अधिग्रहण' के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था, 'मां, माटी और मानुष' का नारा दिया था। इसी जमीन की वजह से ममता बनर्जी का जनाधार बढ़ा था। टीएमसी, अब इसी रणनीति से यह सीट हासिल करना चाह रही है।

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नंदीग्राम में ही क्यों ममता बनर्जी ने यह दांव चला? 

नंदीग्राम, पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद अहम है। साल 2007 में किसानों ने तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी को मजबूत बनाया था। साल  2011 में ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं। साल 2016 में भी वह बनीं। साल 2021 में बीजेपी ने तय किया कि अब इसी सीट से, वह ममता बनर्जी के करीबी रहे, सुवेंदु अधिकारी को लड़ाएगी। विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हरा दिया। जीत का अंतर सिर्फ 1,956 वोटों से हराया था। टीएमसी ने पूरे राज्य में 215 सीटें जीतीं लेकिन मुख्यमंत्री हार गईं।

जो दांव बीजेपी ने चला, वही ममता ने भी चल दिया

सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में शुमार रहे हैं। साल 2020 में सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़ी। उन्होंने भ्रष्टाचार और चुनावी धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने ममता बनर्जी पर हिंदुत्व विरोधी काम करने का आरोप लगाया। बीजपी ने इसे अवसर की तरह लिया। वह बीजेपी में शामिल हुए। बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ ही उन्हें उतार दिया। वह आए तो जिले का स्थानीय नेतृत्व ही सुवेंदु अधिकारी के समर्थन में आ गया। ममता बनर्जी पर स्थानीय विरोध भारी पड़ा।  

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पबित्र कर कौन हैं?

पबित्र कर नंदीग्राम के स्थानीय नेता और अधिकारी परिवार के करीबी रहे हैं। साल 2007 के जमीन आंदोलन में ममता बनर्जी का साथ निभाया था। वह सुवेंदु अधिकारी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। साल 2020 में सुवेंदु अधिकारी उन्हें भी बीजेपी में ले गए। 2021 में सुवेंदु अधिकारी की चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी भी पबित्र कर के पास ही थी। 

पबित्र कर, नंदीग्राम के ही एक ग्राम पंचायत के प्रधान बने। उन्होंने बीजेपी के लिए चुनाव प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई थी। तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वह जमीनी नेता हं, बीजेपी की चुनावी रणनीति से वाकिफ हैं, इसलिए उनकी जीत तय है। 

सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ लड़ने को तैयार कैसे हुए?

बगावत की यह राह भी सुवेंदु अधिकारी ने ही पबित्र कर को दिखाई थी। जब 2020 में सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी से अलग हुए तो पबित्र कर भी अलग हुए। सुवेंदु अधिकारी तो विधानसभा में नेता विपक्ष बन गए, राज्य बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे बने लेकिन पबित्र कर, वहीं के वहीं रह गए। वह नाराज थे, यह बात टीएमसी को पता चली और उन्होंने टिकट ऑफर कर दिया। 

तृणमूल कांग्रेस को भी कोई ऐसा उम्मीदवार नहीं मिल रहा था, जो सुवेंदु परिवार के गढ़ में सेंध लगा पाए। पबित्र कर, इस मांग में फिट बैठ रहे थे। लोग उन्हें जानते हैं, बूथ और पंचायत स्तर पर उनकी मजबूत स्थिति है। वह बूथ स्तरीय प्रबंधन में भी माहिर हैं। वह लोगों को पोलिंग बूथ तक लाने में सफल रहे हैं। टीएमसी को भरोसा है कि वह भी जीतेंगे।

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बीजेपी क्या दांव चल रही है?

सुवेंदु अधिकारी की टीम से सिर्फ पबित्र कर अलग हुए हैं। उनका पूरा संगठन, उन्हीं के साथ हैं। उनके भरोसेमंद कहे जाने वाले प्रलय पाल और मेघनाथ पाल जैसे नेता आज भी सुवेंदु के साथ हैं। बीजेपी, पबित्र कर को बड़ा चुनावी फैक्टर मानने के लिए तैयार ही नहीं है। यह मुकाबला अभी हाई प्रोफाइल लग रहा है। बीजेपी भी इस सीट को बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

सुवेंदु अधिकारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनकी लोकप्रियता, अपने शिखर पर है। यह चुनाव, टीएमसी के लिए आसान नहीं रहने वाला है। सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के खिलाफ भी चुनाव लड़ रहे हैं। टीएमसी का सारा जोर, ममता बनर्जी को भवानीपुर से जिताने पर होगा। ऐसे में नंदीग्राम में बीजेपी अपने खेल, दोहरा भी सकती है।