जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे संसाधन सीमित होते जा रहे हैं, जिसकी वजह से संसाधनों पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ऐसी स्थिति में हर देश फॉसिल फ्यूल जैसे संसाधनों के अन्य विकल्प खोजने में लगा हुआ है। फॉसिल फ्यूल बिजली बनाने के लिए काफी महत्त्वपूर्ण संसाधन है। आज के दौर में बिजली के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसी सिलसिले में जापान और अमेरिका ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। आज भी बिजली बनाने का सबसे बड़ा स्रोत फॉसिल फ्यूल है, लेकिन अब सोलर एनर्जी से भी बिजली बनाई जा सकती है।

 

सोलर एनर्जी सूरज की रोशनी से बनती है। अमेरिका और जापान बड़ी मात्रा में सोलर एनर्जी बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके तहत जापान चांद पर सोलर पैनल लगाने की रणनीति बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका अंतरिक्ष के चारों तरफ मिरर लगाने की योजना बना रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या ये जापान और अमेरिका के प्रोजेक्ट फॉसिल फ्यूल की जरूरत खत्म कर देंगे?

 

जापान जल्द ही लूना रिंग प्रोजेक्ट लॉन्च करने वाला है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो 13,000 टेरावॉट ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे दुनिया भर की बिजली की समस्या खत्म हो जाएगी। अब सवाल उठता है कि लूना रिंग प्रोजेक्ट क्या है और कैसे इस प्रोजेक्ट से 13,000 टेरावॉट ऊर्जा का उत्पादन होगा? वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की एक कंपनी Reflect Orbital अंतरिक्ष में 50,000 मिरर भेजेगी, जिससे रात में भी सोलर पैनल चार्ज किए जा सकेंगे।

 

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क्या है जापान का लूना रिंग प्रोजेक्ट?

जापानी इंजीनियरिंग कंपनी Shimizu Corporation ने लूना रिंग प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा है। इस प्रोजेक्ट के तहत चांद के चारों तरफ सोलर पैनल लगाए जाएंगे। ये सोलर पैनल सूरज की रोशनी से ऊर्जा उत्पन्न करेंगे। चांद के चारों तरफ सोलर पैनल लगाने की वजह से 24 घंटे पैनल को धूप मिलेगी। इसका मतलब साफ है कि सोलर एनर्जी के उत्पादन में कभी कोई रुकावट नहीं होगी। इस वजह से जमीन पर सोलर पैनल से कई गुना ज्यादा ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकेगा।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से अनुमान है कि 13,000 टेरावॉट बिजली पैदा की जा सकेगी, जो दुनिया की मौजूदा ऊर्जा जरूरतों से कहीं अधिक है। तो यह कहना गलत नहीं होगा कि फॉसिल फ्यूल के बजाय चांद के जरिए बिजली बनाई जा सकती है।

 

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फ्यूल के बजाय सूरज की रोशनी से बनेगी बिजली

अमेरिका की कंपनी Reflect Orbital का प्लान है कि अंतरिक्ष में हजारों बड़े-बड़े शीशे लगाए जाएं, जिससे सूरज की रोशनी का रिफ्लेक्शन धरती पर 24 घंटे आता रहेगा। इसी सूरज की रोशनी से सोलर पैनल चार्ज होंगे और बिजली बनेगी। इस कंपनी का लक्ष्य है कि अंतरिक्ष के चारों तरफ लगभग 5,00,000 बड़े शीशे लगाए जाएं। ये शीशे 180 फीट चौड़े होंगे और रात को भी धरती पर सूरज की रोशनी पहुंचा पाएंगे। कंपनी के मुताबिक ये सिस्टम प्रति घंटे 4.6 लाख रुपये की ऊर्जा चार्ज कर सकता है, जिससे बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन होगा।अब सवाल उठता है कि कैसे सूरज और चांद की सहायता से बिजली बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए सूरज की रोशनी का उपयोग कर बिजली बनाई जा सकेगी।

 

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अमेरिका और जापान के इन प्रोजेक्ट्स को देखते हुए लगता है कि जल्द ही दुनिया फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता को खत्म कर देगी। हालांकि, अमेरिका और जापान अकेले इस प्रोजेक्ट्स को सफल नहीं कर पाएंगे, इसके लिए उन्हें कई देशों की सहायता की जरूरत होगी।