टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स एक तरह के सरकारी म्यूचुअल फंड होते हैं जिनमें पैसा लगाने या निकालने की कोई पाबंदी नहीं होती। आप जब चाहें इसमें अपना पैसा डाल सकते हैं और जब चाहें निकाल सकते हैं। इस फंड की सबसे खास बात यह है कि इसकी एक तय तारीख होती है जिस दिन यह फंड बंद हो जाता है और आपका पैसा आपको मिल जाता है। यह फंड सिर्फ उन्हीं बॉन्ड्स यानी सरकारी पेपर्स को खरीदता है जो फंड के बंद होने वाले दिन या उसके आस-पास ही खत्म हो रहे हों। यह फंड मुख्य रूप से भारत सरकार के पेपर्स, सरकारी कंपनियों के बॉन्ड्स, राज्यों के विकास के लिए दिए जाने वाले लोन और सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एएए (AAA) रेटिंग वाले पेपर्स में आपका पैसा लगाता है। 

 

इसके काम करने का तरीका बहुत सीधा है। फंड मैनेजर इन सभी सरकारी पेपर्स को उनकी आखिरी तारीख तक संभाल कर रखता है। इस बीच जो भी ब्याज मिलता है उसे दोबारा इसी फंड में लगा दिया जाता है जिससे आपकी रकम और बड़ी हो जाती है। जब इस फंड की आखिरी तारीख आती है तो निवेशकों को उनका पूरा पैसा और सारा ब्याज एक साथ वापस मिल जाता है।

 

यह भी पढ़ें: इकॉनमी मंदी की तरफ जा रही है? 'बॉन्ड यील्ड कर्व' पहले ही दे देती है संकेत

काम करने का नियम

मार्केट में जब उतार-चढ़ाव या अनिश्चितता का माहौल होता है तब यह फंड उन लोगों के लिए सबसे बेस्ट है जो एक फिक्स समय में तय रिटर्न चाहते हैं। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जब ब्याज की कीमत बढ़ाई तब से ये फंड और भी ज्यादा आकर्षक हो गए हैं क्योंकि अब इनमें पहले से बेहतर रिटर्न मिल रहा है। यह फंड आपको ब्याज कीमतों के बदलने के खतरे से बचाता है क्योंकि यह शुरुआत में ही आपकी ब्याज दर को लॉक कर देता है। यह एक ओपन-एंडेड फंड है इसलिए लोग कभी-कभी घबरेकर या लालच में आकर मैच्योरिटी से पहले ही पैसा निकाल लेते हैं जो कि गलत है। इसका पूरा फायदा उठाने के लिए आखिरी तारीख तक टिके रहना बहुत जरूरी है।

इस फंड में मिलने वाली लिक्विडिटी

बैंक एफडी के मुकाबले इसमें टैक्स की बहुत बड़ी बचत होती है। अगर आप इसमें तीन साल से ज्यादा समय के लिए पैसा रखते हैं तो इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है जिसमें आपको इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है। इंडेक्सेशन का मतलब है कि सरकार टैक्स का हिसाब करते समय महंगाई को भी जोड़ती है जिससे आपका टैक्स बहुत कम हो जाता है और हाथ में आने वाला मुनाफा बढ़ जाता है। 

 

सुरक्षा के मामले में भी यह बहुत आगे है क्योंकि सरकारी सिक्योरिटीज में पैसा लगने की वजह से डिफॉल्ट होने यानी पैसा डूबने का रिस्क ना के बराबर होता है। आप निवेश करने से पहले इसकी फैक्टशीट में जाकर देख सकते हैं कि आपका पैसा कहां लग रहा है। साथ ही इसमें डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिलता है यानी आपका पैसा किसी एक जगह न लगकर अलग-अलग बॉन्ड्स में बंट जाता है जिससे रिस्क बहुत कम हो जाता है।

 

यह भी पढ़ें: फॉरेन इन्वेस्टर्स बेच रहे शेयर फिर भी कैसे टिका है भारतीय बाजार?

किसके लिए है सबसे बेस्ट?

मिराए एसेट म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को जागरूक करने के लिए एक जरूरी बात बताई है। सभी निवेशकों के लिए एक बार नो योर कस्टमर (KYC) यानी अपनी पहचान के प्रोसेस को पूरा करना जरूरी है। आपको हमेशा सिर्फ रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड्स के साथ ही पैसों का लेन-देन करना चाहिए। अगर आपको कोई शिकायत है या आप केवाईसी के बारे में जानना चाहते हैं तो मिराए एसेट म्यूचुअल फंड की वेबसाइट पर नॉलेज सेंटर सेक्शन में जा सकते हैं।