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फॉरेन इन्वेस्टर्स बेच रहे शेयर फिर भी कैसे टिका है भारतीय बाजार?

विदेशी निवेशकों की भारी बिक्री के बाद भी घरेलू निवेशक और SIP का पैसा भारतीय शेयर बाजार को खत्म होने से बचा रहा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

भारतीय शेयर बाजार में इस समय सबसे बड़ी चर्चा यही है कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) लगातार भारतीय शेयर बेच रहे हैं, फिर भी मार्केट में वैसी बड़ी गिरावट नहीं दिख रही जैसी पहले देखने को मिलती थी। आमतौर पर जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो सेंसेक्स और निफ्टी पर भारी दबाव आता है क्योंकि एफआईआई बहुत बड़ी मात्रा में निवेश करते हैं लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा। 16 मई 2026 को भी बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला लेकिन निफ्टी 24,900 के आसपास बना रहा और बाजार में बड़ी घबराहट नहीं दिखी।

 

इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि अब भारतीय बाजार सिर्फ विदेशी पैसों के भरोसे नहीं चल रहा। घरेलू निवेशक लगातार शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं। हर महीने SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए हजारों करोड़ रुपये मार्केट में आ रहे हैं। इसके साथ ही रिटेल निवेशकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों के शेयर बेचने के बाद भी भारतीय बाजार खुद को संभाल ले रहा है।

 

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FII आखिर होते कौन हैं?

आसान भाषा में समझें तो ये बड़े विदेशी निवेशक होते हैं। इसमें दुनिया के बड़े फंड्स, पेंशन फंड्स, इंश्योरेंस कंपनियां और हेज फंड्स शामिल होते हैं जो अलग-अलग देशों के शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं। जब ये भारतीय बाजार में पैसा लगाते हैं तो बाजार में तेजी आती है क्योंकि बड़ी मात्रा में पैसा मार्केट में आता है लेकिन जब ये पैसा निकालते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। पहले भारतीय शेयर बाजार काफी हद तक विदेशी पैसों पर डिपेंडेट हुआ करता था। इसी वजह से एफआईआई की बिक्री का असर बहुत बड़ा दिखाई देता था।

घरेलू निवेशक बने नई ताकत

आज भारतीय निवेशक खुद बाजार को संभालने लगे हैं। यही सबसे बड़ा कारण है कि एफआईआई की बिक्री के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं खतम हो रहा है। पिछले कुछ सालों में भारत में निवेश करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लाखों नए डीमैट अकाउंट खुले हैं और अब छोटे शहरों के लोग भी शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगा रहे हैं। डीमैट अकाउंट का मतलब होता है ऐसा अकाउंट जिसमें शेयर डिजिटल तरीके से रखे जाते हैं। पहले लोग शेयर पेपर में रखते थे लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन हो गया है।

SIP मार्केट का लगातार सहारा

इसका मतलब होता है हर महीने एक तय रकम निवेश करना। जैसे कोई व्यक्ति हर महीने 1000 रुपये या 5000 रुपये म्यूचुअल फंड में लगाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि SIP बाजार ऊपर जाए या नीचे लगातार चलती रहती है। लोग हर महीने पैसा निवेश करते रहते हैं। यही लगातार आने वाला पैसा बाजार को मजबूती देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल 2026 में SIP के जरिए करीब 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया। 

स्मॉल कैप और मिड कैप 

स्मॉल कैप मतलब छोटी कंपनियों के शेयर और मिड कैप मतलब बीच की यानी मीडियम कंपनियों के शेयर। इन कंपनियों में तेजी ज्यादा देखने को मिलती है इसलिए कई निवेशक यहां ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में स्मॉल कैप और मिड कैप म्यूचुअल फंड्स में रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला। एक्सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि कई शेयर काफी महंगे हो चुके हैं और आगे चलकर इनमें करेक्शन आ सकता है। करेक्शन का मतलब होता है शेयरों की कीमतों में अचानक गिरावट आना।

 

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बदल रही है इंडियन मार्केट

घरेलू निवेशक, SIP निवेश और रिटेल की भागीदारी बाजार की नई ताकत बन चुकी हैं। यही वजह है कि एफआईआई की लगातार बिक्री के बावजूद भारतीय मार्केट पूरी तरह खतम नहीं दिख रहा। विदेशी निवेशकों का असर आज भी बाजार पर काफी बड़ा रहता है लेकिन अब भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों की ताकत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है।


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