शेयर बाजार जब अचानक गिरता है तब सबसे पहले लोगों को अपने पैसों की चिंता होने लगती है। टीवी पर लाल निशान दिखने लगते हैं, सोशल मीडिया पर लोग नुकसान की बातें करने लगते हैं और कई निवेशकों को लगने लगता है कि अब उनका पैसा डूब जाएगा। ऐसे समय में बहुत से लोग घबराकर अपना निवेश रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं लेकिन SIP करने वाले ज्यादातर लोग ऐसा नहीं करते। वे मार्केट गिरने पर भी निवेश जारी रखते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि बाजार हमेशा नीचे नहीं रहता और एक समय के बाद फिर से ऊपर हो जाता है।
असल में SIP का तरीका ही ऐसा होता है जो बाजार की गिरावट में भी काम आता है। जब मार्केट नीचे जाता है तो उसी पैसे में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। बाद में जब बाजार रिकवर होता है तो वही यूनिट्स फायदा बढ़ाने में मदद करती हैं। इसलिए कई एक्सपर्ट कहते हैं कि मार्केट क्रैश के समय SIP बंद करने की बजाय उसे जारी रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है।
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SIP में हर महीने एक तय रकम निवेश होती रहती है। बाजार ऊपर हो या नीचे निवेश बंद नहीं होता। जब मार्केट गिरता है तो म्यूचुअल फंड की NAV भी कम हो जाती है। इसका फायदा यह होता है कि निवेशक को उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं। जैसे कि हर महीने 5 हजार रुपये की SIP करता है। पहले अगर उसे 100 यूनिट्स मिल रही थीं और मार्केट गिरने के बाद उसी रकम में 180 या 200 यूनिट्स मिलने लगें तो बाद में बाजार ऊपर जाने पर उसका फायदा भी ज्यादा हो सकता है। इसी वजह से कई लोग मार्केट क्रैश को मौका मानते हैं। जब बाजार महंगा होता है तो कम यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार सस्ता होता है तो ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं।
सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
जब बाजार तेजी से गिरता है तो कई लोग डरकर अपनी SIP बंद कर देते हैं। कुछ लोग नुकसान देखकर पैसा भी निकाल लेते हैं लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यही समय होता है जब निवेश जारी रखना ज्यादा जरूरी होता है। क्योंकि बाजार की रिकवरी कब शुरू हो जाए इसका सही समय किसी को नहीं पता होता। अगर कोई व्यक्ति गिरावट में SIP बंद कर देता है तो वह सस्ते दाम पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका खो सकता है। इसी वजह से ज्यादातर SIP निवेशक रोज-रोज के उतार-चढ़ाव पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। उनका फोकस लंबे समय के लक्ष्य पर रहता है, जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदना।
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डर कम क्यों होता है?
SIP का पूरा सिस्टम डिसिप्लिन पर चलता है। इसमें हर महीने अपने आप निवेश होता रहता है इसलिए लोगों को बार-बार फैसला लेने की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि SIP निवेशक मार्केट गिरने पर भी थोड़ा शांत रहते हैं। उन्हें पता होता है कि बाजार में गिरावट हमेशा नहीं रहती लेकिन अगर निवेश लंबे समय तक जारी रखा जाए तो वही गिरावट आगे चलकर अच्छे रिटर्न में बदल सकती है।