जब आप अपना सारा पैसा सिर्फ एक ही बॉन्ड में लगा देते हैं, तो आप एक बहुत बड़े जाल में फंस जाते हैं। इसका नुकसान यह होता है कि आप एक ही ब्याज दर पर लॉक हो जाते हैं। जब तक बॉन्ड का समय पूरा नहीं होता आपका पैसा फंसा रहता है। इस बीच अगर मार्केट में ब्याज कीमतें बदलती हैं तो उसका पूरा रिस्क आपका होता है। इस बड़े नुकसान से बचने और समझदारी से निवेश करने का एक सीधा रास्ता है 'बॉन्ड लैडर स्ट्रेटजी'।
बॉन्ड लैडरिंग का सीधा मतलब है अपने पैसे के लिए एक सीढ़ी तैयार करना। इस ट्रिक में आप अपना सारा पैसा एक ही जगह फंसाने के बजाय, उसे अलग-अलग समय पर पूरा होने वाले कई बॉन्ड्स में बांट देते हैं। जैसे कि आपने अपने पैसे के पांच हिस्से किए और उन्हें 1 साल, 2 साल, 3 साल, 4 साल और 5 साल वाले बॉन्ड्स में लगा दिया। यहां हर एक बॉन्ड इस सीढ़ी का एक डंडा है। जैसे ही 1 साल पूरा होगा और पहले बॉन्ड का समय खत्म होगा आपको आपका पैसा वापस मिल जाएगा। अब आप चाहें तो उस पैसे को निकाल लें या फिर उसे आगे के लिए किसी नए बॉन्ड में दोबारा लगा दें।
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कैसे होता है बचाव
इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको ब्याज कीमतों के बढ़ने या घटने का डर नहीं सताता। मार्केट में ब्याज के रेट हमेशा बदलते रहते हैं। अगर आपने सारा पैसा एक साथ निवेश कर दिया और बाद में ब्याज कीमतें बढ़ गईं तो आपको बढ़े हुए रेट का फायदा नहीं मिलेगा। वहीं अगर रेट गिर गए तो आप कम मुनाफे पर ही बंधे रह जाएंगे। बॉन्ड लैडरिंग से आपका सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही किसी एक समय के ब्याज रेट से जुड़ा होता है जिससे आपका पूरा पैसा सुरक्षित रहता है और आपके पास मौके बने रहते हैं।
इस तरीके को अपनाने से आपको चार बड़े फायदे मिलते हैं। सबसे पहला फायदा यह है कि आपके पास थोड़े-थोड़े दिनों में पैसा वापस आता रहता है। इससे आपकी जेब कभी खाली नहीं रहती और हमेशा कैश बना रहता है। दूसरा फायदा यह है कि आपको ब्याज कीमत बढ़ने का पूरा मौका मिलता है। अगर मार्केट में ब्याज के रेट बढ़ जाते हैं तो जो पैसा आपको वापस मिला है उसे आप नए और ज्यादा मुनाफे वाले बॉन्ड्स में लगा सकते हैं।
तीसरा फायदा यह है कि मुसीबत के समय पैसा तुरंत हाथ में आ जाता है। क्योंकि आपको हर साल या कुछ महीनों में कैश मिल जाता है इसलिए अचानक कोई जरूरत आने पर आपको अपना पूरा निवेश घाटा सहकर बेचने की जरूरत नहीं पड़ती। चौथा और सबसे बड़ा फायदा है मानसिक शांति। मार्केट चाहे जितना ऊपर-नीचे होता रहे आपको कोई टेंशन नहीं होती और आपका पैसा आराम से बढ़ता रहता है।
पैसे को अलग-अलग हिस्सों में कैसे बांटे?
अगर आपके पास पूरे 5,00,000 रुपये हैं। आप इसे अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग समय के लिए निवेश कर सकते हैं। जो जरूरतें बिल्कुल पास हैं उनके लिए 1,00,000 रुपये को 1 साल वाले बॉन्ड में डाल दें। जो जरूरतें थोड़े बीच समय की हैं उनके लिए 1,50,000 रुपये को 2 साल वाले बॉन्ड में लगा दें। लंबे समय के लिए बचे हुए 2,50,000 रुपये को 3 से 5 साल वाले बॉन्ड्स में डाल दें। जैसे ही आपका 1 साल वाला पहला बॉन्ड पूरा होगा आप उस पैसे को फिर से सबसे लंबे समय वाले बॉन्ड में लगा सकते हैं। इस तरह यह सीढ़ी आगे बढ़ती रहेगी।
यह तरीका किसके लिए है सही?
यह तरीका सिर्फ रिटायर हो चुके लोगों के लिए नहीं है बल्कि यह हर तरह के निवेशकों के लिए काम का है। यह उन बुजुर्गों के लिए सही है जिन्हें हर महीने या साल एक निश्चित कमाई चाहिए। यह उन लोगों के लिए भी बेस्ट है जो बिल्कुल रिस्क नहीं लेना चाहते या किसी बड़े काम के लिए धीरे-धीरे पैसा जोड़ रहे हैं। इसके अलावा नए और युवा निवेशक जो बचत की आदत डालना चाहते हैं बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे बचाने वाले माता-पिता और मार्केट के सही समय का इंतजार करने वाले लोग भी इससे फायदा उठा सकते हैं।
ये चार खतरे भी जानें
इस तरीके से रिस्क कम जरूर होता है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होता। निवेश करते समय इन चार बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पहला खतरा क्रेडिट रिस्क है यानी जिस कंपनी का बॉन्ड आपने खरीदा है वह डूब सकती है। इसलिए सारा पैसा एक ही जगह न लगाएं। दूसरा रीइन्वेस्टमेंट रिस्क है यानी जब आपका बॉन्ड पूरा हो तब मार्केट में ब्याज कीमत से कम हो सकती हैं। तीसरा खतरा महंगाई का है क्योंकि कई बार बॉन्ड का मुनाफा बढ़ती महंगाई के सामने कम पड़ जाता है। चौथा लिक्विडिटी रिस्क है यानी कुछ बॉन्ड्स को समय से पहले अचानक बेचना मुश्किल होता है। इन सब से बचने के लिए हमेशा भरोसेमंद बॉन्ड्स ही चुनें।
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लैडर बनाने के 6 आसान स्टेप्स
- सबसे पहले तय करें कि आपको पूरे कितना पैसा निवेश करना है।
- यह चुनें कि आपको कितने साल की सीढ़ी बनानी है, जैसे 1 साल, 3 साल या 5 साल।
- किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर अलग-अलग समय पर पूरे होने वाले बॉन्ड्स को चुनें।
- रिस्क कम करने के लिए अलग-अलग कंपनियों या सरकारी बॉन्ड्स में पैसा बांटें।
- अपने पैसों को बराबर हिस्सों में रखें या अपनी जरूरत के हिसाब से कम-ज्यादा करें।
- जब भी कोई बॉन्ड पूरा हो और पैसा वापस मिले तो उसे फिर से सबसे लंबे समय वाले बॉन्ड में लगा दें या जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर लें।
