सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी लिखी होती है कि इसे पीना जानलेवा हो सकता है। मगर इसके बावजूद लोग इसे पीते हैं। पर अगले महीने से सिगरेट पीना महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार अब सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने जा रही है। सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी 1 फरवरी से लागू हो जाएगी।
केंद्र सरकार अब सिगरेट की हर 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक की एक्साइज ड्यूटी लगाएगी। सिगरेट के साइज के हिसाब से अलग-अलग एक्साइज ड्यूटी लगेगी।
सिगरेट पर ये एक्साइज ड्यूटी GST के अलावा ऊपर से लगेगी। सिगरेट पर 40% GST लगेगा और इसके ऊपर से एक्साइज ड्यूटी भी लगेगी। इससे सिगरेट महंगी हो सकती है।
फिलहाल, सिगरेट पर 28% GST लगता है। साथ ही कंपनसेशन सेस भी लगता है। जुलाई 2017 में GST लागू होने के बाद से सिगरेट पर टैक्स उतना ही है। अब 8 साल बाद सिगरेट पर टैक्स बढ़ाया गया है।
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लेकिन ऐसा किया क्यों किया गया?
अब तक सिगरेट पर GST के अलावा कंपनसेशन सेस भी लगता था। मगर अब कंपनसेशन खत्म होने वाला है। पिछले साल सितंबर में GST काउंसिल ने सिगरेट और पान-तंबाकू पर 40% GST लगाने को मंजूरी दे दी थी। मगर कंपनसेशन सेस खत्म होने के बाद ये सस्ता हो सकता था।
सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी लगाने वाला बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने संसद में कहा था कि कंपनसेशन सेस खत्म होने के बाद सिर्फ 40% GST ही रह जाता, जिससे ये चीजें सस्ती हो जातीं।
उन्होंने कहा था कि सिगरेट और पान-तंबाकू सस्ते होने से इनकी खपत भी बढ़ जाती, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। साथ ही सरकार को मिलने वाला रेवेन्यू भी कम हो जाता।
अब सिगरेट पर कोई सेस तो नहीं लगेगा लेकिन 40% GST के साथ-साथ एक्साइज ड्यूटी भी लगेगी।
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ऐसा करना क्यों जरूरी था?
- 7 साल से कोई टैक्स नहीं बढ़ा: GST लागू होने से पहले तक भारत में हर साल सिगरेट पर एक्साइज रेट बढ़ाए जाते थे। मगर पिछले 7 साल से सिगरेट पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया था। जबकि, दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर हर साल टैक्स बढ़ाया जाता है, ताकि इसकी खपत को कम किया जा सके।
- 31 जनवरी को कंपनसेशन सेस खत्म: जब GST लागू किया गया था तो सिगरेट पर 28% GST के अलावा कंपनसेशन सेस भी लगाया गया था। ये सेस 60% तक होता था। लेकिन 31 जनवरी को कंपनसेशन सेस खत्म हो रहा है। ऐसे में सिगरेट सस्ती न हों, इसके लिए 40% GST के साथ-साथ अलग से एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी।
- हेल्थ और रेवेन्यू दोनों जरूरी: अगर ये एक्साइज ड्यूटी नहीं लगाई जाती तो कंपनसेशन सेस खत्म होने की वजह से सरकार का रेवेन्यू कम हो जाता। इसके साथ ही सिगरेट सस्ती होने से इसकी खपत बढ़ती, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, 'हम इसे सस्ता होने और रेवेन्यू का नुकसान होने नहीं दे सकते।'
- भारत में सबसे कम टैक्स: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सिगरेट और तंबाकू पर उसकी कीमत का कम से कम 75% टैक्स लगना चाहिए। WHO के मुताबिक, भारत में अभी सिगरेट की कीमत का 53% टैक्स ही लगता है। जबकि, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश सिगरेट पर 80-85% तक टैक्स लगाते हैं। ज्यादातर यूरोपीय देशों में भी यह 75-80% तक है।
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टैक्स लगाना इसलिए भी जरूरी था
WHO का कहना है कि सिगरेट पीने से हर साल दुनियाभर में 80 लाख से ज्यादा से लोग बेमौत मारे जाते हैं। वहीं, भारत में 10 लाख मौतें होती हैं। अगर इसमें बाकी तंबाकू उत्पादों से होने वाली मौतें भी जोड़ ली जाएं तो ये आंकड़ा 13 लाख तक पहुंच जाता है।
'द टोबैको एटलस' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 13 करोड़ से ज्यादा लोग हैं जो स्मोकिंग करते हैं। इनमें 90 फीसदी से ज्यादा पुरुष हैं। इतना ही नहीं, 10 से 14 की उम्र के 1.6% लड़के और 1.1% लड़कियां भी स्मोकिंग करती हैं। इससे पता चलता है कि अब कम उम्र में भी स्मोकिंग करना आम होता जा रहा है।
WHO का कहना है कि तंबाकू पर टैक्स लगाना इसकी खपत को कम करने का सबसे किफायती तरीका है, खासकर युवाओं और कम आय वाले लोगों में। टैक्स में 10% की बढ़ोतरी से हाई इनकम वाले देशों में तंबाकू की खपत लगभग 4% और लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों में लगभग 5% कम हो जाती है।
WHO का कहना है कि इसके बावजूद तंबाकू पर ज्यादा टैक्स नहीं लगाया जाता है। दुनिया के 41 देशों में 12% आबादी रहती है लेकिन यहां तंबाकू उत्पादों पर रिटेल कीमत का 75% से कम टैक्स लगाया जाता है।
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क्या इससे तस्करी बढ़ जाएगी?
सरकार मान रही है टैक्स बढ़ाने से सिगरेट की खपत कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, टोबैको इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे अवैध सिगरेट की तस्करी बढ़ जाएगी।
टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (TII) ने सरकार से इस टैक्स पर दोबारा विचार करने की अपील की है। TII ने एक बयान में कहा कि टैक्स बढ़ाने से लाखों किसानों, MSME, दुकानदारों और इंडस्ट्रियों को भारी नुकसान होगा। साथ ही यह अवैध उद्योग को भी बहु बढ़ावा देगा।
TII का कहना है कि हर 4 में से 1 सिगरेट अवैध तरीके से बिकती है और ये टैक्स बढ़ोतरी इसे और बढ़ावा देगी। उसने कहा कि भारत में तंबाकू की खपत में लीगल सिगरेट का हिस्सा सिर्फ 10% है, जबकि टोबैको टैक्स रेवेन्यू में 80% का योगदान देती है। TII ने कहा कि जिन देशों ने सख्ती की है, वहां अवैध तस्करी बढ़ी है और सरकार को इन सब बातों पर भी विचार करना चाहिए।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर्स (FAIFA) का कहना है कि भारत अवैध सिगरेट का चौथा सबसे बड़ा बाजार है। FAIFA का कहना है कि इससे तंबाकू किसानों को नुकसान होगा और अवैध तस्करी को बढ़ावा मिलेगा। FAIFA ने सरकार से एक्साइज ड्यूटी को वापस लेने की मांग की है।
