जब कोई बड़ी कंपनी बैंक से कर्ज लेकर डूब जाती है तो बैंक को अपने दिए हुए पैसे का एक बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए भूल जाना पड़ता है। इसी को बैंकिंग की भाषा में Haircut कहते हैं और यही वो शब्द है जो हर बैंकर की नींद उड़ा देता है। भारत में यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, कई बड़े मामलों में बैंकों को अपने दिए पैसे का आधे से ज्यादा हिस्सा डूबते हुए देखना पड़ा है।

 

यह शब्द एक पुरानी अंग्रेजी कहावत से आया है। पहले के जमाने में बिचौलिए कहते थे 'taking a haircut on the deal' यानी सौदे में थोड़ा घाटा उठाना। मतलब अगर किसी को 100 रुपये मिलने थे तो बिचौलिया बीच में आकर कहता था कि मैं तुम्हें अभी 70 रुपये देता हूं बाकी 30 मेरे। जो 30 रुपये कटे वही Haircut है। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे बाल काटने पर थोड़े बाल हमेशा के लिए चले जाते हैं। धीरे-धीरे यही शब्द पूरी बैंकिंग दुनिया में चल पड़ा। आज जब भी कोई बड़ी कंपनी कर्ज चुकाने में फेल हो जाती है और बैंक उसके साथ सेटलमेंट करता है तो उसमें बैंक को जो रकम छोड़नी पड़ती है उसे Haircut कहते हैं।

 

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Haircut का हिसाब कैसे लगता है?

किसी कंपनी ने बैंक से 100 करोड़ लिए, कंपनी बंद हो गई, लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बैंक को सिर्फ 45 करोड़ वापस मिले तो बाकी के 55 करोड़ का Haircut हो गया यानी 55 फीसदी पैसा गया। जितना बड़ा Haircut, उतना बड़ा नुकसान। भारत में कई मामलों में बैंकों को 60 से 90 फीसदी तक का Haircut झेलना पड़ा है।

यह होता क्यों है?

Haircut की नौबत तब आती है जब कर्ज लेने वाली कंपनी दिवालिया हो जाती हैं। भारत में ऐसे मामलों के लिए एक कानून बना हुआ है, जिसे Insolvency and Bankruptcy Code कहते हैं। इस कानून के तहत कंपनी की सारी संपत्ति बेची जाती हैं और एक जिम्मेदार व्यक्ति लगाया जाता है जो कंपनी के लिए नया खरीदार ढूंढता है। जो भी पैसा आता है वो बैंकों में बंट जाता है। यह पैसा हमेशा कर्ज से कम होता है और यही कमी Haircut कहलाती है।

 

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बैंक इससे कैसे बचते हैं?

बैंक Haircut से बचने के लिए कर्ज देने से पहले कंपनी की अच्छी तरह जांच करते हैं, कुछ न कुछ गिरवी रखवाते हैं और बीच-बीच में नजर रखते हैं। RBI के नियम भी बैंकों को मनमाने तरीके से कर्ज देने से रोकते हैं। फिर भी कभी-कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि Haircut से बचना मुमकिन नहीं रहता और तब बैंक बस यही कोशिश करता है कि नुकसान कम से कम हो।