logo

मूड

ट्रेंडिंग:

सिक्किम में इनकम टैक्स नहीं, फिर कैसे कमाई करती है सरकार? खेल समझिए

सिक्किम के मूल निवासियों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता फिर भी वहां की सरकार करोड़ों कमा रही है। बिना टैक्स लिए राज्य का खर्चा चलाने के लिए सरकार कई दूसरे रास्तों से पैसा जुटाती है।

AI Generated Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

शेयर करें

google_follow_us

सिक्किम के मूल निवासी करोड़ों कमाएं तब भी उन्हें सरकार को एक रुपया इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता क्योंकि 1975 में भारत में शामिल होते वक्त संविधान के सेक्शन 371F के तहत उन्हें यह खास अधिकार दिया गया था। राज्य सरकार अपना खर्चा चलाने के लिए जीएसटी, बिजली प्रोजेक्ट्स की रॉयल्टी, शराब, गाड़ियों पर टैक्स और सबसे ज्यादा केंद्र सरकार से मिलने वाली भारी मदद पर निर्भर रहती है।

 

सिक्किम करीब 330 साल तक एक अलग रियासत रहा था और 1975 में जब यह भारत का हिस्सा बना, तब यह तय हुआ था कि यहां की पुरानी टैक्स व्यवस्था नहीं बदली जाएगी। यह छूट सिर्फ उन लोगों के लिए है जो 1975 से पहले से यहां रह रहे थे लेकिन अगर दिल्ली या मुंबई जैसे किसी दूसरे राज्य का व्यक्ति सिक्किम में जाकर बसता है तो उसे बाकी देश की तरह पूरा इनकम टैक्स देना पड़ता है।

 

यह भी पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस है सबके लिए जरूरी, समझें एक-एक बारीकी?

 

कितना आता है इनकम टैक्स?

 

साल 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डालें तो सिक्किम में टैक्स कलेक्शन बाकी राज्यों के मुकाबले काफी कम है। जहां उत्तर प्रदेश में 81,868.25 करोड़, मध्य प्रदेश में 35,825.07 करोड़, महाराष्ट्र में 28,828.91 करोड़ वहीं तमिलनाडु में 18,615.35 करोड़ और गुजरात में 15,872.56 करोड़ रुपये का टैक्स जमा होता है, वहीं सिक्किम में यह आंकड़ा महज 1,770.72 करोड़ रुपये ही है। यह बड़ा अंतर इसलिए है क्योंकि सिक्किम के मूल निवासियों को टैक्स नहीं देना पड़ता और वहां जो भी इनकम टैक्स जमा होता है, वह सिर्फ उन बाहरी लोगों से आता है जो दूसरे राज्यों से आकर वहां बसे हैं।

केंद्र सरकार को सिक्किम से मिलता क्या है?

इनकम टैक्स भले न मिले लेकिन केंद्र के पास पैसा आने के दूसरे रास्ते हैं। GST यहां सबसे बड़ा जरिया है। जब सिक्किम में कोई चीज बिकती है, होटल में कमरा बुक होता है या कोई सर्विस ली जाती है तो उस पर GST लगता है और उसका हिस्सा केंद्र सरकार के पास जाता है। इसके अलावा, बिजली प्रोजेक्ट्स पर रॉयल्टी, शराब पर टैक्स और गाड़ियों पर टैक्स से भी राज्य सरकार पैसा कमाती है। सिक्किम अपनी कमाई से ज्यादा केंद्र सरकार के भरोसे चलता है।

 

राज्य के बजट में हर 100 रुपये में से 48 रुपये केंद्र के टैक्स की हिस्सेदारी से आते हैं और 22 रुपये केंद्र से मिले कर्ज से। 2025-26 के बजट में केंद्र से 5,519 करोड़ रुपये टैक्स हिस्सेदारी के तौर पर और 2,600 करोड़ रुपये अलग से मदद के रूप में मिलने का अनुमान है। सीधे कहें तो सिक्किम के लोग भले टैक्स न दें लेकिन देश के बाकी राज्यों के टैक्सपेयर्स का पैसा वहां पहुंचता जरूर है। 

कहां-कहां से होती है बड़ी कमाई?

टूरिज्म सिक्किम की इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा है। 2022-23 में सिक्किम में करीब 20 लाख पर्यटक आए जो राज्य की पूरी आबादी से तीन गुना ज्यादा है जबकि 2015 में यह सिर्फ 7 लाख था। इन पर्यटकों की वजह से होटल, खाने-पीने की जगहों और टूर पर GST जमा होता है जो सरकार की कमाई में जाता है। सिक्किम में ज्यादातर बिजली पहाड़ी नदियों से बनती है।

 

यह भी पढ़ें: कमजोर मानसून का खतरा, क्या इस साल खाने की थाली महंगी होगी?

 

तीस्ता नदी पर बने पावर प्रोजेक्ट में सिक्किम सरकार की 60% हिस्सेदारी थी जो कमाई का बड़ा जरिया था। 2023 की बाढ़ में यह प्रोजेक्ट तबाह हो गया और राज्य को करीब 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह देश में सबसे ज्यादा बड़ी इलायची उगाने वाला राज्य है और यहां से दवाइयां और ऑर्गेनिक सामान बाहर भेजा जाता है। इससे भी राज्य को पैसा मिलता है और GST के जरिए केंद्र को भी फायदा पहुंचता है।

 

Related Topic:#Business News

और पढ़ें