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कमजोर मानसून का खतरा, क्या इस साल खाने की थाली महंगी होगी?

इस साल मानसून कमजोर रहने का डर है और इसकी वजह है अल नीनो। अगर बारिश कम हुई तो किसान की फसल मारी जाएगी और बाजार में दाल, सब्जी और तेल सब महंगे हो जाएंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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गर्मी अभी पूरी तरह गई नहीं और मानसून को लेकर चिंता शुरू हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (इंडिया मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट) ने अप्रैल 2026 में बताया कि इस साल जून से सितंबर के बीच बारिश सामान्य से कम रहने वाली है। तीन साल में पहली बार ऐसा अनुमान आया है। इसकी वजह है अल नीनो। यह एक मौसमी घटना है जो दूर समुद्र में होती है लेकिन इसका असर यहां आपकी थाली तक पहुंचता है। कम बारिश होगी, फसल कम होगी और बाजार में चीजें महंगी हो जाएंगी। 

 

मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल बारिश पिछले औसत का सिर्फ 92% रहेगी। जितनी बारिश होनी चाहिए उससे काफी कम होगी और 35% तक चांस है कि हालात और भी खराब हों, यानी सूखे जैसी नौबत आ जाए। भारत में करीब 70% खेत बारिश के भरोसे हैं। नहर या ट्यूबवेल नहीं, सिर्फ बारिश के पानी से सिंचाई होती है तो जब पानी नहीं गिरता, किसान की फसल खराब होती है और बाजार में चीजें महंगी हो जाती हैं।

 

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क्यों खतरनाक है अल नीनो?

अल नीनो का बढ़ना यानी मानसून कमजोर पड़ना। जो हवाएं बारिश लेकर आती हैं, वो अल नीनो की वजह से रास्ता बदल लेती हैं या कमजोर पड़ जाती हैं। नतीजा यह होता है कि खेतों को जितना पानी मिलना चाहिए, उतना नहीं मिलता। इस साल मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई से सितंबर में अल नीनो का असर सबसे ज्यादा रहेगा और यही वे तीन महीने होते हैं जब खेतों में फसल खड़ी होती है और उसे सबसे ज्यादा पानी चाहिए होता है।

क्या-क्या महंगा होगा?

दाल सबसे पहले मार खाती है पिछली बार जब भी ऐसा मौसम रहा, दाल की कीमत सबसे पहले बढ़ी है। इसके अलावा खाने का तेल भी महंगा हो सकता है। सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलें पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं कम पानी मतलब कम पैदावार, और कम पैदावार मतलब महंगा तेल। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि भारत पहले से ही बाहर से बहुत सारा खाने का तेल मंगाता है। अगर देश में ही कम बनेगा तो और मंगाना पड़ेगा और वो भी महंगे दाम पर। भारत अपनी 35% खाद खाड़ी देशों से लेता है। वहां पहले से तनाव चल रहा है तो खाद की किल्लत और महंगाई का डर भी बना हुआ है।

 

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अच्छी खबर क्या है?

इस साल सरसों की फसल ठीक-ठाक रही है। सरकार के पास गेहूं और चावल का काफी स्टॉक है जो जरूरत पड़ने पर बाजार में उतारा जा सकता है। देश के पूर्वोत्तर और दक्षिणी हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग मई के आखिर में एक और अपडेट देगा तो फिलहाल खतरा है लेकिन कितना बड़ा होगा यह जून-जुलाई में पता चलेगा। अगर बारिश सही वक्त पर नहीं आई तो दाल, सब्जी और तेल तीनों की कीमत बढ़ेगी। 


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