ईरान और इजरायल-अमेरिका के टकराव के चलते होर्मुज स्ट्रेट काफी समय तक बंद रहा। तेल की सप्लाई बाधित हुई इसके बावजूद भारत में डीजल-पेट्रोल के दाम नहीं बढ़े। दुनिया के कई देशों में डीजल और पेट्रोल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत आसमान छूने लगी तब भी भारत में दोनों चीजें महंगी नहीं हुईं। अब भारत सरकार ने बताया है कि इसकी असली कीमत तेल कंपनियां चुका रही हैं और उन्हें एक लीटर पेट्रोल पर 20 रुपये और डीजल पर 100 रुपये का नुकसान हो रहा है। यह बेहद रोचक है क्योंकि ज्यादातर राज्यों में डीजल की कीमत 90 रुपये से कम है लेकिन कंपनियों को होने वाला नुकसान 100 रुपये लीटर है।

 

भारत में पिछले चार साल से डीजल-पेट्रोल के दाम में कोई ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। सरकार ने बताया है कि अभी डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाने की योजना भी नहीं है। हाल ही में सरकार ने उन खबरों को भी फर्जी बताया जिनमें कहा जा रहा था कि चुनाव के बाद भारत में तेल की कीमतें लगभग 28 रुपये लीटर तक बढ़ सकती हैं।

क्या कह रही है सरकार?

गुरुवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने पश्चिमी एशिया संकट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'कच्चे तेल के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है फिर भी तेल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं और सरकार कोशिश कर रही है कि दाम स्थिर ही रहें।' बता दें कि पिछले साल इसी समय जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से मिलता था अब वह 113 डॉलर में मिल रहा है। वहीं भारत में अप्रैल 2022 से ही भारत में तेल के दाम में ना तो कमी की गई है और ना ही ज्यादा बढ़ोतरी की गई है।

 

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बता दें कि भारत अपनी तेल जरूरतों का 88 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरी करता है। सुजाता शर्मा ने बताया है कि कच्चा तेल महंगा होने और भारत में कीमतें स्थिर होने का असर है कि कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये और डीजल पर लगभग रुपये लीटर का नुकसान हो रहा है। तेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार ने तेल के निर्यात पर अतिरिक्ट टैक्स लगा दिया है ताकि घरेलू सप्लाई में समस्या न आए।


नुकसान उठाकर क्यों और कैसे तेल बेच रही हैं कंपनियां?

बता दें कि भारत सरकार ने एक नियम लागू किया है जिसके चलते तेल कंपनियों को कच्चा तेल सस्ता कम होने की स्थिति में तेल के दाम घटाने नहीं पड़ते हैं। मान लीजिए कच्चा तेल सस्ता हुआ और तेल कंपनियां 30 रुपये लीटर के हिसाब से खरीदकर 90 रुपये में पेट्रोल बेचती हैं तो उन्हें प्रति लीटर 60 रुपये का मार्जिन मिलता है। अब अगर तेल और सस्ता हो जाए और कंपनियों को तेल 10 रुपये में ही मिले तो नए नियमों के मुताबिक, उन्हें तेल सस्ता नहीं करना होगा और वे एक लीटर 80 रुपये का मार्जिन कमा सकेंगी।

 

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अब पिछले 3-4 साल में कई बार कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद डीजल-पेट्रोल के दाम कम नहीं हुए इसका मतलब है कि इन कंपनियों ने अच्छा-खासा मार्जिन कमाया है। अब संकट की स्थिति में इन कंपनियों का वही मार्जिन खर्च हो रहा है। उदाहरण के लिए अगर अब तेल कंपनियां 100 रुपये के हिसाब से तेल खरीद रही हैं और उसे 80 रुपये में ही बेचना पड़ रहा है तो उन्हें 20 रुपये का नुकसान हो रहा है।

 

इसी नुकसान की भरपाई ये कंपनियां पहले से कमाए मार्जिन से कर रही हैं। सरकार ने एक और राहत इन कंपनियों को दी थी जिसमें सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटा दी थी। इससे जनता के लिए तेल तो सस्ता नहीं हुआ लेकिन कंपनियों को होने वाले नुकसान में थोड़ी कमी आ गई।