भारत और यूरोपीयन यूनियन (EU) ने अब एक-दूसरे को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा देंगे। जनवरी में दोनों पक्षों ने लंबी बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया था, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। समझौते के तहत 93 प्रतिशत भारतीय निर्यात यूरोपीय संघ में बिना सीमा शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे।
भारत-EU समझौते में दोनों एक-दूसरे को MFN दर्जा देने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि अगले 5 साल तक भारत या EU के बीच व्यापारिक शर्तें उदार होंगी। एक्सपोर्ट और इंपोर्ट से जुड़े प्रावधान आसान होंगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच बेहतर व्यापार के अवसर तैयार किए जा सकें।
इसका नाम मोस्ट फेवर्ड इसलिए है क्योंकि जो लाभ सबसे पसंदीदा देश को मिलता है, वही सभी को मिल जाता है। यह नियम, WTO के अनुसार व्यापारिक भेदभाव के खिलाफ है।
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बड़े बदलाव की उम्मीद क्यों है?
EU से आने वाली लग्जरी कारें और वाइन भारत में सस्ती हो जाएंगी। ड्राफ्ट में WTO नियमों से आगे नए आयात-निर्यात प्रतिबंध न लगाने, डिजिटल व्यापार में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा और प्लांट हेल्थ स्टैंडर्ड को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के अनुरूप बनाने पर काम किया जाए।
समझौता लागू होने के एक साल बाद दोनों पक्ष सालाना एक्सपोर्ट डेटा जारी करेंगे, जिससे इस समझौते से होने वाले मुनाफे के बारे में पता चल सके। EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
साल 2023-24 में भारत-EU द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर तक पहुंचा था। समझौता अभी ड्राफ्ट स्टेज में है। कानूनी प्रक्रिया और संसदीय मंजूरी के बाद करीब एक साल में प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस डील से क्या मिलेगा?
- भारत के 93 फीसदी एक्सपोर्ट पर यूरोपीय संघ में कोई टैक्स नहीं लगेगा
- EU के 96.6 फीसदी व्यापारिक सामानों पर टैरिफ खत्म या कम हो जाएंगे
- यूरोपीय कंपनियों को लगभग 4 अरब यूरो की बचत होने की उम्मीद है
- भारत में यूरोपीय संघ से आने वाली लक्जरी कारें और वाइन सस्ती हो जाएंगी
- अनुमान है कि 2032 तक भारत में यूरोपीय संघ का निर्यात दोगुना हो जाएगा
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क्या शामिल नहीं है?
कृषि से जुड़े कुछ संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। सोया, बीफ, चीनी, चावल और डेयरी उत्पाद इस डील का हिस्सा नहीं है।
डिजिटल और व्यापार नियमों में क्या बदलाव होंगे?
- दोनों पक्ष डिजिटल व्यापार में आने वाली मुश्किलों को कम करने और एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल बनाने पर सहमत हुए हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक कॉन्ट्रैक्ट और ई-सिग्नेचर को कानूनी मान्यता दी जाएगी।
- किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए एक 'फास्ट-ट्रैक मेडिएशन' प्रक्रिया अपनाई जाएगी। खाद्य सुरक्षा और फोटोसैनिटरी से जुड़े नियमों को WTO के मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा जिसेस सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया आसान हो सके।
इस डील में और क्या खास है?
- डेटा और प्राइवेसी: ड्राफ्ट में गोपनीयता को एक मौलिक अधिकार माना गया है। दोनों पक्षों के पास डेटा सिक्योरिटी और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसफर पर अपने नियम बनाने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
- जलवायु सहयोग: यूरोपीय संघ भारत के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों के लिए फंड और निवेश जुटाने में मदद करेगा।
- डेटा शेयरिंग: समझौते के लागू होने के एक साल बाद दोनों पक्ष सालाना इंपोर्ट डेटा साझा करना शुरू करेंगे ताकि यह देखा जा सके कि डील का फायदा सही से मिल रहा है या नहीं।
