भारत में अक्षय तृतीया और अन्य बड़े त्योहारों पर अब सोना खरीदने का अंदाज पूरी तरह बदल गया है। अब लोग भारी-भरकम ज्वेलरी के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और एसआईपी (SIP) जैसे विकल्पों में निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा में यह बदलाव इसलिए आ रहा है, क्योंकि आज का निवेशक सुरक्षा और मुनाफे को सबसे ऊपर रख रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल तक त्योहारों पर होने वाली कुल खरीदारी में गहनों का हिस्सा 70% और निवेश वाले उत्पादों (सिक्के, बार) का हिस्सा 30% रहता था लेकिन अब यह अनुपात तेजी से बदलकर 60:40 की तरफ पहुंच रहा है। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय अब सोने को केवल सजने-संवरने के लिए नहीं, बल्कि मुसीबत के समय काम आने वाली बचत और अपनी पूंजी बढ़ाने के मकसद से खरीद रहे हैं।
यह भी पढ़ें: सॉफ्टवेयर से फैक्ट्री तक, क्यों बदल रहा है भारत का बिजनेस मॉडल?
डिजिटल गोल्ड की बढ़ती मांग और फायदे
आजकल लोग दुकान पर जाने के बजाय अपने मोबाइल से ही सोना खरीदना सुरक्षित और आसान मानते हैं। इसके कई बड़े कारण हैं।
सस्ता निवेश: पेटीएम (Paytm), फोनपे (PhonePe) और जियो फाइनेंस (JioFinance) जैसे ऐप्स के जरिए आप सिर्फ 1 रुपये से भी 24 कैरेट शुद्ध सोना खरीदना शुरू कर सकते हैं।
सुरक्षा की चिंता नहीं: डिजिटल गोल्ड खरीदने पर आपको उसे घर में रखने या बैंक लॉकर लेने की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह बीमित होता है और सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है।
कभी भी बेचें: आप जब चाहें मार्केट रेट के हिसाब से इसे तुरंत बेच सकते हैं या फिर जरूरत पड़ने पर इसे सिक्के या बार के रूप में अपने घर पर मंगवा सकते हैं।
ऐप्स के जरिए निवेश
रिलायंस का जियो फाइनेंस ऐप अब इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसके साथ ही फोनपे और पेटीएम ने भी सोने में निवेश की प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया है कि एक आम आदमी भी बिना किसी उलझन के निवेश कर सकता है। इन ऐप्स पर सोने का लाइव मार्केट रेट दिखता है, जिससे निवेशक सही समय पर खरीदारी कर पाते हैं और अपनी जमा पूंजी को सोने की बढ़ती कीमतों का फायदा दिला सकते हैं।
गहनों से क्यों दूर हो रहे हैं निवेशक?
आजकल लोग गहने खरीदने के बजाय सोने के सिक्कों या डिजिटल गोल्ड में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं। इसके पीछे कुछ आसान और बड़े कारण ये हैं।
मेकिंग चार्ज की बचत: ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों को 10% से 25% तक मेकिंग चार्ज देना पड़ता है, जो बेचते समय वापस नहीं मिलता। डिजिटल गोल्ड या गोल्ड बार में यह नुकसान नहीं होता।
प्योरिटी का भरोसा: बाजार में सोना खरीदते समय शुद्धता को लेकर डर बना रहता है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 99.9% शुद्ध (24 कैरेट) सोना ही मिलता है।
रीसेल वैल्यू: निवेश के नजरिए से खरीदे गए सिक्कों और बार की रीसेल वैल्यू गहनों के मुकाबले हमेशा ज्यादा होती है, क्योंकि इसमें पुराने गहनों की तरह कोई काट-छांट नहीं होती।
गोल्ड ईटीएफ और एसआईपी का नया ट्रेंड
त्योहारों के शुभ मौके पर अब लोग केवल फिजिकल सोना ही नहीं, बल्कि कागज या डिजिटल रूप में भी सोना जमा कर रहे हैं।
गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF): यह शेयर बाजार के माध्यम से सोने में निवेश करने का तरीका है। इसमें चोरी का कोई डर नहीं होता और इसे बेचना बेहद आसान है।
फेस्टिव एसआईपी (SIP): एसआईपी का पूरा नाम 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (Systematic Investment Plan) होता है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह 'हर महीने की छोटी बचत' का एक तरीका है। जैसे हम गुल्लक में रोज थोड़े रुपये डालते हैं, वैसे ही आप हर महीने एक तय तारीख पर (जैसे 500 या 1000 रुपये) म्यूचुअल फंड या सोने में निवेश कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें: डिलीवरी ऐप्स पुराने हुए, अब Deep Tech पर सरकार ने लगाया 10 हजार करोड़ का दांव
दिखावे से ज्यादा बचत पर ध्यान
अब लोग सोने को सिर्फ अलमारी में बंद रखने वाली चीज नहीं मान रहे हैं। आज का ग्राहक समझदार हो गया है और वह 'मेकिंग चार्ज' जैसे फालतू खर्चों को बचाकर अपनी मेहनत की कमाई का पूरा फायदा उठाना चाहता है। यही कारण है कि इस बार त्योहारों पर गहनों से ज्यादा डिजिटल गोल्ड और निवेश वाले विकल्पों की धूम है। लोग अब दिखावे के लिए गहने खरीदने के बजाय अपनी जमा पूंजी को सही तरीके से बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें अपनी बचत का पूरा फायदा मिल सके।
