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सॉफ्टवेयर से फैक्ट्री तक, क्यों बदल रहा है भारत का बिजनेस मॉडल?

भारत अब IT सर्विस से हटकर इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बन रहा है। 42,000 करोड़ रुपये के नए सरकारी निवेश से देश में फैक्ट्रियों, नौकरियों और विदेशी निवेश का नया दौर शुरू होने वाला है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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भारत की तरक्की की कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां हमारा काम करने का तरीका पूरी तरह बदल रहा है। पिछले 30 सालों से पूरी दुनिया भारत को इसलिए जानती थी क्योंकि हम सॉफ्टवेयर बनाते थे और दुनिया भर की कंपनियों को आईटी (IT) सर्विस देते थे। अब आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत का यह पुराना मॉडल अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है। अब सारा जोर सिर्फ कंप्यूटर कोडिंग पर नहीं, बल्कि बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां लगाने, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने, सेमीकंडक्टर चिप्स तैयार करने और इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) बनाने पर है। यह बदलाव कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, बल्कि यह भारत के बिजनेस करने के तरीके में आया अब तक का सबसे बड़ा बदलाव है जिसे एक्सपर्ट एक बड़ा 'पिवट' मान रहे हैं।

 

आर्थिक जानकारों का मानना है कि आईटी सेक्टर ने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन तो किया लेकिन अब समय बदल रहा है। आजकल लेबर महंगी हो रही है और एआई (AI) जैसी नई तकनीकों के आने से काम के तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में सिर्फ सर्विस सेक्टर के भरोसे देश की इतनी बड़ी आबादी को नौकरी देना मुमकिन नहीं है। बाजार के विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि भारत का पुराना ग्रोथ मॉडल अब अपनी लिमिट तक पहुंच चुका है और अब समय की मांग है कि हम अपना ध्यान फैक्ट्रियों और डेटा सेंटर्स की तरफ लगाएं। यही वजह है कि अब निवेशक अपना पैसा सॉफ्टवेयर पार्क के बजाय इंडस्ट्रियल इलाकों और कारखानों में लगा रहे हैं, ताकि आम लोगों को जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर काम मिल सके।

 

यह भी पढ़ें: 68,000 करोड़ रुपये का सीफूड एक्सपोर्ट, मछुआरों और छोटे कारोबारियों को बड़ा फायदा

भारत पर दुनिया का भरोसा

आजकल दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां एक खास रणनीति पर काम कर रही हैं जिसे 'चीन प्लस वन' कहा जाता है। इसका मतलब है कि वे अपने सामान के लिए सिर्फ चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं और चीन के अलावा किसी दूसरे सुरक्षित देश में अपनी फैक्ट्रियां लगाना चाहती हैं। भारत इस मौके का सबसे बड़ा फायदा उठा रहा है। एप्पल (Apple) जैसी बड़ी कंपनियों और इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने वाले ग्लोबल ब्रांड्स ने भारत में अपना उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है। जब ऐसी बड़ी कंपनियां भारत आती हैं, तो वे सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं लगातीं, बल्कि उनके साथ छोटे-मोटे पुर्जे बनाने वाली हजारों छोटी कंपनियां भी शुरू हो जाती हैं। इससे देश में निवेश बढ़ता है और हमारा सामान दूसरे देशों में ज्यादा बिकने लगता है।

PLI स्कीम का रिपोर्ट कार्ड

सरकार ने फैक्ट्रियों को बढ़ावा देने के लिए साल 2020 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने के लिए एक खास स्कीम PLI (Production Linked Incentive Scheme) शुरू की थी। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 2020 वाली इस स्कीम की वजह से दिसंबर 2023 तक पूरा 4.45 लाख करोड़ रुपये का सामान बनाया जा चुका है। जहां तक नौकरियों की बात है, तो इस स्कीम ने अब तक सीधे तौर पर लगभग 1.85 लाख लोगों को काम दिया है।

 

हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि सरकार ने इस स्कीम के जरिए 2 लाख नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा था यानी फिलहाल यह आंकड़ा लक्ष्य से थोड़ा कम रहा है। इसके बावजूद, इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्यात (एक्सपोर्ट) में हुई बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारत अब खुद बड़े पैमाने पर सामान तैयार कर रहा है।

42,000 करोड़ रुपये की नई तैयारी

अब सरकार इस कामयाबी को और आगे ले जाना चाहती है। मई 2026 तक सरकार मोबाइल फोन बनाने के लिए 'पीएलआई 2.0' (PLI 2.0) नाम की एक नई योजना ला सकती है। इसके लिए सरकार ने 5 बिलियन डॉलर यानी करीब 42,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बड़ा बजट रखने का मन बनाया है। इस बार सरकार का मकसद सिर्फ फोन बनवाना नहीं है, बल्कि मोबाइल के अंदर लगने वाले छोटे और जरूरी पुर्जे भी भारत की ही फैक्ट्रियों में बनवाना है। इससे भारत आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स का सबसे बड़ा सेंटर बन सकता है।

 

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भविष्य के नए सेक्टर

भारत का भविष्य अब सिर्फ पुराने तौर-तरीकों पर नहीं, बल्कि आने वाले कल की तकनीक पर टिका है। इसमें बिजली से चलने वाली गाड़ियां, मोबाइल चिप्स और बड़े डेटा सेंटर्स शामिल हैं। सरकार सड़कों और दूसरी सुविधाओं पर बहुत पैसा खर्च कर रही है ताकि फैक्ट्रियों को काम करने में कोई परेशानी न हो। सॉफ्टवेयर से फैक्ट्री तक का यह सफर न केवल भारत के व्यापार को बढ़ाएगा, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को इतना मजबूत बना देगा कि हम दुनिया की जरूरतों को भारत में बने सामान से पूरा कर सकेंगे। इससे देश में निवेश, नौकरियां और कमाई तीनों तेजी से बढ़ेंगे।

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