तमिलनाडु आज भारत का सबसे बड़ा पर्यटन राज्य बन चुका है। मंदिर हो, पहाड़ हो, समुद्र किनारा हो या पुरानी धरोहरें तमिलनाडु के पास हर तरह के पर्यटक को देने के लिए कुछ न कुछ खास है और यही वजह है कि यहां हर साल करोड़ों लोग आते हैं। साल 2023 में तमिलनाडु में 28 करोड़ 60 लाख से ज्यादा भारतीय पर्यटक पहुंचे और साथ ही 11 लाख 74 हजार विदेशी सैलानी भी राज्य में आए।
साल 2024 के पहले छह महीनों में ही 18 करोड़ 49 लाख से ज्यादा भारतीय पर्यटक और 6 लाख 45 हजार विदेशी पर्यटक तमिलनाडु घूमने आ चुके थे और राज्य विदेशी पर्यटकों को अपनी तरफ खींचने में पूरे देश में पहले नंबर पर आ गया। इतनी बड़ी तादाद में पर्यटकों का आना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए किसी वरदान से कम नहीं है और यही वजह है कि तमिलनाडु सरकार पर्यटन को अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया मानती है और इस पर लगातार पैसा लगा रही है।
यह भी पढ़ें: EV की पुरानी बैटरियों से करोड़ों कमा रही हैं रीसाइकलिंग कंपनियां
TTDC की कमाई 3 साल में 5 गुना क्यों बढ़ी?
तमिलनाडु टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी TTDC की कमाई साल 2020-21 में सिर्फ 49 करोड़ 11 लाख रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 243 करोड़ 31 लाख रुपये हो गई, मतलब सिर्फ तीन साल में पांच गुना की जबरदस्त बढ़त। यह कमाई सीधे सरकारी टूरिज्म कॉर्पोरेशन की है जिसमें होटल, नाव सेवा, टूर पैकेज और पर्यटन स्थलों पर दी जाने वाली सुविधाएं शामिल हैं। अगर इसमें पर्सनल होटल, गाड़ी, रेस्टोरेंट, मॉल्स और धार्मिक जगहों पर होने वाला खर्च भी जोड़ दें तो राज्य की पूरी पर्यटन से होने वाली कमाई इससे कई गुना ज्यादा है।
सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
कोरोना के बाद से पर्यटकों की संख्या में बहुत तेज बढ़त देखी गई है। 2021 में सिर्फ 57 हजार विदेशी पर्यटक आए थे जो 2022 में 4 लाख 7 हजार हो गए और 2023 में बढ़कर 11 लाख 74 हजार तक पहुंच गए। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की India Tourism Statistics 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, देश के घरेलू पर्यटन में उत्तर प्रदेश के बाद तमिलनाडु दूसरे नंबर पर रहा जहां 21 करोड़ 85 लाख से ज्यादा देशी पर्यटक दर्ज हुए। तमिलनाडु Tourism Policy 2023 के मुताबिक, देश के कुल देशी और विदेशी पर्यटन में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है।
तमिलनाडु बजट 2025-26 में पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक स्थलों के विभाग को कुल 524 करोड़ 16 लाख रुपये दिए गए जिसमें से सिर्फ पर्यटन के लिए 272 करोड़ 46 लाख रुपये अलग से रखे गए। इसी बजट में मामल्लापुरम, तिरुवन्नामलाई, रामेश्वरम, कन्याकुमारी, तिरुचेंदुर, पालनी और नागोर-वेलनकनी जैसी जगहों पर नई और बेहतर सुविधाएं बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये का निवेश तय किया गया, कम जानी-पहचानी पर्यटन जगहों को आगे लाने के लिए 100 करोड़ रुपये अलग रखे गए और ऊटी में 52 एकड़ के Eco Park बनाने के लिए 70 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया।
कहां से कमाता है तमिलनाडु?
मदुरई (मीनाक्षी मंदिर): मदुरई तमिलनाडु का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और यहां का मीनाक्षी अम्मन मंदिर दक्षिण भारत के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले मंदिरों में से एक है। लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां हर साल आते हैं और होटल, खाने और खरीदारी पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं।
मामल्लापुरम (UNESCO की धरोहर): UNSECO की विश्व धरोहर सूची में मामल्लापुरम का शोर टेम्पल, तंजावुर का बृहदेश्र्वर मंदिर और गंगैकोंडचोलापुरम मंदिर शामिल हैं जो इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं को देश-विदेश से अपनी तरफ खींचते हैं। यहां हर साल दिसंबर-जनवरी में मामल्लापुरम डांस फेस्टिवल होता है जो विदेशी पर्यटकों को बीच बहुत पसंद किया जाता है।
ऊटी और कोडाइकनाल: ऊटी तमिलनाडु का सबसे ज्यादा पर्यटकों वाला पहाड़ी इलाका है। यहां की नीलगिरि पर्वत रेलवे यानी टॉय ट्रेन यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है और कोडाइकनाल तथा यरकौड भी लाखों सैलानियों को साल भर अपनी तरफ खींचते हैं।
रामेश्वरम: रामेश्वरम, द्वारका, पुरी और बद्रीनाथ के साथ मिलकर चार धामों में से एक है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पूरे साल बनी रहती है जिससे स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी सीधे जुड़ी हुई है।
कन्याकुमारी: तीन समुद्रों का मिलन बिंदु, विवेकानंद रॉक और अब नया ग्लास का ब्रिज ये सब मिलकर लाखों पर्यटकों को खींचते हैं। हाल ही में कन्याकुमारी में चिन्ना मुट्टम बंदरगाह से थिरुवल्लुवर प्रतिमा तक और ज्यादा नाव सेवाएं शुरू की गई हैं ताकि बढ़ती भीड़ को अच्छे से संभाला जा सके।
यह भी पढ़ें: बीकाजी भुजिया वाले शिवरतन अग्रवाल का निधन, घर-घर पहुंचाया बीकानेरी स्वाद
तमिलनाडु पर्यटकों से कैसे कमा रहा है?
पर्यटन से सरकार की कमाई सिर्फ टिकट से नहीं होती, इसका पूरा तरीका काम करता है। होटल और रेस्टोरेंट पर GST और राज्य का टैक्स लगता है जो सीधे सरकारी खजाने में जाता है। TTDC के अपने होटल, रिसॉर्ट और नाव सेवाओं से सीधी कमाई होती है। मंदिरों और पुरानी धरोहर जगहों पर एंट्री फीस और दान से Hindu Religious Endowments Board को आमदनी होती है। बड़े पर्यटन स्थलों पर पार्किंग, सामान रखने की जगह और गाइड सेवा से भी पैसे आते हैं और विदेशी पर्यटकों के खर्च से विदेशी मुद्रा भी मिलती है।
