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बीकाजी भुजिया वाले शिवरतन अग्रवाल का निधन, घर-घर पहुंचाया बीकानेरी स्वाद

बीकाजी के फाउंडर शिव रतन अग्रवाल का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने बहुत कम पढ़ाई के बावजूद अपनी मेहनत से बीकाजी को दुनिया का बड़ा ब्रांड बनाया।

Shiv Ratan Agarwal, Photo Credit: Social Media

शिव रतन अग्रवाल, Photo Credit: Social Media

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बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल के फाउंडर शिवरतन अग्रवाल का चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया है। वह 75 साल के थे और पिछले कुछ समय से चेन्नई में ही रुके हुए थे। वह अपनी पत्नी के इलाज के लिए वहां गए थे जिनकी हाल ही में हार्ट बाईपास सर्जरी हुई थी। 23 अप्रैल 2026 की सुबह शिवरतन को अचानक बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने उन्हें पहले ही आराम करने की सलाह दी थी और वह पिछले 10 दिनों से चेन्नई में ही थे।

 

शिवरतन अग्रवाल हल्दीराम परिवार से ताल्लुक रखते थे और उनके पूर्वजों ने ही बीकानेर में भुजिया का काम शुरू किया था। वह खुद भी इस खानदानी बिजनेस का हिस्सा थे लेकिन वह अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अपने भाइयों और परिवार के काम से अलग होने का फैसला किया। साल 1993 में उन्होंने बीकानेर में ही 'बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल' की शुरुआत की। आज बीकाजी दुनिया में सबसे ज्यादा भुजिया बनाने वाली कंपनी है और भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्नैक्स ब्रांड बन चुका है।

 

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कंपनी के नाम के पीछे का कारण

शिवरतन ने अपनी कंपनी का नाम बीकानेर शहर को बसाने वाले 'राव बीका' के नाम पर रखा था। वह चाहते थे कि उनके ब्रांड का नाम अलग और यूनिक हो। बीकाजी से पहले उन्होंने 'शिवदीप फूड प्रोडक्ट्स' के नाम से काम शुरू किया था जो उनके और उनके बेटे दीपक के नाम को मिलाकर बना था। उनकी मेहनत से यह कंपनी इतनी बड़ी हुई कि साल 2022 में इसका इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ (IPO) आया और यह शेयर बाजार में लिस्ट हुई।

 

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8वीं पास का करोड़ों वाला साम्राज्य

शिव रतन अग्रवाल ने सिर्फ 8वीं क्लास तक पढ़ाई की लेकिन उनका बिजनेस दिमाग किसी एमबीए से कम नहीं था। उन्होंने 1986 में बहुत छोटी शुरुआत की और आज बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल शेयर बाजार में आ चुकी है, जिसकी कुल कीमत करीब 19,621 करोड़ रुपये है। फोर्ब्स की बिलियनेयर्स की लिस्ट के मुताबिक उनकी अपनी कुल संपत्ति 15,279 करोड़ रुपये है। उनका हमेशा यही मानना रहा कि लोगों को खाने में असली भारतीय स्वाद मिलना चाहिए और क्वालिटी के साथ कभी कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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