मिडिल-ईस्ट में चल रहे संकट के बीच जहां क्रूड ऑयल की कीमतों के बढ़ने और एलपीजी सिलिंडर की कमी की खबरें आ रही हैं वहीं खबर यह भी है कि अप्रत्याशित रूप से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आ रही है। आमतौर पर किसी वैश्विक संकट की स्थिति में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोत्तरी होती है लेकिन इस बार ईरान-इजरायल युद्ध जैसे संकट के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।
इस ट्रेंड को देखकर तमाम इन्वेस्टर परेशान हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। खासतौर पर सोने और चांदी को तो मुश्किल समय में काफी सुरक्षित इन्वेस्टमेंट माना जाता है। सोमवार को सोने की कीमत करीब 8 हजार रुपये से गिरकर 1.36 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई जबकि चांदी की कीमत करीब 26 हजार रुपये से गिरकर करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।
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क्यों गिर रही कीमत?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक कीमतों के गिरने का एक सबसे बड़ा कारण यह है कि जब संकट की शुरुआत हुई तब लोगों ने काफी बड़ी संख्या में सोने और चांदी में इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया क्योंकि इसे मुश्किल समय में काफी सुरक्षित माना जाता है, जिसकी वजह से इसकी कीमतें काफी ऊपर चली गईं थी लेकिन अब प्रॉफिट कमाने के लिए लोगों में बेचने की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है इसलिए सोनें-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।
FD पर ज्यादा भरोसा
एक दूसरा कारण है दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने की वजह से महंगाई की संभावना बढ़ गई है, इससे इंटरेस्ट रेट में कमी आने के बजाय बढ़ने का ट्रेंड दिख रहा है। इन वजहों से बहुत से लोग अपने पैसे को सोने या चांदी में इन्वेस्ट करने के बजाय एफडी या बॉण्ड के रूप में रख रहे हैं।
दुनिया में भी यही ट्रेंड
न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। अमेरिका में स्पॉट गोल्ड की कीमत 4372 डॉलर प्रति औंस से 2.5 प्रतिशत तक गिर गई है जबकि फ्यूचर गोल्ड की कीमत 4.4 प्रतिशत तक गिर गई है। जनवरी से लेकर अब तक सोने की कीमत लगातार गिर रही है और तब से लेकर अब तक के न्यूनतम स्तर पर है। फिर लगातार सोने की कीमत डाउन होने की वजह से लोगों में बेचने का ट्रेंड और ज्यादा बढ़ रहा है जिससे आगे और ज्यादा कीमतें गिरती हैं।
स्पेकुलेशन भी वजह
कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि सोना–चांदी पिछले कुछ महीनों में बहुत तेजी से चढ़े थे, जिससे तकनीकी रूप से 'ओवर‑बॉट' (overbought) हो गए और करेक्शन आना बाजार की भाषा में स्वाभाविक माना गया।
इसके अलावा, इन धातुओं में सट्टेबाजी (trading/speculation) भी बढ़ी थी, ऐसे माहौल में छोटी खबर भी तेज गिरावट की वजह बन जाते हैं।
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ज्वेलरी की मांग भी कम
भारत में सोने की मांग 2025 की तुलना में 2026 में कुछ दबाव में रहने का अनुमान है, क्योंकि ऊंची कीमतें ज्वेलरी की मांग को कम कर रही हैं। इसलिए जहां वैश्विक कीमतें गिर रही हैं, वहीं घरेलू मांग भी सापेक्ष रूप से कमजोर है, जिससे भारत में सोने–चांदी की कीमतों के 'गिरने' का दौर चल रहा है।
