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पैसे की जगह सोना! अफ्रीकी देश में नोट से नहीं, 'गोल्ड' से होती है शॉपिंग

आर्थिक संकट से उबरने के प्रयास में जिम्बाब्वे ने पुराने कागजी नोट रद्द कर सोने के मूल्य से जुड़ी नई मुद्रा ZiG लॉन्च की, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती रही है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो कभी आर्थिक तंगी से गुजरे हैं। इस दौर के बाद कुछ देश पूरी तरह बदहाल हो गए तो कुछ ने समय रहते खुद को संभाल लिया। आर्थिक सुधार की कोशिशों में देशों के नेता कई ऐसे फैसले लेते हैं, जिनका असर भले ही सीधे अर्थव्यवस्था पर न दिखे लेकिन उनकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है। ऐसा ही एक फैसला अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे ने लिया। जिम्बाब्वे सरकार ने पुराने कागजी नोटों को रद्द कर ZiG (Zimbabwe Gold) नाम की नई मुद्रा लॉन्च की। इस मुद्रा की खास बात यह है कि इसकी हर यूनिट की कीमत सोने के मूल्य से जुड़ी है।

 

यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि देश में महंगाई बेहद बढ़ चुकी थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि लोगों को ब्रेड जैसी छोटी चीज खरीदने के लिए भी बोरे भरकर नोट ले जाने पड़ते थे। कागजी नोटों की कीमत लगभग बेकार हो चुकी थी।

 

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ऐसा क्या हुआ था?

साल 2000 में राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने एक विवादास्पद फैसला लिया। उन्होंने श्वेत किसानों की उपजाऊ जमीनें छीनकर उन्हें स्थानीय अश्वेत लोगों में बांट दिया। जिन लोगों को जमीनें दी गईं, उनके पास बड़े पैमाने पर खेती करने का अनुभव और संसाधन जैसे मशीनें, बीज, खाद नहीं थे। इसका नतीजा यह हुआ कि खेती उत्पादन रातों-रात गिर गया। जो देश अनाज निर्यात करता था, वह अपनी जनता का पेट भरने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हो गयाखेती चौपट होने से देश की कमाई बंद हो गईसरकार ने घाटे को पूरा करने के लिए अंधाधुंध नोट छापने शुरू कर दिएमहंगाई इतनी बढ़ गई कि सरकार को 100 ट्रिलियन (100 लाख करोड़) डॉलर का नोट तक छापना पड़ा

 

जिम्बाब्वे में सोने के सिक्कों और ZiG मुद्रा का उपयोग करना किसी फिल्मी कहानी जैसा लग सकता है लेकिन वहां के आम नागरिक के लिए यह महंगाई से बचने का एक तरीका है। 2024 में शुरू हुई यह व्यवस्था अब 2026 में वहां के जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

सोने के सिक्के 'पॉकेट बैंक' की तरह

जिम्बाब्वे में सोने के सिक्के, जिन्हें Mosi-oa-Tunya कहा जाता है 1 औंस से लेकर 0.1 औंस तक के छोटे टुकड़ों में उपलब्ध हैं। एक आम आदमी अपनी पूरी कमाई को लोकल मुद्रा में रखने के बजाय उसे सोने के सिक्के में बदल लेता है। जब भी उसे बड़ी खरीदारी करनी होती है तो वह इन सिक्कों को बैंक में जाकर कैश में बदल लेता है। वहां की मुद्रा का मूल्य रातों-रात गिर सकता है इसलिए लोग सोना को एक सुरक्षित निवेश मानते हैं।

 

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रोजमर्रा की खरीदारी

असली सोने के सिक्के से सब्जी या ब्रेड खरीदना मुश्किल होता है इसलिए आम आदमी ZiG का उपयोग करता है। यह पूरी तरह से सोने के भंडार पर आधारित है। लोग अपने मोबाइल वॉलेट या कार्ड के जरिए किराने की दुकान पर इसी में भुगतान करते हैं। 2026 की शुरुआत तक, इसकी वजह से दुकानों में कीमतों का बार-बार बदलना कम हुआ है। पहले दुकानदार हर घंटे कीमतें बदलते थे लेकिन अब वे ZiG में स्थिर कीमतें रखते हैं। सरकार ने 1, 2 और 5 ZiG के सिक्के जारी किए जिनका उपयोग लोग बस के किराए और छोटी-मोटी खरीदारी के लिए 'चेंज' के रूप में आसानी से कर पा रहे हैं।

 

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क्या हर कोई इसे इस्तेमाल कर सकता है?

सोने के सिक्के ज्यादातर अमीर लोग या कंपनियां खरीदती हैं क्योंकि एक सिक्के की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से काफी ज्यादा होती है। आम मजदूर और छोटे दुकानदार पूरी तरह ZiG के डिजिटल ट्रांजेक्शन और छोटे सिक्कों पर निर्भर हैं। वे अभी भी सोने के असली सिक्के नहीं खरीद सकते

 

जिम्बाब्वे ने अपनी पुरानी मुद्रा (RTGS डॉलर), जिसकी कीमत मिट्टी के बराबर हो गई थी उसे हटा दियाZiG हवा में नहीं छपी है। जिम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक के पास मौजूद सोने और विदेशी मुद्रा के भंडार इसकी वैल्यू को सपोर्ट करते हैं। 2025 के अंत तक, जिम्बाब्वे ने अपने सोने के भंडार को बढ़ाकर लगभग 3.4 मीट्रिक टन कर लिया है ताकि मुद्रा को मजबूती मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश पूरी तरह से अपनी मुद्रा ZiG पर आ जाए।

 

आज भी जिम्बाब्वे पूरी तरह से उबर नहीं पाया है। मुद्रास्फीति अभी भी बहुत अधिक है। सरकार ने भले ही अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए ZiG और सोने के सिक्के जारी किए हैं लेकिन आम जनता के लिए गरीबी और बेरोजगारी अभी भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

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