तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 104 किमी दूर नलगोंडा जिले के कोमटिरेड्डी प्रतीक सरकारी स्कूल से हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इस स्कूल के बाहर बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए पेरेंट्स की लंबी कतारें लगी हुई हैं। ऐस इसलिए है क्योंकि इस स्कूल में कुछ ऐसा है जो अन्य स्कूलों में नहीं है। इस स्कूल का पुनर्निमाण किया गया है। अब यह पूरी तरह से डिजिटल मॉडर्न स्कूल बन चुका है, जिसमें एसी कैंपस, स्मार्ट क्लास रूम, आधुनिक प्रयोगशाला, और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्थिति ऐसी हो गई है कि बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूलों के बजाय पेरेंट्स बच्चों को इस स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। 105 सीटों के लिए इस स्कूल में करीब 3500 बच्चों ने अप्लाई कर दिया है। 

 

तेलंगाना के सरकारी स्कूल में अपने बच्चों के एडमिशन के लिए माता-पिता की लम्बी लाइनों में खड़े हैं। पहली बार  सरकारी स्कूल में दाखिले के लिए पेरेंट्स को धक्का-मुक्की करते देखा गया है। यह स्कूल काफी ज्यादा चर्चा में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी इस पर लोग अपनी राय रख रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि इस स्कूल में ऐसा क्या है और क्या इस स्कूल जैसे दूसरे स्कूल नहीं हैं। 

 

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क्या हैं स्कूल की खासियत?

तेलंगाना के मंत्री और स्थानीय विधायक कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने इस स्कूल का पुनर्निर्माण करवाया है। इसके लिए करीब 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह स्कूल पहले एक खस्ताहाल सरकारी स्कूल था जो अब 2500 वर्ग गज में फैला एक मॉर्डन स्कूल बन गया है। इस स्कूल में 36 क्लासरूम हैं और सभी में एसी लगे हैं। इसके साथ ही डिजिटल बोर्ड, एआई स्मार टीचिंग, कंप्यूटर लैब और एक डिजिटल लाइब्रेरी भी इस स्कूल में है। ऐसी सुविधाएं आमतौर पर सरकारी संस्थानों में खासकर स्कूलों में देखने को नहीं मिलती हैं। 

 

इसके अलावा यहां पर एक्टिविटी रूम, ग्राउंड, मिड-डे मील, अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं में शिक्षा जैसी तमाम सुविधाएं हैं जो इस स्कूल की डिमांड को काफी ज्यादा बढ़ा रही है। बच्चों के माता-पिता कह रहे हैं कि यह स्कूल किसी सरकारी स्कूल की तरह नहीं लगता है। इतनी सुविधाओं वाले सरकारी स्कूल में बच्चे फ्री में ही पढ़ाई करेंगे। 

बेटे की याद में बनवाया स्कूल

मंत्री कोमटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने इस स्कूल के लिए कुल 8 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि मेरे 19 साल के बेटे प्रतीक की 2011 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसकी याद को बनाए रखने के लिए मैंने मन बनाया था कि बेटे की याद में एक स्कूल बनाऊंगा या किसी स्कूल की मदद करूंगा, जहां शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई जा सके।

 

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दिल्ली में भी है ऐसा स्कूल

भारत के सरकारी स्कूलों में मॉडर्न, AI और डिजिटल सुविधाओं की मांग अब तेजी से बड़ रही है। देश की राजधानी दिल्ली में एक सरकारी स्कूल ऐसा ही है। सरोजिनी नगर दिल्ली में स्थित सीएम श्री स्कूल को बदलते समय की मांगों के साथ बनाया गया है। इस स्कूल में एआई आधारित पढ़ाई पर फोकस किया गया है। इसमें एआई आधारित स्मार्ट क्लासरूम हैं, मल्टी स्किल लैब हैं, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, लैंग्वेज लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह दिल्ली सरकार की सीएम श्री स्कूल्स  योजना का हिस्सा है, जिसमें कुल 75 ऐसे स्कूल बनाए जा रहे हैं और पूरे शहर के 7000 क्लासरूम को एआई आधारित स्कूल बनाने का लक्ष्य है। इसके अलावा कर्नाटक के उदुपी जिले में स्थित यह स्कूल कर्नाटक का पहला सरकारी स्कूल है जिसमें AI रोबोट टीचर 'Iris' को इंट्रोड्यूस किया गया है।