पश्चिम बंगाल में अब विधानसभा चुनावों में कुछ ही दिनों का समय शेष रह गया है। इन चुनावों से पहले एसआईआर प्रक्रिया के जरिए चुनाव आयोग ने कई नामों को वोटर लिस्ट से हटा दिया है। चुनाव आयोग ने कुल 91 लाख के करीब मतदाताओं को नाम वोटर लिस्ट से काट दिया है। इससे राज्य में सियासत तूफान खड़ा हो गया है। टीएमसी के साथ-साथ सभी विपक्षी पार्टियां बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साध रही हैं। वहीं, बीजेपी इसे सही बता रही है। इस बीच माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से टीएमसी को इसी महीने के अंत में होने वाले चुनावों में नुकसान हो सकता है। 

 

पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से 11.9 प्रतिशत वोटरों के नाम हटाए गए हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि किस पैमाने पर वोटरों को हटाया गया है। सीएम ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर ही 51 हजार वोट कटे हैं। ऐसे में चुनाव में एसआईआर एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। 

 

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ममता की राह होगी मुश्किल

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एसआईआर प्रक्रिया से ममता बनर्जी की राह मुश्किल जरूर होगी। वोटर लिस्ट में सुधार से करीब 50 सीटों पर ममता बनर्जी के लिए चुनौती बढ़ गई है। राज्य की करीब 49 सीटों पर 90 प्रतिश से ज्यादा हिंदू आबादी है। इनमें 2021 के चुनाव में 29 सीटें टीएमसी ने और 20 सीटें बीजेपी ने जीती थीं। वहीं, 25 प्रतिशत से ज्यादा आबादी वाली 146 सीटों में से टीएमसी ने 131 पर जीत दर्ज की थी। अब जिन सीटों से नाम कटे हैं उन पर नए समीकरण बन रहे हैं जिन्हें टीएमसी के खिलाफ बताया जा रहा है। 

किन जिलों में कटे सबसे ज्यादा नाम?

ममता बनर्जी की राह इसलिए मुश्किल मानी जा रही है क्योंकि जिन सीटों पर पहले अल्पसंख्यक आबादी के कारण ममता बनर्जी की जीत पक्की मानी जा रही थी उन सीटों पर अब मुकाबला होने की संभावना है। मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा वोटर हटाए गए हैं। यह जिला 50 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला जिला है और इसमें 22 सीटों में से सिर्फ 2 पर बीजेपी को जीत मिली थी और 20 पर टीएमसी ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में अब इस जिले की कई सीटों पर समीकरण बदल गए हैं।

 

इसके अलावा उत्तर 24 परगना, मालदा, नदिया और दक्षइण 24 परगना में सबसे ज्यादा वोट हटाए गए हैं। इन सभी जिलों में टीएमसी ने बीजेपी को मात दी थी और इन में से ज्यादातर जिले मुस्लिम बहुल हैं। यही कारण है कि ममता बनर्जी के लिए इसे एक मुश्किल जंग माना जा रहा है। 

 

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क्या ममता को SIR से फायदा भी हो सकता है?

भले ही ममता बनर्जी के लिए एसआईआर प्रक्रिया घातक बताई जा रही हो लेकिन इससे अल्पसंख्यक समुदाय ममता बनर्जी के पक्ष में लामबंद दिखाई दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया से राज्य में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय एकजुट होकर टीएमसी के साथ आ गया है। ऐसे में अगर अल्पसंख्य समुदाय के लोग भारी संख्या में सीएम बनर्जी के लिए वोट कर देते हैं तो ममता को कुछ जगहों पर लाभ मिल सकता है। हालांकि, इससे ध्रुवीकरण और ज्यादा तेज हो रहा है जो ममता बनर्जी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।