पश्चिम बंगाल का अलीपुरद्वार जिला, भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। एक तरफ चाय के बड़े-बड़े बागान हैं, दूसरी तरफ, भारत के चिकेन नेक कहे जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर। अलीपुरद्वार से यहां की दूरी महज 100 किलोमीटर है। अलीपुरद्वार, पहले जलपाईगुड़ी का हिस्सा था। 25 जून 2014 को यह जलपाईगुड़ी से अलग होकर पश्चिम बंगाल का 20वां जिला बना।
अलीपुरद्वार में अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी करीब 80 फीसदी है। यहां राजबंशी, मेच, राभा, संथाल और ओरांव के साथ-साथ दुकपा, भूटिया और लेपचा जैसी जनजातियां एक साथ रहती हैं। दुनिया की सबसे छोटी जनजातियों में से एक जनजाति टोटो, यहां के टोटापाड़ा में रहती है।
यहां इतिहास और आस्था के कई निशान हैं। यहां बक्सा का किला है। स्वतंत्रता संग्राम आंदलोन के दौरान क्रांतिकारियों को अंग्रेज यहां बंद करते थे। यहां का जलधेश्वर मंदिर, आध्यात्मिक चेतना का केंद्र कहा जाता है। अंग्रेजों ने अलीपुरद्वार को चाय बागान का केंद्र बना दिया था। आज भी चाय के बागान, यहां की अर्थव्यवस्था की इतिहास रीढ़ हैं।
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भौगोलिक तानाबाना कैसा है?
अलीपुरद्वार में खूब सारी नदियां और जंगल हैं। तोर्षा, रायडक, कालजनी, संकोश और जयंती जैसी नदियां होकर गुजरती हैं। उत्तर में भूटान की पहाड़ियां हैं, यहां घने जंगल हैं और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद खास है। जहां का जल्दापारा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैड़े के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। यहां एक बक्सा टाइगर रिजर्व भी है।
एक नजर, अलीपुर द्वार जिले पर
अलीपुरद्वार जिले में दो नगर निगम हैं, अलीपुरद्वार और फलाकाटा। यहां 6 सामुदायिक विकास खंड हैं। मदारीहट-बीरपारा, अलीपुरद्वार-1, अलीपुरद्वार 2, फालाकाटा, कालचीनी और कुमारग्राम। 6 ब्लॉक के अंतर्गत 64 ग्राम सभाएं आती हैं। अलीपुलद्वार में एक लोकसभा और 5 विधानसभाएं हैं। लोकसभा सीट का नाम अलीपुरद्वार है। 5 विधानसभाओं के नाम अलीपुरद्वार, कुमारग्राम, फालाकाटा, मदारीहट और कालचीनी है। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां दमखम दिखाया था। यहां से मनोज टिग्गा सांसद चुने गए हैं।
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जातीय समीकरण
अलीपुरद्वार में हिंदुओं की आबादी करीब 80 फीसदी है। मुसलमान 8.74 प्रतिशत हैं, ईसाई 7.52 फीसदी हैं। बौद्ध और दूसरे आदिवासी धर्म 1 फीसदी हैं। यहां जनजातीय आबादी करीब 80 फीसदी है।
2021के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था?
2021 के विधानसभा चुनाव में 3 सीटें बीजेपी के पास और 2 सीटें, तृणमूल कांग्रेस के पास हैं। कुमारग्राम से मनोज कुमार ओराओं, कालचीनी से बिशाल लामा और फालाकाटा से दीपक बर्मन विधायक हैं। मदारीहट से तृणमूल कांग्रेस के जय प्रकाश टोपो और अलीपुरद्वार से सुमन कानिला विधायक हैं।
विधानसभाओं पर एक नजर
कुमारग्राम विधानसभा की सीट संख्या 10 है। साल 1967, 1969 और 1971 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी को जीत मिली। पहले 3 चुनावों में पियूषकांति मुखर्जी विधायक चुने गए। साल 1972 में देवब्रत चटर्ज विधायक बने। साल 1977, 1982, 1987, 1991, 1996, 2001, 2006, 20011 और 2014 के चुनावों में लगातार रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) को जीत मिली। 40 साल कोई दूसरी पार्टी यहां जड़ नहीं जमा पाई। 2016 में TMC के जेम्स कूजुर जीते। 2021 में मनोज कुमार ओराओं ने बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की।
कालचीनी विधानसभा से साल 2021 में बीजेपी के बिशाल लामा ने जीत दर्ज की। इस सीट पर RSP और कांग्रेस का दबदबा रहा है। साल 1957 में पहली बार यहां से देवेंद्रनाथ ब्रह्म मंडल को जीत मिली थी। वह कांग्रेस पार्टी से थे। दूसरे चुनाव में नानी भट्टाचार्य जीते, वह RSP के नेता थे। साल 1967, 69, 71, 72 और 77 में हुए चुनावों में डेनिस लाकड़ा जीतते रहे। साल 1982 में एक बार फिर RSP ने बाजी पलटी और मनोहर तिर्के चुनाव जीते। 1987 में खुदीराम पाहन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। 1991 और 1996 के विधानसभा चुनाव में RSP के मनोहर तिर्के चुनाव जीते। 2001 में प्रबन कुमार लाकड़ा कांग्रेस के टिकट पर जीते। 2006 में मनोहर तिर्के ने एक बार जीत दर्ज की। 2009 में उपचुनाव हुए और उम्मीदवार विल्सन चंपामारी ने जीत हासिल की। साल 2011 में वह टीएमसी में शामिल हुए, 2011 और 2016 में भी जीत मिली। 2021 में बीजेपी के बिशाल लामा ने बाजी मारी।
मदारीहाट विधानसभा सोशलिस्ट पार्टियों की गढ़ है। 1962 के चुनाव में पहली बार RSP (I) को जीत मिली, फिर कांग्रेस को पहली कामयाबी 1967 में मिली। 1969 से लेकर 2011 तक जितने भी चुनाव हुए, उसमें RSP (I) को ही जीत मिली। 2016 में बीजेपी ने RSP (I) का तिलिस्म तोड़ा और 2016 और 2021 के चुनाव में लगातार जीते। मनोज टिग्गा लोकसभा के लिए 2024 में चुने गए तो उपचुनाव हुए। उपचुनाव में TMC ने बाजी मार ली। यहां से जय प्रकाश टोपो विधायक हैं।
अलीपुरद्वार विधानसभा एक जमाने में कांग्रेस और RSP की यह सीट गढ़ रही है। कांग्रेस के पीयूष क्रांति मुखर्जी ने यहां साल 1951, 1957 और 1962 के चुनावों में लगातार जीत हासिल की। 1977 से लगातार 9 बार यहां से RSP को जीत मिली। निर्मल दास यहां के बड़े नेता थे। 2011 में कांग्रेस, 2016 में सौरव चक्रवर्ती और 2021 में बीजेपी के सुमन कंजीलाल को जीत मिली। दीपक बर्मन यहां से विधायक हैं।
फालाकाटा विधानसभा भी सोशलिस्ट पार्टियों का गढ़ रही है। साल 1957 में जब पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तो प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को जीत मिली। साल 1962 में यहां कांग्रेस ने बाजी पलटी। 1976 में एक बार फिर कांग्रेस ने जीत हासिल की। साल 1967, 1969, 71, 72 और 1977 के चुनावों में जगदानंद रॉय यहां से जीते थे। दो चुनाव में वह प्रजा सोशलिस्ट के साथ रहे, 1969 के बाद के चुनाव में वह कांग्रेस के साथ हुए। पहली बार 1977 में यहां CPI (M) ने जड़ें जमाईं। 1977, 82, 87, 91, 96, 2001 और 2006 के चुनाव में लगातार CPI (M) को जीत मिली। 2011 और 2016 में TMC और 2021 में बीजेपी को जीत मिली।
2021 में क्या हुआ था?
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जिले की स्थितिक्षेत्रफल- 3136 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर- 78.57%
विधानसभा सीटें- 5
नगर पालिका- 2
ब्लॉक पंचायत- 6
ग्राम पंचायत- 64
गांव- 327
