पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए जोर आजमाइश जारी है। पुडुचेरी, असम और केरल में प्रचार खत्म हो गए हैं और गुरुवार को वोट डाले जाने हैं। इससे पहले यह देखने को मिला है कि कई दलों ने अपने विपक्षी दलों के मिले होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल में आरोप लगाए कि लेफ्ट गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आपस में मिले हुए हैं। तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन कहता है कि बीजेपी और थलपति विजय पर्दे के पीछे से मिले हुए हैं। वहीं, ममता बनर्जी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में उन्हें हटाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी तक मिले हुए हैं। इस सबके बीच यह ट्रेंड देखने को मिला है कि मुद्दों से उतर सभी दल या गठबंधन अपने विपक्षियों के मिले होने का आरोप लगा रहे हैं ताकि चुनाव में दलगत ध्रुवीकरण किया जा सके।

 

तमिलनाडु में सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK)-कांग्रेस गठबंधन के सामने AIADMK-BJP गठबंधन और थलपति विजय की तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) के रूप में दोहरी चुनौती है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सामने बीजेपी, कांग्रेस, लेफ्ट और हुमायूं कबीर-असदुद्दीन ओवैसी के रूप में कई अलग-अलग राजनीतिक दल खड़े हैं। केरल में सत्ताधारी लेफ्ट गठबंधन के सामने कांग्रेस की अगुवाई वाला यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) और बीजेपी की अगुवाई वाला NDA गठबंधन है। 

 

यह भी पढ़ें: 'गुजरातियों का हमेशा सम्मान किया', विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे ने जताया खेद

 

असम में बीजेपी और कांग्रेस की सीधी लड़ाई है लेकिन कुछ सीटों पर बदरुद्दीन अजमल और असदुद्दीन ओवैसी का गठबंधन है। इसी तरह पुडुचेरी में सत्ताधारी AINRC-BJP गठबंधन के सामने कांग्रेस-डीएमके गठबंधन और TVK हैं। यह दिखाता है ज्यादातर राज्यों में इस बार त्रिकोणीय लड़ाई या तो है या बनाने की कोशिश की जा रही है।

मिलीभगत का आरोप क्यों लगा रहे दल?

पश्चिम बंगाल में मुख्य लड़ाई बीजेपी और टीएमसी के बीच है। अब अगर यहां तीसरा धड़ा थोड़ा भी मजबूत होता है तो इसका नुकसान सत्ताधारी टीएमसी को होने की आशंका है। इसकी वजह है कि लेफ्ट को मिलने वाला काफी बड़ा वोटबैंक अब टीएमसी का हो चुका है और कांग्रेस को मिलने वाला मुस्लिम वोटबैंक भी टीएमसी ने हथिया लिया है। अगर इन दोनों ही वोटबैंक में सेंध लगती है और कांग्रेस या बाकी के दलों को वोट मिलते हैं तो कई सीटों पर टीएमसी की स्थिति कमजोर हो जाएगी। यही वजह है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के नेता इस चुनाव को आमने-सामने की लड़ाई ही रखना चाहते हैं।

 

इसी के चलते वे बार-बार एक तरफ टीएमसी और दूसरी तरफ बाकी सबको रखना चाहते हैं। अगर उन्हें ऐसा करने में कामयाबी मिलती है तो इसका सीधा फायदा टीएमसी को मिलने की उम्मीद है। 2021 के चुनाव में यही देखने को मिला था और हाई स्टेक वाले चुनाव में लेफ्ट और कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था जबकि दोनों ने एकसाथ चुनाव लड़ा था।

 

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: उम्मीदवार हैं, दावेदारी है, लेकिन कांग्रेस के दिग्गज गुम हैं

केरल में आरोप लगा रही कांग्रेस

कांग्रेस को इस चुनाव में सबसे ज्यादा उम्मीद केरल से है। केरल में कांग्रेस के रास्ते की एक बाधा यह है कि सत्ता विरोधी बंट सकता है। केरल में लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रही बीजेपी को पिछले लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव में कई जगहों पर अच्छे वोट मिले हैं। भले ही कांग्रेस की अगुवाई वाला UDF मजबूत दिख रहा हो लेकिन कांग्रेस को आशंका है कि अगर वोट बंटे तो एक बार फिर से वह सत्ता से दूर रह सकता है। यही वजह है कि खुद राहुल गांधी आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी चाहती है कि केरल में लेफ्ट को जीत मिली है।  

 

राहुल गांधी बार-बार कह रहे हैं कि बीजेपी केरल में लेफ्ट को जिताना चाहती है। कांग्रेस अपने प्रचार में पिनराई विजयन को कहती है कि वह 'धोती पहने मोदी' हैं। राहुल गांधी ने तो यह तक कहा है, 'जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कंट्रोल करते हैं, उशी तरह नरेंद्र मोदी केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को कंट्रोल करते हैं।' इस तरह कांग्रेस पिनराई विजयन के खिलाफ जाने वाले सारे वोटर्स को अपने पक्ष में लामबंद करना चाह रही है। अगर ऐसा हो जाता है तो कांग्रेस को उम्मीद है कि वह 100 सीटों तक भी पहुंच सकती है।

तमिलनाडु-पुडुचेरी में विजय पर निशाना

 

थलपति विजय इस बार अपनी नई नवेली पार्टी TVK को लेकर मैदान में उतरे हैं। तमिलनाडु और पुडुचेरी में अकेली उतरी TVK काफी चर्चा में है। यही वजह है कि तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन बता रहा है कि विजय तो बीजेपी से मिले हुए हैं। बीजेपी ने विजय के साथ गठबंधन की कोशिश भी की थी, ऐसे में विजय के बारे में ऐसी बातें करना डीएमके के लिए आसान भी हो रहा है। विजय भी डीएमके पर ज्यादा हमलावर हैं और AIADMK-BJP गठबंधन पर हमला करने से बचते हैं, इसलिए डीएमके-कांग्रेस गठबंधन यह साबित करने में जुटा हुआ है कि एक तरफ वह है और दूसरी तरफ बाकी सब आपस में मिले हुए हैं।

 

यह भी पढ़ें: 1957 में केरल के चुनाव में लेफ्ट को कैसे मिल गई थी पहली चुनावी जीत?

 

दरअसल, तमिलनाडु में यह माना जा रहा है कि आगामी सरकार दी दशा और दिशा TVK का प्रदर्शन तय करेगा। माना जा रहा है कि TVK को जो वोट मिलेगा वह डीएमके विरोधी ही होगा। अगर उसे ज्यादा वोट मिले तो डीएमके कमजोर होगी। कमोबेश यही कोशिश पुडुचेरी में भी हो रही है। वहां भी कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन यह बताने की कोशिश कर रहा है कि विजय की पार्टी सिर्फ वोट काटने की कोशिश कर रहा है।