पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को चुनाव है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस ने एक साल पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक, महीनों पहले से पश्चिम बंगाल का दौरा कर रहे हैं। कैबिनेट मंत्रियों की पूरी टीम, पश्चिम बंगाल में उतर चुकी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तरफ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी तक, जगह-जगह पैदल घूमकर रोड शो कर रहे हैं। इस रेस में कहां कांग्रेस हर है, हर किसी के मन में यही सवाल है।
कांग्रेस के बड़े नेता, असम, पुडुचेरी, केरल और यहां तक कि तमिलनाडु में भी नजर आ रहे हैं लेकिन पश्चिम बंगाल से दूर भाग रहे हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता, असम में सक्रिय कैंपेनिंग से बचते नजर आ रहे हैं। गए हैं तो इतने कम वक्त के लिए कि 243 छोड़िए, 43 सीटें तक न कवर हो पाएं।
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पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रचार किसके जिम्मे है?
कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल के लिए 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट मंगलवार को जारी की है। इस लिस्ट में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का नाम भी शामिल है।
कहां गुम हैं दिग्गज नेता?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मंगलवार को पश्चिम बंगाल पहुंचे तो हैं लेकिन उनकी रैलियां सीमित हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल भी स्टार प्रचारकों की लिस्ट में हैं लेकिन सक्रिय प्रचार से दूर नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया हैंडल पर भी पश्चिम बंगाल पर जोर कम नजर आ रहा है। कांग्रेस की चुनावी कैंपेन शुंभकर सरकार भरोसे है।
अधीर रंजन चौधरी, अकेले सेंट्रल बंगाल पर जोर दे रहे हैं लेकिन अभी तक उनके समर्थन में कोई व्यापक रैली नहीं हो पाई है। वह पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को हमेशा एकला चलो की राह पर चलाने के समर्थक रहे हैं। ममता बनर्जी के साथ उनकी जुबानी जंग सुर्खियों में रही है लेकिन वह अपनी ही पार्टी में अलग-थलग से पड़ गए हैं।
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पश्चिम बंगाल में कांग्रेस vs TMC में क्या हो रहा है?
सेंट्रल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच अच्छी लड़ाई देखने को मिल सकती है। बहरामपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं। यह उनके लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है। उनका यहां प्रभाव रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें तृणमूल के यूसुफ पठान से हार मिली थी। हाल ही में दोनों टीएमसी नेताओं के साथ उनकी झड़प भी हुई थी। लोगों ने उनकी रैली के आगे टीएमसी के नारे लगाए थे।
मालदा जिले में भी लड़ाई दिलचस्प है। मलतिपुर सीट पर तृणमूल छोड़कर कांग्रेस में वापस आईं मौसम बेनजीर नूर चुनाव लड़ रही हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री एबीए गनी खान चौधरी की भतीजी हैं। उनके परिवार का मालदा में दबदबा है। ममता बनर्जी, खुद इसे गंभीरता से ले रही हैं। मालदा में कई रैलियां कर चुकी हैं, जिसमें वह नूर परिवार पर सवाल उठा रही हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा भी इन्हीं नेताओं की ही है। इन इलाकों में कांग्रेस का पुराना आधार अभी भी बना हुआ है। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने इन दोनों जिलों में 28 सीटें जीती थीं। अब अधीर रंजन चौधरी और मौसम बेनजीर नूर कांग्रेस को फिर से मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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क्यों गुम हैं कांग्रेस के बड़े नेता?
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस से दूरी की एक वजह और बताई जा रही है। असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव अब सिर पर है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में फिर भी थोड़ी राहत है। असम, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में 9 अप्रैल को चुनाव होंगे। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव 23 अप्रैल को हैं। कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा कह रहा है कि जैसे ही पहले चरण के तहत 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, कांग्रेस पूरा दमखम तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर दिखाएगी।
एक धड़ा यह भी कह रहा है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार, कांग्रेस के केंद्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का चुनाव सिर्फ कुछ सीटों तक सीमित है। भले ही गठबंधन न हो लेकिन यह चुनाव, बीजेपी के खिलाफ फ्रैंडली फाइट जैसा है। मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे केंद्रीय स्तर के नेता, इसी वजह से पश्चिम बंगाल जाने से कतरा रहे हैं।