केरल में हो रहे विधानसभा चुनाव में कम से कम डेढ़ दर्जन राजनीतिक दल ऐसे हैं जो कम से कम एक सीट जीतने का माद्दा रखते हैं। मुख्य तौर पर भले ही लोग लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट को जानते हैं लेकिन ये गठबंधन कई छोटी-बड़ी पार्टियों से मिलकर बने हैं। UDF की अगुवाई कांग्रेस कर रही है और लेफ्ट की अगुवाई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) कर रही है। मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन इसी CPM के नेता हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी कुछ दलों से गठबंधन किया है और उसकी कोशिश है कि यह गठबंधन प्रदेश की सभी 140 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर चुनौती पेश कर सके।

 

तिरुवनंतपुरम में अपना मेयर बनाने में कामयाब हुई बीजेपी का जनाधार  केरल में लगातार बढ़ रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में एक सीट और फिर निकाय चुनावों में ठीक-ठाक प्रदर्शन के बलबूते बीजेपी दावा कर रही है कि वह भी मजबूत दावेदार है। इस दावेदारी में उसे तुषार नतेसन की पार्टी भारत धर्म जन सेना (BJDS) और साबू एम जैकब की पार्टी ट्वेंटी-ट्वेंटी का भी साथ मिला है। आइए केरल के गठबंधनों को विस्तार से समझते हैं।

सत्ताधारी LDF में कौन-कौन है?

 

केरल की सरकार चला रहे LDF गठबंधन में बड़ी और अहम पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) है। दूसरे नंबर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) आती है। इस बार CPM खुद 81 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और CPI को 25 सीटें मिली हैं। तीसरे नंबर पर जोश के मणि की केरल कांग्रेस (मणि) है। लेफ्ट गठबंधन में इसे 12 सीटें मिली हैं। खुद जोश के मणि एक बार फिर से पाला से चुनाव लड़ रहे हैं। 2021 में वह इसी सीट पर केरल डेमोक्रैटिक पार्टी (KDP) के मणि कप्पन से हार गए थे। इस बार फिर से इस सीट पर इन्हीं दोनों का मुकाबला होना है।

 

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तीसरे नंबर पर इंडियन सोशलिस्ट जनता दल है जिसे कुल 3 सीटें मिली हैं। यह वही पार्टी है जिसे जनता दल (सेक्युलर) से निकले नेताओं ने बनाया है। शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) भी केरल में लेफ्ट गठबंधन का हिस्सा हैं। इन दोनों को तीन-तीन सीटें मिली हैं। कांग्रेस (सेक्युलर), केरल कांग्रेस (बी), इंडियन नेशनल लीग और नेशनल सेक्युलर कॉन्फ्रेंस को एक-एक सीट दी गई है।

 

सीपीएम-81
सीपीआई-25
केरल कांग्रेस (M)-12
इंडियन सोशलिस्ट जनता दल-3
एनसीपी (शरद पवार)-3
RJD-3
कांग्रेस (सेक्युलर)-1
केरल कांग्रेस (बी)-1
इंडियन नेशनल लीग-1
NSC-1


UDF में कौन-कौन है?

UDF में सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है। कांग्रेस इस बार खुद 92 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और कुछ सीटों पर वह निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन कर रही है। इस तरह उसने अपने खाते में कुल 95 सीटें रखी हैं। केरल में कांग्रेस की सबसे बड़ी और प्रमुख सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) है। IUML को इस बार 27 सीटें मिली हैं। केरल कांग्रेस (जोसेफ) को 8, रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को 5, केरल कांग्रेस (जैकब), रिवॉल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और केरल डेमोक्रैटिक पार्टी को एक-एक सीट दी गई है।

 

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UDF-
कांग्रेस-92
IUML-27
केरल कांग्रेस (जोसेफ)-8
रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी- 5
केरल कांग्रेस (जैकब)-1
रिवॉल्यूशनरी मार्किस्ट पार्टी-1
कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी-1
तृणमूल कांग्रेस-1
केरल डेमोक्रैटिक पार्टी-1

 

इसके अलावा, अंबलपुज्झा में जी सुधाकर, ओट्टापालाम में पी के पासी को और तालिपरंबा में टी के गोविंदन को UDF अपना समर्थन देगा। इसकी वजह यह है कि ये नेता अपनी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतने में सक्षम हैं और UDF के दल इन सीटों पर ज्यादा मजबूत स्थिति में नहीं हैं।

NDA में कौन-कौन है?

 

केरल में एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी है। बीजेपी अब तक कुल दो लिस्ट जारी करके 86 उम्मीदवार उतार चुकी है। भारत धर्म जन सेना (BJDS) अभी तक 23 उम्मीदवार उतार चुकी है। वहीं, ट्वेंटी-ट्वेंटी पार्टी अभी तक 12 उम्मीदवार उतार चुकी है। इस तरह इन तीन दलों ने 111 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। केरल कामराज कांग्रेस, AIADMK और JSS भी इस गठबंधन का हिस्सा हैं और उन्हें भी NDA में कुछ सीटें दी गई हैं।