पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान करीब 25 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। वोटर से कुछ लोगों के नाम ऐसे बाहर हुए हैं, जो दशकों से अपनी जगह और जमीन पर काबिज हैं। ऐसे ही एक नाम कांग्रेस उम्मीदवार महताब शेख का भी है। वह फरक्का से आते हैं, मुर्शिदाबाद उनकी राजनीतिक का केंद्र है, लेकिन उन्हीं का नाम, SIR के बाद वोटर लिस्ट से बाहर चला गया।

रविवार को SIR ट्रिब्यूनल ने कांग्रेस उम्मीदवार महताब शेख का नाम, फरर्कका विधानसभा क्षेत्र की चुनाव सूच में बहाल किया है। महताब शेख पश्चिम बंगाल में नाम कटने के बाद ट्रिब्यूनल से नाम वापस पाने वाले पहले मतदाता बने हैं। अब उनका हवाला देकर, कई लोगों के नाम, वोटर लिस्ट में जोड़े जा सकते हैं। चुनौती बस इतनी सी है कि ट्रिब्युनल के पास वक्त भी कम हैं और संसाधन भी। 

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कैसे वापस जुड़ा नाम?

पश्चिम बंगाल में ऐसे विवादों के त्वरित निपटारे के लिए 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी है। महताब शेख का मामला तो सुन लिया गया लेकिन अभी लाखों लोगों को अपनी बारी का इंतजार है।

महताब शेख  कौन हैं?

महताब शेख ठेकेदार हैं। वह फरक्का विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। उन्होंने 2 अप्रैल को SIR प्रक्रिया में नाम बाहर  होने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट के निर्देश पर ट्रिब्यूनल ने उनका केस जल्दी सुन लिया। महताब शेख के पिता का नाम पुरानी मतदाता सूची से मेल नहीं खाने की वजह से उन्हें लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस मिला था। चुनाव आयोग, उन लोगों को इस लिस्ट में लिखता है, जिनकी ओर से पेश किए गए विवरणों में धांधली होती है।

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महताब शेख क्या कह रहे हैं?

महताब शेख का कहना है कि उनके नाम में कोई गड़बड़ी नहीं थी, फिर भी नाम काट दिया गया। शुरुआती जांच में गलती हुई। सीनियर जज ने उसे ठीक किया। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि जांच प्रक्रिया कितनी सही होगी, जब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। लाखों लोगों के नाम ऐसे ही काटे गए होंगे।

कैसे वापस मिल गया नाम?

महताब शेख ने आधार, वोटर आईडी, पैन, पासपोर्ट और बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिखाए। फरवरी 28 की सूची में उनका नाम काट दिया गया था। पूर्व कलकत्ता हाई कोर्ट चीफ जस्टिस टीएस शिवग्नानम की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल ने सभी दस्तावेज देखे और रविवार शाम 8 बजे तक नाम बहाल करने का आदेश दिया। अब महताब शेख सोमवार को नामांकन दाखिल कर सकेंगे।

महताब की तो सुन ली गई, आम आदमी की मुश्किलें क्या?

जिन 19 ट्रिब्युनल को पश्चिम बंगाल में SIR विवाद के निपटारे की जिम्मेदारी दी गई है, वे पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर रहे हैं। महताब शेख के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था, इसलिए सुनवाई जल्दी हो गई। दूसरे मामलों में और देरी हो सकती है। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 42 प्रतिशत लोगों के वोटर लिस्ट में नाम रिजेक्ट किए, 25 लाख नाम कटे। जिसका असर यह हुआ कि ट्रिब्युनल पर भार ज्यादा है। 

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अब आगे क्या?

पहले चरण की सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख सोमवार है। दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल है। इन तारीखों तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने का भी आखिरी मौका है। ट्रिब्यूनल अभी पूरी तरह काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए लोगों की अपील पर त्वरित सुनवाई के मौके कम हैं।


जिनके नाम कटे, उनके लिए क्या है?

अब तक 10 सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी हो चुकी हैं। आयोग सोमवार शाम तक बाकी फैसले निपटाकर रात तक अंतिम सूची जारी कर सकता है। ट्रिब्यूनल पूरी तरह काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए लोगों में आशंका ज्यादा है।