तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एमके स्टालिन और राहुल गांधी जोर-शोर से चुनावी रैलियां कर रहे हैं। राहुल गांधी भी जनसभा कर रहे हैं, एमके स्टालिन भी। एमके स्टालिन, इंडिया गठबंधन के साथियों को लामबंद कर रहे हैं। आलम यह है कि तमिलनाडु में शून्य जनाधार वाली पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव, एमके स्टालिन के साथ रैलियों में हिस्सा ले रहे हैं, बता रहे हैं कि वह लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं। मंच पर मक्कल निधि मय्यम (MNM) के मुखिया कमल हसन तक दिख रहे हैं लेकिन राहुल गांधी।

गठबंधन में छोटे संकेत बड़ा इशारा करते हैं। राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी, राज्य में DMK के साथ गठबंधन में तो है लेकिन सत्ता में हिस्सेदारी कभी नहीं मिली। एमके स्टालिन मुख्यमंत्री तो बन जाते हैं लेकिन उनकी पार्टी, कांग्रेस को मंत्रिमंडल में शामिल करने से कतराती रही है, तब भी, जब उनके पास 20 से ज्यादा सीटें हों। एक तरफ, एनडीए, एक-एक सीटों वाले दलों को कैबिनेट में हिस्सा देती है, डीएमके को कांग्रेस से हमेशा ऐतराज रहा है। बीजेपी इसे चुनावी मुद्दा भी बना रही है।

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ऐसी चर्चा छिड़ी क्यों है?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व तमिलनाडु अध्यक्ष के अन्नामलाई ने शनिवार को धर्मपुरी में चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि डीएमके गठबंधन बहुत कमजोर है। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के पार्टनर एक-दूसरे से दूर जा रहे हैं और उनमें तालमेल नहीं है। अन्नामलाई ने कहा कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों तमिलनाडु में थे। पीएम मोदी ने अपने गठबंधन साथी एके पलानीस्वामी के साथ संयुक्त रूप से प्रचार किया। राहुल गांधी और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अलग-अलग अपने प्रचार कार्यक्रम चला रहे थे। उन्होंने एक मंच साझा नहीं किया। 

तेजस्वी और एमके स्टालिन साथ आ चुके हैं नजर। Photo Credit: MK Stalin/X)

अन्नामलाई:-
यह गठबंधन सिर्फ चिपकाने वाली गोंद से जुड़ा हुआ है, जो कभी भी टूट सकता है।

क्या सच में बिखरा है विपक्ष?

राहुल गांधी और डीएमके, दोनों इस गठबंधन के बड़े चेहरे हैं। अभी तक दोनों ने मंच साझा नहीं किया है। प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे भी एमके स्टालिन के साथ नहीं दिखे हैं। शशि थरूर, सचिन पायलट जैसे नेता भी सोशल मीडिया पर मौजूद तस्वीरों में एमके स्टालिन के साथ नजर नहीं आ रहे हैं। अगर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ही नहीं साथ है तो फिर गठबंधन के बारे में सवाल उठना लाजमी है।

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बीजेपी और उसके सहयोगी दल एक एजेंडे साथ मंचों पर दिख रहे हैं, डीएके और कांग्रेस में तालमेल पोस्टर में नजर आ रहा है। DMK के खेमे में सीटों के बंटवारे और स्थानीय मुद्दों पर असंतोष की खबरें आ रही हैं। गठबंधन के भीतर कुछ छोटे दलों की नाराजगी और राज्य सरकार के खिलाफ कुछ मुद्दों पर बढ़ती सत्ता विरोधी लहर की खबरें भी चर्चा में हैं। 

MNM प्रेसीडेंट कमल हासन और एमके स्टालिन। Photo Credit: MK Stalin/X

अभी तक, DMK गठबंधन बहुत सधे कदमों से साथ में चुनाव प्रचार कर रहा था, अब एनडीए, कांग्रेस और डीएमके के तालमेल लेकर सवाल उठा रहा रहा है। आक्रामक रणनीति और विपक्ष के एकजुट दिखने के प्रयास ने राज्य की राजनीति को एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

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NDA के दावे से अलग एक सच्चाई यह भी

DMK ने केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस के साथ एकजुटता दिखाई है। 3 विधेयकों के मामले में डीएमके ने पहले विरोध करना शुरू किया था। सदन में डीएमके सांसद काले कपड़ों में नजर आए थे। सांसदों पर पीएम मोदी ने तंज में कहा था कि यह काला टीका, बुरी नजर से बचाएगा। प्रियंका गांधी ने पीएम के इस बयान की आलोचना की थी। 

कांग्रेस और डीएमके ने एक सुर में इन विधेयकों का विरोध किया था। यह भी कहा जा रहा है कि राहुल गांधी और एमके स्टालिन, दोनों लोकप्रिय हैं। राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। कांग्रेस को सीट बंटवारे में 28 सीटें मिली हैं, राहुल गांधी इन क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग कांग्रेस से जुड़ सकें। 

स्टालिन अपने और सहयोगी दलों के लिए रैलियां कर रहे हैं। एक मंच पर आने की जगह डीएमके गठबंधन, ज्यादा से ज्यादा सीटें पर प्रचार करना चाहता है। राज्य में 23 अप्रैल में वोटिंग है, ऐसे में सारा जोर, गठबंधन चुनाव प्रचार पर दे रहा है, जिससे 4 मई के नतीजे बेहतर आएं।