केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम को ही पहले त्रावणकोर या त्रिवेंद्रम के नाम से भी जाना जाता था। आज भी लोग इसे आम बोलचाल की भाषा में त्रिवेंद्रम ही कहते हैं। मशहूर श्री पद्मनाभ मंदिर के लिए चर्चित यह जिला प्रदेश की राजनीति का मुख्य केंद्र है। केरल में पैर जमाने की कोशिश में जुटी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जब से यहां अपना मेयर बनाने में कामयाब हुई है उसके हौसले बुलंद हैं। पहले से ही इस जिले में पस्त चल रहे यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहले से मजबूत लेफ्ट के अलावा अब इस जिले में बीजेपी भी अच्छा लड़ रही है ऐसे में कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह इस जिले में अपनी सीटें बढ़ाए।

 

केरल के बिल्कुल दक्षिणी कोने पर बसा यह जिला अपने आप में बहुत अहम है क्योंकि यह प्रदेश की राजधानी है। अजीब बात यह है कि यह जिला राजधानी होने के बावजूद राज्य के बिल्कुल कोने में स्थित है। समुद्र तट पर बसा यह जिला दूसरी तरफ तमिलनाडु से घिरा हुआ है। इसके उत्तर में कोल्लम जिला स्थित है। विझिंजम अंतरराष्ट्रीय पोर्ट इसी जिले में है जिसके चलते यह जिला पूरी दुनिया के नक्शे पर अपनी अहम भूमिका रखता है।

 

ऐतिहासिक स्तर पर बेहद अहम भूमिका रखने वाला यह जिला धार्मिक रूप से बहुत खास है। तिरु अनंत पुरम का मतलब है कि पवित्र अनंत का शहर है। जिले का मुख्य आकर्षण यहां का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर है। राजा मार्तंड वर्मा के बनवाए इस मंदिर के नाम पर ही उनके परिवार ने अपना सबकुछ दान कर दिया था और भगवान पद्मनाभ के दास बन गए थे।

 

यह भी पढ़ें: 'लेफ्ट को कोई और चला रहा', राहुल गांधी ने BJP और LDF के मिले होने का लगाया आरोप

 

इस जिले के लोग आईटी सेक्टर, टूरिज्म, रबर, चाय और कॉफी की खेती और मसालों आदी के कारोबार पर अपनी कमाई के लिए आश्रित हैं। इसके अलावा, काजू और कोयर की इंडस्ट्री भी बहुत सारे लोगों को रोजगार देती है। अपने खूबसूरत पहाड़ों और हरियाली की वजह से इसे 'एवरग्रीन सिटी ऑफ इंडिया' कहा जाता है। इस जिले में झीलें भी हैं, समुद्र भी है और पहाड़ भी हैं।


2021 में क्या हुआ था?

 

साल 2021 में भी कांग्रेस के सत्ता से बाहर रह जाने का एक बड़ा कारण यह भी था कि वह राजधानी तिरुवनंतपुरम में ही नहीं जीत पाई। जिले की 14 में से सिर्फ एक ही सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। उसके सहयोगी दल भी कहीं कोई कमाल नहीं कर पाए थे और लेफ्ट ने एकतरफा जीत हासिल करके सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखा था। इस बार भी यह जिला कई हैवीवेट मुकाबलों का केंद्र बन रहा है क्योंकि बीजेपी ने अपने कई दिग्गज नेताओं को इसी जिले की विधानसभा सीटों से उतार दिया है।

विधानसभा सीटों का इतिहास

 

अतिंगल- यह विधानसभा सीटें अतिंगल लोकसभा क्षेत्र में ही आती है। 1987 से अभी तक कांग्रेस को इस सीट पर दो ही बार जीत मिली है। बाकी हर बार यहां से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ही चुनाव जीतती आ रही है। साल 2021 में यहां से चुनाव जीते ओ एस अंबिका को ही एक बार लेफ्ट की ओर से फिर से मौका मिला है। उनके सामने UDF की ओर से रेवॉल्युशनिस्ट सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के संतोष भद्रन उम्मीदवार हैं। 

 

चिरयिंकिजू- यह विधानसभा भी अतिंगल लोकसभा क्षेत्र में ही है। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर अभी तक हर बार सीपीआई को ही जीत मिली है। लगातार तीन बार चुनाव जीते वी सासी की जगह पर सीपीआई ने मनोज बी एडमना को टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस ने पूर्व सांसद रम्या हरिदास को यहां से उतारा है।

 

यह भी पढ़ें: त्रिशूर: BJP की एंट्री मजबूत होगी या LDF का दबदबा बरकरार रहेगा?

 

नेदुमनगाड- यह विधानसभा भी अतिंगल लोकसभा में ही है और लंबे समय से लेफ्ट का ही गढ़ है। यहां अभी तक सिर्फ तीन ही बार कांग्रेस पार्टी चुनाव जीत पाई है और पिछले दो चुनाव से यहां सीपीआई जीत रही है। लेफ्ट ने एक बार फिर से मौजूदा विधायक जी आर अनिल को ही टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस ने मीननकल कुमार को उतारा है। वहीं, बीजेपी ने युवराज गोकुल को टिकट दिया है।

 

वामनपुरम- यह विधानसभा सीट भी लंबे समय से लेफ्ट का गढ़ बनी हुई है। 1977 से अभी तक यहां से सीपीएम लगातार चुनाव जीत रही है। पिछले दो चुनाव से यहां से जीत रहे डी के मुरली को ही लेफ्ट ने एक बार फिर से मौका दिया है। उनके सामने कांग्रेस ने मोहम्मद सुधीरषा एस को टिकट दिया है।

 

अरुविक्करा- 2008 के परिसीमन के बाद बनी इस विधानसभा सीट पर शुरुआत चुनावों में तो कांग्रेस को जीत मिली थी लेकिन 2021 में सीपीएम ने इस सीट पर भी जीत हासिल कर ली। 2021 में जीते जी स्टीफन को ही एक बार फिर से लेफ्ट की ओर से मौका मिला है। उनके सामने कांग्रेस ने वी एस शिवकुमार को टिकट दिया है।

 

काझाकूटम- यह विधानसभा सीट तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र में आती है। इस सीट पर अलग-अलग पार्टियों ने चुनाव जीते हैं। 2006 से 2016 तक कांग्रेस के एम एस वहीद यहां से चुनाव जीते थे। उसके बाद दो बार सीपीएम के के सुरेंद्रन यहां से चुनाव जीते। लेफ्ट ने एक बार फिर भी उन्हें ही उतारा है। बीजेपी ने अपने दिग्गज नेता वी मुरलीधन को इसी विधानसभा सीट से उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट पर टी शरत चंद्र प्रसाद उम्मीदवार हैं।

 

वट्टियूरकवु- 2008 से पहले इसी सीट की त्रिवेंद्रन नॉर्थ के नाम से जाना जाता है। परिसीमन के बाद दो बार कांग्रेस के के मुरलीधरन यहां से चुनाव जीते। जब 2019 में वह सांसद बने और यहां उपचुनाव हुए तो उनकी जगह पर उतरे के मोहन कुमार को लेफ्ट ने हरा दिया। 2021 में कांग्रेस ने उम्मीदवार बदला लेकिन लेफ्ट के वी के प्रशांत ने एक बार फिर से जीत हासिल कर ली। इस बार कांग्रेस ने फिर से उन्हीं के मुरलीधरन को उतारा है। उनका मुकाबला दो बार के विधायक  वी के प्रशांत से है। बीजेपी ने यहां से आर श्रीलेखा को टिकट दिया है।

 

तिरुवनंतपुरम- 2008 के परिसीमन के पहले इस सीट को तिरुवनंतपुरम पश्चिम कहा जाता था। परिसीमन के बाद जब यहां पहली बार साल 2011 कमें चुनाव हुए तो कांग्रेस के वी एस शिवकुमार ने यहां से जीत हासिल की। 2016 में भी वही जीते लेकिन 2021 में जनाधिपत्य केरल कांग्रेस के एंटनी राजू ने उन्हें हरा दिया। इस बार UDF की ओर से यह सीट कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी (CMP) को दी गई है और उसके नेता सी पी जॉन यहां से उम्मीदवार हैं। लेफ्ट ने यहां से निर्दलीय उम्मीदवार सुधीर कर्मण का समर्थन किया है। 

 

यह भी पढ़ें: वायनाड: गढ़ बचाकर ही बनेगी UDF सरकार, लेफ्ट कैसे देगा चुनौती?

 

नेमोम- यह वही सीट है जिस पर दिग्गजों की लड़ाई होती रही है। इसी सीट से कभी पूर्व सीएम करुणाकरण विधायक बने थे। केरल में बीजेपी के पहले विधायक बने ओर राजगोपाल साल 2016 में इसी विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे। इस बार बीजेपी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को इसी सीट से उतारा है। वहीं, लेफ्ट ने 2021 में बीजेपी को हरा देने वाले वी सिवनकुट्टी को ही फिर से उतारा है। कांग्रेस ने इस बार के एस सबरीनाथन को टिकट देकर यहां की लड़ाई काफी रोमांचक कर दी है।

 

परासाला- इस सीट पर लेफ्ट और कांग्रेस की जबरदस्त टक्कर देखने को मिलती रही है। एक बार लेफ्ट तो एक बार कांग्रेस वाला फॉर्मूला यहां पर खूब चला लेकिन पिछले दो चुनाव से सीपीएम के सी के हरींद्रन ने यह सीट जीत ली। यही वजह है कि लेफ्ट ने तीसरी बार भी उन्हीं पर भरोसा जताया है। वहीं कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदलकर इस बार एन सानल को उतार दिया है।

 

कोवलम- समाजवादी आंदोलन से निकले दलों की सीट बन चुके कोवलम में कांग्रेस ने पिछले दो चुनाव से वापसी कर ली है। 2016 और 2021 में कांग्रेस के लिए यह सीट जीतने वाले एम विंसेंट को ही कांग्रेस ने फिर से मौका दिया है। लेफ्ट गठबंधन की ओर से यह सीट इंडियन सोशलिस्ट जनता दल को दी गई है और उसने भगत रुफुस को उतारा है। वहीं, बीजेपी ने टी एन सुरेश को टिकट दिया है।

 

नेयत्तिनकारा- पिछले पांच में एक बार सिर्फ उपचुनाव में कांग्रेस को यहां से जीत मिली है वह भी लेफ्ट के ही बागी के सहारे। बाकी 2006 से यहां लेफ्ट का ही दबदबा होता आ रहा है। 2016 से अब तक के विधायक के. अंसलन को ही लेफ्ट ने एक बार फिर से उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने कट्टाकडा के विधायक रहे एन शक्तन को यहां से उतारा है। बीजेपी ने एक बार फिर से एस राजशेखरन नायर पर ही भरोसा जताया है।

 

वरकाला- लंबे समय से लेफ्ट के कब्जे में रही इस सीट पर 2001 से 2016 तक कांग्रेस ने वापसी की थी लेकिन फिर यह सीट उसके कब्जे से निकल गई है। 2016 से ही यहां सीपीएम के वी जॉय चुनाव जीतते आ रहे हैं। लेफ्ट ने एक बार फिर से उन्हें ही टिकट दिया है।  उनके सामने कांग्रेस ने वरकाला काहर को उतारा है।

 

कट्टाकडा- 2008 के परिसीमन के बाद बने इस विधानसभा क्षेत्र में 2011 में कांग्रेस के एन शक्तन ने जीत हासिल की थी। हालांकि, 2016 में सीपीएम के आई बी सतीश ने उन्हें हरा दिया। 2021 में कांग्रेस ने एम वेणुगोपाल को टिकट दिया लेकिन वह भी हार गए। लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके आई बी सतीश को ही लेफ्ट ने फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने एक बार फिर से अपना उम्मीदवार बदलते हुए एम आर बाइजू को टिकट दिया है। वहीं, बीजेपी ने एक बार फिर से पी के कृष्णदास को टिकट दे दिया है।

 

जिले की स्थिति
क्षेत्रफल-2192 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर-92.66%
ब्लॉक-11
शहरी निकाय-5
गांव-124

जिला-तिरुवनंतपुरम
विधानसभा सीटें-14

LDF-13
UDF-1