ऑस्कर विनर म्यूजिक कंपोजर ए.आर रहमान अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वह इंडस्ट्री के बड़े कंपोजर्स में से एक हैं। अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में इंडस्ट्री में पावर का खेल काफी बदल गया।

 

इंडस्ट्री में अब उन लोगों के पास पावर है जो क्रिएटिव नहीं है। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड में उन्हें पिछले 8 साल से ज्यादा काम मिलना नहीं मिल रहा है। हालांकि मुझे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।  उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें शुरुआत में आउटसाइडर महसूस होता था।

 

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इंडस्ट्री में महसूस होता था आउटसाइडर

ए.आर रहमान ने कहा, 'मुझे लगता है कि ऐसा अलग धर्म और भाषा की वजह से हो सकता है। उन्होंने आगे बताया कि असल में रोजा, बॉम्बे और दिल के दौरान खुद को आउटसाइडर मानते थे लेकिन ताल एक ऐसा एल्बम था जिसने उन्हें घर-घर में पहुंचाया। ऐसे कहें कि वे गाने लोगों की रसोई में भी बजने लगा। आज भी नार्थ इंडिया के खून में ताल बसी हुई है क्योंकि उसमें थोड़ी पंजाबी है, थोड़ी हिंदी और थोड़ा पहाड़ी म्यूजिक है।'

 

रहमान ने आगे बताया कि उन्हें नहीं लगता था कि वे हिंदी म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा है क्योंकि वे हिंदी नहीं बोल पाते थे। एक तमिल आदमी के लिए हिंदी बोलना बहुत मुश्किल था क्योंकि हम अपनी भाषा से जुड़े हुए होते हैं। उन्होंने बताया कि मुझे सुभाष घई ने कहा था कि अगर मैं इंडस्ट्री में लंबे समय तक काम करना चाहता हूं तो हिंदी सीख लूं। मैंने एक कदम आगे बढ़कर उर्दू सीख ली जाए जबकि 60 के 70 के दशक के हिंदू म्यूजिक की जड़ उर्दू ही है।

 

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इसके बाद मैंने अरबी और पंजाबी भाषा भी सीखी। पंजाबी सिखने में में सुखविंदर सिंह का बहुत बड़ा हाथ था। मैंने पूछा था कि क्या कोई ऐसा सिंगर है जो पंजाबी में गा भी सके और लिख भी सके?