बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने पहली बार ओटीटी की दुनिया में कदम रखा है और अपनी पहली वेब सीरीज 'प्रीतम एंड पेड्रो' रिलीज कर दी है। छह एपिसोड की यह सीरीज पूरी तरह से राजकुमार हिरानी के पुराने सिनेमा स्टाइल जैसी ही लगती है। उनकी फिल्मों की तरह यहां भी गलत काम करने वाले अपराधियों के पीछे कोई न कोई मजबूरी या दुखभरी कहानी छिपी होती है। इस सीरीज में 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के आपके पसंदीदा 'सर्किट' यानी अरशद वारसी लीड रोल में हैं और उनके साथ राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की है। हालांकि यह सीरीज थोड़ी धीमी है और इसमें कुछ कमियां हैं फिर भी इसमें पुराने जमाने की पुलिसगिरी और आज के दौर की कंप्यूटर तकनीक का एक मेल दिखाने की कोशिश की गई है।
इस कहानी की शुरुआत गोवा से होती है जहां दो बिल्कुल अलग तरह के लोग आपस में मिलते हैं। पेड्रो एक पुराने जमाने के पुलिस अफसर हैं जिनका ट्रांसफर साइबर क्राइम सेल यानी कंप्यूटर से जुड़े अपराधों को रोकने वाले विभाग में हो जाता है। पेड्रो को कंप्यूटर से बहुत चिढ़ है और उनके लिए वहां काम करना किसी बुरे सपने जैसा है। दूसरी तरफ प्रीतम एक आज के जमाने का नौजवान लड़का है जो कंप्यूटर कोडिंग और हैकिंग का जानकार है।
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प्रीतम अपने बूढ़े दादाजी की देखभाल करता है और साथ में वैक्यूम क्लीनर बेचने का काम भी करता है। यह एक बुजुर्ग पुलिस वाले और एक युवा लड़के की जोड़ी है जो मिलकर इंटरनेट पर होने वाले अपराधों को रोकती है। एक तरफ पेड्रो हैं जो कंप्यूटर के कीबोर्ड को देखकर गुस्सा होते हैं कि इसके बटन एबीसीडी के हिसाब से क्यों नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रीतम इतना बड़ा कंप्यूटर का जानकार होने के बाद भी वैक्यूम क्लीनर क्यों बेचता है इसका जवाब पूरी सीरीज में कहीं नहीं मिलता।
एटीएम चोरी से लेकर मंत्री के बेटे का अपहरण
कहानी की शुरुआत में यह दोनों मिलकर एक आसान सा केस सुलझाते हैं जिसमें कुछ चोर पूरी की पूरी एटीएम मशीन ही चुरा ले जाते हैं। इसके बाद उनके पास एक बड़ा और मुश्किल केस आता है। एक घमंडी मंत्री के जवान बेटे का अचानक अपहरण हो जाता है। इस मंत्री का रोल सत्यदीप मिश्रा ने निभाया है। बेटे को बचाने के लिए फिरौती के पैसों का इंतजाम किया जाता है लेकिन कहानी में नया मोड़ तब आता है जब पता चलता है कि इस किडनैपिंग के पीछे एक नहीं बल्कि दो लोग शामिल हो सकते हैं। मंत्री की पत्नी श्रूती मराठे के अजीब बर्ताव पर भी पुलिस को शक होता है जिससे यह पूरा मामला और ज्यादा उलझ जाता है।
कहानी के कमजोर किरदार
इस वेब सीरीज का डायरेक्शन अविनाश अरुण ने किया है जो इससे पहले 'पाताल लोक' जैसी सीरीज बना चुके हैं। वह कहानी में अच्छा माहौल बनाने के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस बार सीरीज के कुछ किरदार बहुत कमजोर लिखे गए हैं। जैसे समुद्र के पास एक घर में छिपा हुआ एक संदिग्ध आदमी जो हर वक्त बीयर पीता रहता है और पास की दुकान से शराब खरीदता है। वह आदमी स्क्रीन पर कोई डर या सस्पेंस पैदा नहीं कर पाता। इसके बिल्कुल उलट असली खतरा एक हुडी पहने हुए अनजान शख्स से मिलता है जो कंप्यूटर स्क्रीन से भरे एक कमरे में बैठता है और यह रोल विक्रांत मैसी ने निभाया है।
मुन्ना भाई का छोटा सा कैमियो
सीरीज में कई और भी छोटे-छोटे किरदार हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। पेड्रो के सीनियर अफसर राजेश गुप्ता उन्हें बड़े साहब के गुस्से से बचाने की कोशिश करते हैं। प्रीतम के दादाजी विनोद नागपाल एक पुराने टेप रिकॉर्डर के खो जाने से बहुत दुखी हैं क्योंकि उसमें उनकी स्वर्गवासी पत्नी की आवाज रिकॉर्ड थी। पेड्रो की पत्नी के रूप में मोना सिंह के पास एक छोटा सा म्यूजिकल रोल है जो बहुत कम स्क्रीन टाइम मिलने की वजह से पूरी तरह बेकार चला गया। सबसे मजेदार बात यह है कि संजय दत्त यानी खुद मुन्ना भाई इस सीरीज में एक छोटी सी झलक के लिए आते हैं और उनके साथ एक बहुत मशहूर क्रिकेटर भी छोटे से रोल में दिखाई देते हैं।
अरशद की एक्टिंग और वीर की कमजोर शुरुआत
अरशद वारसी ने कंप्यूटर से परेशान रहने वाले पुलिस वाले के रोल में बहुत बढ़िया काम किया है और उनका मजाक का अंदाज हमेशा की तरह शानदार है। हालांकि उन्हें कंप्यूटर के मामले में जरूरत से ज्यादा अनाड़ी दिखाया गया है जो कभी-कभी थोड़ा अजीब लगता है। वीर हिरानी जो इस सीरीज से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत कर रहे हैं उन्होंने कंप्यूटर के जानकार लड़के का रोल किया है जिसके पीछे एक बड़ा राज छिपा है।
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उनका काम ठीक-ठाक है लेकिन उनके किरदार में इतना दम नहीं है कि दर्शक उन्हें याद रखें। एक सीन में जब पेड्रो बहुत सीरियस होकर कहते हैं कि उन्हें एक ऐसा पासवर्ड पता है जिसे दुनिया का कोई हैकर नहीं तोड़ सकता तो प्रीतम के पूछने पर वह कहते हैं '12345'। इससे पता चलता है कि सीरीज में हल्का-फुल्का मजाक बनाए रखने की कोशिश की गई है लेकिन कुल मिलाकर यह शो उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाता।


