बॉलीवुड के गलियारों में इन दिनों जहां एक ओर अपने दौर की सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ के दूसरे पार्ट यानी ‘बॉर्डर 2’ को लेकर चर्चा तेज है, वहीं फिल्म से जुड़ा एक बड़ा खुलासा भी सामने आया है। ‘बॉर्डर 2’ 23 जनवरी को रिलीज होने जा रही है और दर्शकों में इसे लेकर जबरदस्त उत्सुकता है। यही वजह है कि फिल्म की टिकटों की बिक्री पहले ही शुरू हो चुकी है। इसी बीच ‘बॉर्डर’ के मशहूर गाने ‘संदेशे आते हैं’ और ‘तो चलो’ जैसे यादगार गाने लिखने वाले गीतकार जावेद अख्तर ने बताया है कि उन्होंने ‘बॉर्डर 2’ के लिए गाने लिखने से इनकार कर दिया था। इसके पीछे की वजह उन्होंने खुद बताई है।
जब टी-सीरीज़ ने 1997 की पीरियड वॉर ड्रामा फिल्म ‘बॉर्डर’ के सुपरहिट गाने ‘संदेशे आते हैं’ का रीमेक ‘घर कब आओगे’ रिलीज किया, तो गाने के क्रेडिट में जावेद अख्तर और मनोज मुंतशिर का नाम शामिल था। इस नए वर्जन के बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे थे जबकि मूल गाने के बोल जावेद अख्तर के ही थे, जिन्हें गाने में इस्तेमाल किया गया। इसके बाद जावेद अख्तर ने खुलासा किया कि फिल्म निर्माताओं, टी-सीरीज और जेपी फिल्म्स ने उनसे ‘बॉर्डर 2’ के गानों, जिनमें ‘घर कब आओगे’ और ‘जाते हुए लम्हे’ शामिल हैं, के लिए नए बोल लिखने का अनुरोध किया था। हालांकि, जावेद अख्तर ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उनका मानना है कि पहले से लोकप्रिय गानों में नए बोल जोड़ना रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) का पतन है।
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जावेद अख्तर ने क्यों किया इनकार?
इस पर जावेद अख्तर ने कहा, 'अगर आपके पास एक पुराना गाना है, जो पहले ही बेहद लोकप्रिय रहा है, तो उसमें कुछ जोड़कर उसे दोबारा रिलीज़ करने का क्या मतलब है? इससे बेहतर है कि नए गाने बनाए जाएं, जो दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बना सकें।'
‘बॉर्डर’ फिल्म के गाने लिखते समय जावेद अख्तर ने पहले 11 पन्नों की एक लंबी कविता लिखी थी, जिसे बाद में गानों का रूप दिया गया। ‘संदेशे आते हैं’ के लिए उन्हें अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था। यह गाना निर्देशक जेपी दत्ता के भाई से प्रेरित माना जाता है, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शामिल थे। उस दौर में बॉर्डर पर तैनात भारतीय जवान देश के लिए लड़ रहे थे और वही जावेद अख्तर के लिए गीत लेखन की सबसे बड़ी प्रेरणा बने।
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'रीमेक से बेहतर नए गाने'
जावेद अख्तर ने 1964 में आई फिल्म ‘हकीकत’ का उदाहरण भी दिया, जिसमें धर्मेंद्र ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म के गाने जैसे ‘कर चले हम फिदा’ आज भी अमर माने जाते हैं। जावेद अख्तर का कहना है कि उन्होंने कभी उन गानों को किसी और फिल्म में दोहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि हर बार नए और रचनात्मक नए लिखे। उनका मानना है कि जब कोई फिल्म नई बनती है, तो उसके गाने भी नए होने चाहिए। पुराने गानों का बार-बार रीमेक बनाना इस बात का संकेत है कि लेखक अब नए और असरदार गाने नहीं लिख पा रहा।
कई लोगों का मानना है कि ‘बॉर्डर 2’ में पुराने गानों का रीमेक इसलिए किया गया है ताकि दर्शकों की पुरानी यादें ताज़ा हो सकें। इस तर्क का जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने कहा, 'पुराने गानों से पुरानी नहीं, बल्कि नई यादें ही बनती हैं।'
दिलचस्प बात यह है कि जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने 2006 में आई फिल्म ‘डॉन’ की कहानी लिखी थी। यह फिल्म 1978 में आई चंद्र बरोट निर्देशित क्लासिक ‘डॉन’ का रीमेक थी। फिल्म में ‘खइके पान बनारसवाला’, ‘ये मेरा दिल’ और ‘मैं हूं डॉन’ जैसे गाने शामिल थे। हालांकि, फरहान अख्तर ने इस फिल्म की कहानी सलीम खान के साथ मिलकर लिखी थी।
