ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी की मौत हो गई है। वह ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बाद दूसरे सबसे बड़े नेता थे, जिनके हाथों में देश की सैन्य कमान थी। इजरायल ने उन्हें एक हवाई हमले में मार गिराया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी उनकी मौत की पुष्टि की है। वह 67 साल के थे। इस हमले में उनके बेटे और कुछ सुरक्षा कर्मी भी मारे गए।
अमेरिका, इजरायल और ईरान की जंग के 2 सप्ताह बीत चुके हैं। यह जंग खत्म होती नजर नहीं आ रही है। ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को खो दिया है, अली लारिजानी मारे गए, उनसे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई दिग्गज अधिकारी खत्म हो चुके हैं। ईरान गुस्से में खाड़ी और पड़ोसी देशों में कहर बरपा रहा है।
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28 फरवरी से चल रही जंग, अब और खिंचेगी। अली लारिजानी की मौत, ईरान का गुस्सा बढ़ाएगा। वह ईरान की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति के मुख्य वास्तुकार थे। अली लारिजानी हाल के हफ्तों में ईरान के डी फैक्टो लीडर बन गए थे। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद सारी ताकत, उनके हाथों में आ गई थी।
अली लारिजानी के जाने से क्या होगा?
ईरान के सैन्य और सुरक्षा तंत्र के सबसे बड़े अधिकारी थे। वह अलग-अलग गुटों को साथ लेकर जंग में चल रहे थए। अब उनकी मौत से ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव आ सकता है। युद्ध खत्म करने वाली बातचीत मुश्किल हो सकती है।
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अली लारिजानी की मौत से ईरान टूटेगा क्यों?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए। हमले के अगले दिन यह खबर आई कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए। इसके बाद अली लारिजानी ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के तौर पर कमान संभाली। वह ईरान की सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के निर्णायक नेता बने। सोशल मीडिया पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देने वाले मुख्य चेहरा अली लारिजानी ही थे। अली लारिजानी ने हाल ही में तेहरान में एक रैली में हिस्सा लिया था, जहां वह इजरायल के निशाने पर थे।
कौन थे अली लारिजानी?
अली लारिजानी पिछले 5 दशक से ईरान की राजनीति में छाए हुए हैं। उन्होंने इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) में कमांडर के तौर पर इराक युद्ध में हिस्सा लिया था। वह राज्य टीवी के प्रमुख रह चुके थे। साल 2008 से लेकर 2020 तक,वह ईरानी संसद के स्पीकर रहे। वह न्यूक्लियर नेगोशिएटर और अली खामेनेई के सलाहकार रहे।
अली लारिजानी, अलग-अलग गुटों के समन्वयक भी थे। साल 2015 के न्यूक्लियर डील को तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका थी। वह रूस, लेबनान, ओमान जैसे देशों में ईरान की आवाज थे, जिन्हें इजरायल ने खत्म कर दिया।
अली लारिजानी का परिवार ईरान की सत्ता का केंद्र रहा है। उनकी पत्नी एक प्रमुख आयतुल्लाह की बेटी हैं। उनके भाई सादिक लारिजानी पूर्व चीफ जस्टिस और आयतुल्लाह हैं। वह शरीफ यूनिवर्सिटी से मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में पढ़े। तेहरान यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी में डॉक्टरेट किया।
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मौत का असर क्या होगा?
अली लारिजानी की मौत से युद्ध पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा। अब ईरान के लिए सेना, सरकार और समर्थन संभालना मुश्किल हो जाएगा। वह दुनियाभर में चर्चित थे, लोग उन्हें पसंद करते थे। दुनिया के साथ राजनायिक स्तर पर संबंध उन्हीं के थे। अब ईरान में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा जो अलग-अलग गुटों को एकजुट कर युद्ध खत्म करने की बातचीत कर सके।
मसूद पेजेशकियान कमजोर पड़े?
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जैसे नेताओं के पास सीमित अधिकार रहे हैं। उनकी भूमिका और कमजोर पड़ सकती है। मोजतबा खामनेई कहां हैं, कुछ पता नहीं है। उन्हें गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है।
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क्यों खतरे की घंटी है अली का जाना?
ईरान के पास अब और आक्रामक होने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचा है। अब ईरान के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का सलाहकार बनाया गया है। मोहसिन की उम्र 71 साल है। अब जंग रोकने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करने वाला कोई नेता नहीं बचा है।
