अमेरिका में लाखों लोग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं। लोगों ने प्रदर्शन करते हुए डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ चल रहे तनाव के खिलाफ किया है। यह प्रदर्शन 28 मार्च को हुआ, जो अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक है।

 

अमेरिकी अखबार 'द गार्डियन' ने बताया है कि यह प्रदर्शन अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,000 से ज्यादा जगहों पर हो रहे हैं। नो किंग्स प्रदर्शन में वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क सिटी और शिकागो जैसे बड़े शहरों में भारी भीड़ उमड़ी।

 

इससे पहले अमेरिका में किंग्स प्रोटेस्ट अक्तूबर में हुआ था, जिसमें 70 लाख लोग शामिल हुए थे। इस कड़ी का यह तीसरा प्रदर्शन है।

 

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मिनेसोटा में 100,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी

आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शन के अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन हो सकता है। उन्होंने बताया है कि इसमें लाखों लोग शामिल हुए हैं। मिनेसोटा के ट्विन सिटीज, मिनियापोलिस और सेंट पॉल में नो किंग्स प्रोटेस्ट में हजारों लोग स्टेट कैपिटल के आसपास की सड़कों पर जमा हुए। लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ विरोध जाहिर किया। रॉयटर्स ने बताया कि अकेले मिनेसोटा में 100,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी शामिल हुए।

 

 

 

 

न्यूयॉर्क सिटी में एक साथ हजारों लोगों ने मैनहैटन में मार्च निकाला। भीड़ मिडटाउन मैनहैटन में जमा हुई। यहां आयोजकों में से एक एक्टर रॉबर्ट डी नीरो ने स्पीच दी। गार्जियन के मुताबिक, वाशिंगटन में लगभग एक दर्जन फिलिस्तीनी मांओं का एक ग्रुप भी शामिल हुआ। इसमें महिलाओं ने 10 फुट ऊंचा फिलिस्तीनी झंडा लहराया। मैरीलैंड में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के पास हुए प्रोटेस्ट में लगभग 1,000 लोग शामिल हुए।

 

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सबसे ज्यादा भीड़ कहां?

इस प्रदर्शन में सबसे अधिक भीड़ खास शहरी और राजनीतिक सेंटर्स में जमा हुई। वॉशिंगटन में नो किंग्स प्रोटेस्ट के लिए प्रदर्शनकारी नेशनल मॉल समेत बड़ी जगहों के पास इकट्ठा हुए। न्यूयॉर्क सिटी और लॉस एंजिल्स में भी काफी भीड़ देखी गई। हजारों प्रदर्शनकारी शिकागो के डाउनटाउन में ग्रांट पार्क में मार्च करते हुए 'ट्रंप को अब जाना चाहिए, फासिस्टों को अब जाना चाहिए' और 'आइस आउट' के नारे लगा रहे थे। शिकागो प्रदर्शन में कुछ दूसरे वक्ताओं ने श्रम कानून और ट्रांसजेंडर और इमिग्रेंट समुदाय की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई।

नो किंग्स नाम क्यों रखा है?

यह प्रदर्शन ट्रंप के दूसरे टर्म में शुरू हुए हैं, जो उनके खिलाफ लगातार हो रहे विरोध आंदोलनों का हिस्सा हैं। खास बात यह है कि इतने बड़े प्रदर्शन में किसी भी तरह की हिंसा नहीं हुई है। आयोजकों का कहना है कि अमेरिका में कोई राजा नहीं, सत्ता लोगों की है। इसलिए इस प्रदर्शन का नाम नो किंग्स रखा गया है।