अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक हाई लेवल मीटिंग होगी। दोनों पक्ष युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत करेंगे। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबफ के नेतृत्व में डेलीगेशन में शामिल हैं। इस वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी डेलीगेशन ने एक बार फिर मीनाब हमले की यादें ताजा कर दीं। ईरान ने संकेत दे दिया है कि वह मीनाब हमले में मारी गई बच्चियों को नहीं भूला है।
ईरान ने अपने डेलीगेशन की फ्लाइट की एक तस्वीर शेयर की है। इस तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी और खिंचा है। इस तस्वीर में अमेरिका और इजरायल के हमलों में मीनाब में मारी गई मासूम लड़कियों के लिए सीटें छोड़ी गई हैं और ईरानी नेता उन्हें देखते हुए नजर आ रहे हैं।
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खून से सने बैग और जूते
ईरानी संसद के स्पीकर इस्लामाबाद पहुंचे तो उसी फ्लाइट में अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए बच्चों के लिए भी जगह रखी गई। फ्लाइट की सीटों पर हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें लगाई गई हैं। इन तस्वीरों के साथ खून से सने स्कूल बैग और जूते भी कुर्सियों पर रखे गए हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि बैग और जूतों पर खून है इसके साथ ही वह बुरी तरह से जले हुए भी हैं। कुर्सी पर बच्चियों की तस्वीरों के साथ सफेद फूल भी रखे गए हैं।
हमले का दर्द लिए वार्ता के लिए पहुंचा ईरान
ईरान के नेता इन तस्वीरों को देख रहे हैं, जो काफी भावुक नजर आ रहे हैं। इससे साफ है कि ईरान वार्ता से पहले यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि भले ही वह शांति वार्ता के लिए तैयार हो गया हो लेकिन अभी तक वह हमले में मारे गए बच्चों को नहीं भूल पाया है। उनकी मौत का दर्द अभी भी जिंदा है। ईरानी नेता टकटकी लगाए तस्वीरों को देख रहे हैं।
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165 से ज्यादा बच्चे मारे गए थे
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिलकर हमला कर दिया था। इस हमले में ईरान के मीनाब शहर में एक गर्ल्स स्कूल को निशाना बनाया गया। हमला इतना खतरनाक था कि स्कूल में 165 से ज्यादा बच्चियों की मौत हो गई थी। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद पूरी दुनिया ने इसकी निंदा की थी। वीडियो में चीख-पुकार और तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। बच्चियों की लाशें, स्कूल बैग और जूत खून से सने हमले की जगह पड़े थे। ईरान में इस हमले को लेकर अमेरिका के खिलाफ भावना और ज्यादा बढ़ गई।
इस हमले के लिए ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, ट्रंप ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। अमेरिका ने कहा कि सेना ने स्कूल को नहीं बल्कि ईरानी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया था, जो स्कूल के पास ही हैं। ईरान लगातार इस हमले का बदला लेने के बात करता रहा है।
