अमेरिका ने अपना मून मिशन फिलहाल के लिए टाल दिया है। दशकों बाद नासा मानवयुक्त फ्लाईबाई मिशन को चंद्रमा पर भेजने जा रहा है, लेकिन किन्हीं वजहों से अब इसे टाल दिया गया है। नासा के चीफ जेरेड इसाकमैन ने मानवयुक्त फ्लाईबाय मिशन आर्टेमिस-2 के मार्च में होने वाल लॉन्चिंग को टाल दिया है। उन्होंने इसके पीछे की वजह विमान मे टेक्निकल दिक्कतों को बताया है। 

 

नासा के टेक्निकल टीम ने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में हीलियम फ्लो में एक टिक्कत की पहचान की है, जिसके चलते मार्च का लॉन्च विंडो अब विचार से बाहर हो गया है। इस बात की जानकारी खुद नासा चीफ ने दी है। 

रुकावट की वजह से लोग निराश

जेरेड इसाकमैन ने कहा, 'मैं समझता हूं कि लोग इस रुकावट की वजह से निराश हैं। यह निराशा नासा की टीम को सबसे ज्यादा महसूस हो रही है, जो इस महान कोशिश की तैयारी के लिए बिना थके दिन-रात मेहनत की है।' 

 

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उन्होंने 1960 के दशक का जिक्र करते हुए कहा कि जब नासा ने वह कर दिखाया जिसे असंभव माना जाता था, तब भी कई बार असफलताएं और देरी सामने आई थीं।

 

नासा के मुताबिक, विशाल SLS रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को जांच और जरूरी मरम्मत के लिए केनेडी स्पेस सेंटर के व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में वापस ले जाया जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?

आर्टेमिस 2 मिशन लगभग 10 दिनों तक चलेगा। इसमें तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर की यात्रा पर भेजेगा। यह मिशन इंसानों को दोबारा चंद्रमा की सतह पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। चंद्रमा पर वापसी का लक्ष्य पहली बार पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान घोषित किया गया था।

 

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नासा ने पहले कहा था कि 6 मार्च सबसे जल्दी मिशन के लॉन्च की तारीख होगी। हालांकि, कार्यक्रम में हो रही लगातार देरी रही है। बिना चालक दल का परीक्षण मिशन आर्टेमिस-1 भी कई बार टलने के बाद नवंबर 2022 में लॉन्च हो पाया था।

 

दरअसल, अमेरिकी एजेंसी नासा का मकसद चीन के बढ़ते प्रतिस्पर्धा के बीच चीन से एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर वापस भेजना है। चीन 2030 तक एक क्रू लूनर मिशन को भेजने वाला है। चीन का बिना क्रू वाला चांग'ई 7 मिशन 2026 में चांद के साउथ पोल पर जाने के लिए तैयार है।