पांच साल पहले 1 फरवरी 2021 को म्यांमार में तख्तापलट करने वाले 69 वर्षीय जनरल मिन आंग ह्वाइंग को शुक्रवार को देश का अगला राष्ट्रपति चुन लिया गया है। राष्ट्रपति ने बनने से पहले मिन आंग ह्लाइंग ने कमांडर इन-चीफ के पद से इस्तीफा भी दे दिया। उनकी जगह जनरल ये विन ऊ को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। मिन आंग ह्वाइंग के वफादार न्यो सॉ और सैना समर्थित यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी की करेन प्रदेश अध्यक्ष नान नी नी आये उपराष्ट्रपति होंगे। 

 

म्यांमार मीडिया के मुताबिक वहां की संसद ने सोमवार को मिन आंग ह्लाइंग को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर नामित किया। उनके अलावा दो अन्य उपराष्ट्रपति उम्मीदवार थे। म्यांमार संविधान के मुताबिक तीन उपराष्ट्रपति में से किसी एक को देश का अगला राष्ट्रपति चुना जाता है। शुक्रवार को कुल 584 सांसदों ने वोट डाले। इनमें से 429 अकेले मिन आंग ह्वाइंग को मिले। 

80 फीसद से ज्यादा सीटों पर यूएसडीपी जीती

पिछले साल दिसंबर से जनवरी 2026 तक म्यांमार में चुनाव हुए। 80 फीसद से ज्यादा सीटों पर यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) को जीत मिली। यूएसडीपी म्यांमार सेना की अपनी पार्टी है। वहीं एक चौथाई गैर-निर्वाचित सीटों पर सशस्त्र बलों के सेवारत सदस्यों का कब्जा है।  पहले से ही माना जा रहा था कि चुनाव में सेना की पार्टी को जीत मिलेगी। इसकी वजह यह है कि आंग सान सू की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) पार्टी को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। 

 

यह भी पढ़ें: ट्रंप ने US अटॉर्नी जनरल बॉन्डी को हटा दिया, आर्मी चीफ का भी इस्तीफा

किस वजह से हुआ था तख्तापलट?

नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की पार्टी ने 2015 और 2020 के चुनाव में जीत हासिल की। बाद में जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने आंग सान सू पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया और उनकी सरकार के खिलाफ 1 फरवरी 2021 को तख्तापलट कर दिया। 2021 से 2025 तक मिन आंग ह्लाइंग ने म्यांमार में सैन्य शासन का नेतृत्व किया। अब राष्ट्रपति बनकर देश पर अपना पूरा नियंत्रण पाने की कोशिश करेंगे। वहीं विपक्षी आंग सान सू की, उनके मंत्री और हजारों समर्थक सलाखों के पीछे हैं।

सेना और सरकार पर मिन आंग का नियंत्रण

म्यांमार की मौजूदा संसद जनरल मिन आंग ह्वाइंग के वफादारों से भरी है। देश के नए कमांडर इन चीफ जनरल ये विन ऊ को भी उनका वफादार माना जाता है। दोनों के पारिवारिक रिश्ते भी हैं। मिन आंग ने एक सलाहकार परिषद भी बनाई है। इसमें भी सैन्य अधिकारियों का दबदबा है। अपने वफादारों के माध्यम से जनरल मिन आंग ह्वाइंग न केवल नागरिक शासन बल्कि सेना पर भी पूरा नियंत्रण चाहते हैं।

 

यह भी पढ़ें: न जंग में जीते, न मिसाइल कर सके खत्म, ईरान ने ट्रंप के इरादों पर पानी फेर दिया

नए सेना प्रमुख के सामने कौन सी चुनौती?

तख्तापलट के बाद से ही म्यांमार में गृहयुद्ध जारी है। देश के 90 कस्बों पर अब भी सेना का कब्जा नहीं है। वहीं थाईलैंड सीमा के करीब से राष्ट्रीय एकता सरकार संचालित हो रही है। इसमें वह लोग शामिल हैं, जिन्हें तख्तापलट में सेना ने उखाड़ फेंका था। सेना के खिलाफ सशस्त्र संगठनों ने एक नया संयुक्त मोर्चा बनाया है। नए कमांडर-इन-चीफ, जनरल ये विन ऊ के सामने सबसे बड़ी चुनौती विरोधी के हाथों से खोए हुए क्षेत्रों को हासिल करने की है। ये विन ऊ की पहचान एक क्रूर जनरल के तौर पर होती है। माना जा रहा है कि वह पूर्ववर्ती मिन आंग ह्लाइंग के नक्शेकदम पर चलेंगे।