कनाडा ने दशकों तक खालिस्तान आंदोलन को हवा दी है। कनाडा की लिबरल पार्टी खालिस्तान आंदोलन को लेकर हमेशा से उदार रही है। कनाडा में बैठक कई खालिस्तानी आतंकियों को संरक्षण मिला। भारत की खुफिया एजेंसिया ऐसे आरोप लगाती रही हैं। कनाडा से जस्टिन ट्रुडो की सरकार के विदा होते ही, नई सरकार ने अपना रुख बदल लिया है। अब कनाडा की खुफिया एजेंसियों ने ही 'खालिस्तान आंदोलन' को कनाडा की धरती के लिए खतरा बताया है।
साल 2025 में कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने अपने खुफिया रिपोर्ट में दावा किया कि कनाडा बेस्ड खालिस्तानी एक्स्ट्रीमिस्ट (CBKEs) लगातार देश और देश के बाहर विदेश में कनाडा के हितों के लिए खतरा बने हुए हैं।
यह भी पढ़ें: जिन खालिस्तानियों को पाल रहा था कनाडा, उन्हें देश के लिए खतरा क्यों मानने लगा?
कनाडा की खुफिया रिपोर्ट क्या कह रही है?
कनाडा के खुफिया विभाग ने यह दावा किया है कि खालिस्तानी संगठनों से जुड़े कुछ लोग, कनाडा के आम नागरिकों से फंड जुटाते हैं, उनका दुरुपयोग करते हैं और हिंसक गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। उन्हें बिना बताए ही उनके दान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खालिस्तानी अतिवाद कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
क्यों खालिस्तान से डरा कनाडा?
खालिस्तानी समूह भारत के अंदर एक अलग देश बनाने की मांग करते हैं। भारत सरकार ने इन्हें आतंकवादी संगठन घोषित किया है। खालिस्तान, अलगाववादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। यह रिपोर्ट एयर इंडिया फ्लाइट 182 के बम विस्फोट की 40वीं बरसी पर आई है।
यह भी पढ़ें: गाजियाबाद का छात्र, कनाडा में हत्या; विदेश में हत्यारे को उम्रकैद की सजा
किस हमले के बाद आई है यह रिपोर्ट?
साल 1985 में हुआ यह हमला कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला था, जिसमें 329 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे। हमले के बाद भारत और कानाडा के संबंध बिगड़ गए थे।
खालिस्तान पर कनाडा का रुख क्या है?
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि खालिस्तान के लिए शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से समर्थन करना अतिवाद नहीं माना जाता। कई कनाडाई लोग कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे पर अभियान चलाते हैं। केवल वे छोटे-से समूह जो कनाडा को आधार बनाकर भारत में हिंसा को बढ़ावा देते हैं, फंड इकट्ठा करते हैं या हिंसक योजनाएं बनाते हैं, उन्हें ही खालिस्तानी अतिवादी माना जाता है।
यह भी पढ़ें: मंदिरों के बाहर हंगामा करेंगे खालिस्तानी, हिंदुओं को डराएंगे? SFJ का प्लान समझिए
अब कैसे हैं भारत और कनाडा के संबंध?
जस्टिन ट्रुडो के दौर में भारत और कनाडा के रिश्ते, सबसे खराब में दौर में रहे। साल 2023 में रिश्ते और तल्ख हो गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में दोनों देश रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
