पाकिस्तान इन दिनों कई संकटों से घिरता जा रहा है। एक तरफ बलूचिस्तान में अलगाववादियों ने जंग छेड़ रखी है। दूसरी तरफ अगानिस्तान के साथ संघर्ष जारी है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में टीटीपी ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया है। उधर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद कराची से पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर तक हिंसक विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है।
इस बीच पाकिस्तान के सामने तेल और गैस का संकट खड़ा होने वाला है। होर्मुज जलडमरूमध्य मध्य होने से पाकिस्तान की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। अब उसने सऊदी अरब से लाल सागर के रास्ते यानूब बंदरागह से तेल की सप्लाई करने का अनुरोध किया है।
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पेट्रोल पंप मालिकों ने शहबाज शरीफ को लिखा खत
इस बीच पाकिस्तान के पेट्रोल पंप मालिको ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि ईंधन की सप्लाई में देरी हो रही है। इससे आने वाले समय में तेल संकट छा सकता है। पत्र में लिखा गया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों ने मध्य पूर्व संकट के बीच कोटा सिस्टम लागू किया है। इस कारण पेट्रोल पंपों को पर्याप्त तेल नहीं मिल रहा है। अगर मिल रहा है तो कम मात्रा में मिल रहा है। कई पेट्रोल पंप ड्राई स्थिति में हैं।
जनता में घबराहट पैदा हो सकती है, सरकार हस्तक्षेप करे
पेट्रोल पंप मालिकों ने कहा कि कई बार ऑर्डर देने के बाद भी उसे रद्द कर दिया जाता है। तेल टैंकर घंटों डिपो में फंसे रहते हैं। इस वजह से आम जनता में घबराहट पैदा हो सकती है। पेट्रोल पंप मालिकों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। वहीं पाकिस्तान सरकार का दावा है कि उसके पास 28 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण आपूर्ति पर असर पड़ा है। सरकार वैकल्पिक मार्गों से ईंधन आयात की योजना बना रही है।
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सऊदी अरब से पाकिस्तान कर रहा अनुरोध
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने पाकिस्तान में सऊदी अरब के राजदूत नवाफ बिन सईद अल-मल्की से मुलाकात की और यानूब बंदरगाह के माध्यम से तेल की आपूर्ति का अनुरोध किया। सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान की आपातकालीन ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का आश्वासन दिया।
बता दें कि पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से आयात करता है। अब अचानक लाल सागर के रास्ते तेल की आपूर्ति करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि यमन में बैठे हूती विद्रोहियों ने अगर लाल सागर पर टैंकरों को निशाना बनाना शूरू कर दिया तो वहां से तेल की आपूर्ति करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
