ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो की जेल की सजा शुरू हो गई है। ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी 27 साल की सजा मंगलवार से शुरू कर दी है। इसका मतलब हुआ कि अब अगले 27 साल तक बोल्सोनारो को जेल में ही काटने पड़ेंगे। उन्हें 2022 में चुनाव हारने के बावजूद सत्ता में बने रहने के लिए तख्तापलट करने की साजिश रचने के इल्जाम में दोषी ठहराया गया था। उनके वकीलों ने खराब सेहत का हवाला देते हुए हाउस अरेस्ट की मांग की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
जेयर बोल्सोनारो 2019 से 2022 तक राष्ट्रपति थे। उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 'खास दोस्त' माना जाता है। ट्रंप दावा करते रहे हैं कि बोल्सोनारो को 'झूठे केस' में फंसाया गया है। ट्रंप ने इस साल जुलाई में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें कहा था कि अगर बोल्सोनारो पर केस खत्म नहीं किया जाता तो वह 50% टैरिफ लगा देंगे।
हालांकि, इसके बाद कई मौकों पर ट्रंप और लूला डा सिल्वा की मुलाकात हुई थी, जिससे अमेरिका और ब्राजील के रिश्ते सुधर गए थे। इसके बाद इस बात की उम्मीद कम थी कि बोल्सोनारो को राहत मिल सकती है लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि उनकी सभी अपीलें खत्म हो गई हैं और अब उनकी 27 साल की सजा शुरू हो गई है।
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बोल्सोनारो पर क्या-क्या इल्जाम लगे हैं?
बोल्सोनारो 2019 में राष्ट्रपति बने थे। बोल्सोनारो 2022 का राष्ट्रपति चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उन्होंने सत्ता कायम रखने के लिए तख्तापलट की कोशिश की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बोल्सोनारो को ब्राजील के लोकतंत्र को उखाड़ फेंकने की कोशिश करने के इल्जाम में दोषी ठहराया है। उन्हें ब्राजील की लोकतांत्रिक सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने की कोशिश करने का दोषी माना है।
बोल्सोनारो पर यह भी आरोप लगा था कि चुनाव के बाद उन्होंने तख्तापलट की साजिश रची थी। इस साजिश में उन्होंने राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा, उपराष्ट्रपति जेराल्डो अल्कमिन और सुप्रीम कोर्ट के जज अलेक्सांद्रे दे मोराएस की हत्या करने की प्लानिंग भी थी। इतना ही नहीं, 2023 की शुरुआत में उन्होंने एक विद्रोह भड़काने की भी कोशिश की थी।
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कहां सजा काटेंगे बोल्सोनारो?
बोल्सोनारो पर तख्तापलट की साजिश रचने का जो आरोप लग रहा था, उसकी सुनावई सुप्रीम कोर्ट में ही चल रही थी। मामले की सुनवाई कर रहे जज मोराइस ने बोल्सोनारो के भागने की आशंका जताई थी। इसके बाद अगस्त में उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया था।
शनिवार को बोल्सोनारो को गिरफ्तार कर लिया गया था, जहां से उन्हें फेडरल पुलिस हेडक्वार्टर ले जाया गया था। बोल्सोनारो अभी यहीं पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जज मोराएस ने फैसला दिया है कि बोल्सोनारो पुलिस हेडक्वार्टर में ही रहेंगे। हालांकि, उन्हें बाद में स्थानीय जेल और राजधानी ब्रासीलिया की मिलिट्री जेल में भी भेजा जा सकता है।
इस पूरे मामले में कई और हाई प्रोफाइल लोगों को सजा हो चुकी है। इस मामले में आर्मी जनरल ऑगस्टो हेलेनो और पाउलो सर्जियो नोगेइरा ब्रासीलिया की जेल में बंद हैं। पूर्व न्याय मंत्री एंडरसन टोरेस भी ब्रासीलिया की पापुडा जेल में हैं। एडमिरल गार्नियर नेवी की जेल में सजा काटेंगे। पूर्व रक्षा मंत्री जनरल वाल्टर ब्रागा नेटो रियो डी जेनेरियो की जेल में रहेंगे।
वहीं, इस मामले में बोल्सोनारो की सरकार में ब्राजील की खुफिया एजेंसी के प्रमुख रह चुके अलेक्सांद्रे रामागेम अभी अमेरिका में फरार हैं।
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ट्रंप ने बहुत कोशिश की लेकिन बचा नहीं सके!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोल्सोनारो को बचाने के लिए कई तरकीबें आजमाई थीं लेकिन कुछ काम नहीं आई। जुलाई में उन्होंने चिट्ठी लिखकर बोल्सोनारो के खिलाफ चल रहे मुकदमे को रद्द करने को कहा था। उन्होंने इस मुकदमे को 'विच हंट' करार दिया था। ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।
इसके बाद अमेरिका और ब्राजील के रिश्ते खराब हो गए थे। हालांकि, अक्टूबर में मलेशिया में ASEAN समिट के दौरान ट्रंप और लूला डा सिल्वा की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद रिश्ते पटरी पर लौट आए थे।
टैरिफ के अलावा ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के जज मोराएस और कुछ ब्राजीलियन अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, कुछ काम नहीं आया और उनके खिलाफ मुकदमा चलता रहा।
बोल्सोनारो ब्राजील की राजनीति में अब भी अहम शख्सियत हैं। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने पर 2030 तक रोक है। सर्वे बताते हैं कि अगर बोल्सोनारो को लड़ने की इजाजत मिलती तो अगले साल होने वाले चुनाव में वह मजबूत दावेदार होते।
बोल्सोनारो जेल जाने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति नहीं हैं। उनसे पहले मिशेल टेमेर और बाद में लूला डा सिल्वा भी जेल जा चुके हैं। 1990 से 1992 तक राष्ट्रपति रह चुके फर्नांडो कोलोर डे मेलो अभी भ्रष्टाचार के मामले में नजरबंद हैं। हालांकि, तख्तापलट की कोशिश के लिए सजा पाने वाले बोल्सोनारो पहले पूर्व राष्ट्रपति हैं।
