अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी चेतावनी दी है। रविवार को उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि जब तक कांग्रेस 'सेव अमेरिका एक्ट' को मंजूरी नहीं देती है तब तक वह किसी अन्य कानून पर साइन नहीं करेंगे। अमेरिका में ट्रंप के इस नए विधेयक को लेकर तमाम आशंकाएं हैं। विपक्षी डेमोक्रेट्स को लगता है कि यह विधेयक लाखों मतदाताओं की आवाज दो दबाएगा और उन्हें मतदान से वंचित रख सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, फॉक्स एंड फ्रेंड्स पर मेहनती स्कॉट प्रेसलर ने फिलिबस्टर या टॉकिंग फिलिबस्टर का इस्तेमाल करके द सेव अमेरिका एक्ट पास करने के बारे में बात करके बहुत बढ़िया किया है। यह सभी वोटर्स के साथ 88 फीसद का मुद्दा है। इसे तुरंत पास किया जाना चाहिए। यह बाकी सब चीजों से ऊपर है। लाइन में सबसे आगे रहना होगा।
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नागरिकता का सबूत दिखाना होगा: ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, 'मैं राष्ट्रपति के तौर पर जब तक यह पास नहीं होगा, दूसरे विधेयक पर साइन नहीं करूंगा। इसके हल्के संस्करण पर नहीं, बल्कि अंतिम लक्ष्य का प्रयास करें। वोटर आईडी और नागरिकता का सबूत दिखाना होगा। सेना (बीमारी, विकलांगता, यात्रा) को छोड़कर कोई मेल-इन बैलेट नहीं माना जाएगा। महिलाओं के खेल में कोई पुरुष को प्रवेश नहीं मिलेगा। बच्चों के लिए कोई ट्रांसजेंडर म्यूटिलाइजेशन नहीं होगा। असफल मत बनो।'
क्या है 'सेव अमेरिका एक्ट'?
ट्रंप प्रशासन का सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट (SAVE) मतदाता पंजीकरण को कड़ा बनाने वाला विधेयक है। विधेयक में मतदान पंजीकरण के समय अपनी नागरिकता दस्तावेज को दिखाना होगा। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों को हासिल करने में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों को कठिनाई होगी। विधेयक पास होने के बाद कोई भी शख्स अपने ड्राइविंग लाइसेंस से मतदान पंजीकरण नहीं करा सकेगा, क्योंकि अमेरिका में लाइसेंस को नागरिकता का का प्रमाण पत्र नहीं माना जाता है।
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अब अमेरिकी पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत होगी। वहीं पंजीकृत मतदाताओं को भी नाम और पता आदि बदलाने में भी दस्तावेज देने होंगे। अभी अमेरिका के हर राज्य का अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र होता है। मगर नए कानून के बनने के बाद एक राष्ट्रीय मतदाता पहचान पत्र बनाया जाएगा। विधेयक में मेल पंजीकरण और ऑनलाइन पंजीकरण को प्रतिबंधित किया गया है।
वहीं राज्यों को बार बार मतदाता सूची से नाम हटाने होगा। विधेयक में कहा गया कि अगर कोई कर्मचारी गलत कागजात के आधार पर किसी शख्स के पंजीकरण में सहायता करता है तो उसे पांच साल की जेल हो सकती है। राज्यों को मतदाताओं से जुड़ा संवेदनशील डाटा गृह सुरक्षा विभाग के साथ साझा करना होगा।
