ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में महात्मा गांधी की 426 किलो वजनी प्रतिमा को चुराने का मामला सामने आया है। अपराधियों ने ग्राइंडर से काटने के बाद चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने घटना की निंदा की और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। जानकारी के मुताबिक महात्मा गांधी की यह प्रतिमा मेलबर्न के रोविल क्षेत्र में लगाई थी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया। अपने बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम मेलबर्न के रोविल में ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर में लगी महात्मा गांधी की मूर्ति को अज्ञात लोगों द्वारा तोड़े जाने और हटाए जाने की कड़ी निंदा करते हैं। हमने इस मामले को ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के सामने सख्ती से उठाया है और उनसे लापता मूर्ति को बरामद करने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।'
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कैसे चुराई गई 426 किलोग्राम की प्रतिमा?
महात्मा गांधी की यह प्रतिमा बेहद विशाल और प्रेरणादायक थी। कुछ लोगों ने चोरी के मकसद से पहले प्रतिमा को काटा और बड़ी बारीकी से उसे चुरा ले गए। प्रतिमा के गायब होने से लाखों लोगों को दुख पहुंचा है, क्योंकि यह केवल एक प्रतिमा नहीं थी, बल्कि लाखों लोगों की प्रेरणा का स्रोत थी।
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चार साल पहले भारत ने भेंट की थी प्रतिमा
इस प्रतिमा को 12 नवंबर 2021 को नई दिल्ली स्थित ICCR (इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस) ने उपहार के तौर पर ऑस्ट्रेलिया को भेंट की थी। उस समय स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री थे। उन्हें ही उपहार के तौर पर प्रतिमा दी गई थी।
कौन हैं रणधीर जायसवाल?
रणधीर जायसवाल वर्तमान में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हैं। प्रवक्ता बनने से पहले वह साल 2020 तक न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत (Consul General) के पद पर कार्यरत थे।रणधीर जायसवाल ने अपने करियर की शुरुआत 1998 में एक आईएफएस अधिकारी के तौर पर की।
