ईरान में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में सुप्रीम नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन भड़क उठे हैं। देशभर में हिंसा में अब तक 26 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालात काबू में करने के लिए कई शहरों में सेना तैनात की गई है। इस बीच पाकिस्तान के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से अलग होने की मांग तेज हो गई है।

 

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार पर दबाव की स्थिति है। एक ओर सरकार के अमेरिका से कूटनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने हालात बिगड़ने के बाद देशभर में बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।

 

यह भी पढ़ें: भारत, पाकिस्तान पर करने जा रहा हमला? संसद में खुद राष्ट्रपति जरदारी ने किया दावा

कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में प्रदर्शन

प्रदर्शन विशेष रूप से कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। कराची स्थित अमेरिकी एम्बेसी के बाहर प्रदर्शनकारियों ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे लगाए है। सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और हवाई फायरिंग का सहारा लिया है। कराची में अमेरिकी दूतावास की ओर जाने वाली सड़कों को बंद कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। लाहौर और इस्लामाबाद में भी अमेरिकी मिशनों के आसपास कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

 

यह भी पढ़ें: 'जैसे भी हो सके तुरंत निकलो...', अमेरिका ने जारी कर दी दर्जनों देशों की लिस्ट

पाकिस्तान में शिया समुदाय का देशव्यापी विरोध

पाकिस्तान, ईरान के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिया आबादी वाला देश है। शिया संगठनों ने हमलों के खिलाफ देशव्यापी विरोध का आह्वान किया है। प्रतिबंध के बावजूद कई शहरों में विरोध जारी है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने सरकार से ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से अलग होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को ऐसे मंच से जुड़ा नहीं रहना चाहिए, जिसे ऐसे नेतृत्व ने स्थापित किया है जो कई देशों पर हमलों से जुड़ा रहा है। 

यह भी पढ़ें: 'US के कई एयरक्राफ्ट गिरे..', कुवैत के बयान से बढ़ी अमेरिका की टेंशन 

ईरान हमलों के बाद ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर बढ़ा दबाव

बोर्ड ऑफ पीस को गाजा जैसे संघर्षों में शांति पहल के मंच के रूप में पेश किया गया था, लेकिन ईरान पर हमलों के बाद पाकिस्तान में इसके खिलाफ असंतोष बढ़ गया है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा एजेंसिया हिंसा की घटनाओं की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच से खुद को अलग करता है या कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश जारी रखता है।