ईरान में सरकार के खिलाफ जो प्रदर्शन हो रहे हैं, वह अब उग्र होते जा रहे हैं। ईरान में इन प्रदर्शनों को शुरू हुए दो हफ्ते हो चुके हैं। इन दो हफ्तों में अब तक कइयों की मौत हो चुकी है और हजारों को हिरासत में लिया जा चुका है। इन्हीं सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच जुबानी जंग हो रही है।

 

डोनाल्ड ट्रंप कई बार धमकी दे चुके हैं कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा जाता है तो अमेरिका उनकी मदद करेगा।

 

अब उन्होंने एक बार फिर यही बात कही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान आजादी मांग रहा है। शायद ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है।'

 

 

इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि 'अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है।' उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि लोग अब समझेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति कोई गेम नहीं खे रहे हैं। जब वह आपसे कहते हैं कि कुछ करेंगे और किसी समस्या को हल करेंगे तो उनका मतलब वही होता है।'

 

 

मार्को रुबियो की पोस्ट को शेयर रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने लिखा, 'जब ईरानी अयातुल्ला और उसके कट्टरपंथी नाजी गुंडों का सामना करने और बेहतर जिंदगी के लिए विरोध कर रहे ईरान के लोगों के साथ खड़े होने की बात आती है, तो यह ओबामा प्रशासन जैसा नहीं है।' उनके कहने का मतलब था कि ओबामा सरकार कभी ईरानियों के साथ खड़ी नहीं रही, जबकि ट्रंप सरकार ईरान के लोगों के साथ है। लिंडसे ग्राहम की इस पोस्ट को ट्रंप ने भी शेयर किया।

 

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ऐसी जगह मारेंगे, जहां सबसे ज्यादा दर्द होगाः ट्रंप

इससे पहले शुक्रवार को भी ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के हालात पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।

 

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका दखल देगा और ऐसी जगह हमला करेगा, जहां उसे सबसे ज्यादा दर्द होगा।

 

ट्रंप ने कहा था, 'ईरान बड़ी मुसीबत में है। मुझे लगता है कि लोग कुछ शहरों पर कब्जा कर रहे हैं, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो सकता है। हम हालात पर करीबी से नजर रख रहे हैं। मैंने बहुत मजबूती से यह बयान दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा उन्होंने पहले किया तो हम दखल देंगे। हम उन्हें ऐसी जगह मारेंगे, जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होगा।'

 

 

हालांकि, ट्रंप ने इस बात को भी साफ कर दिया था कि अभी अमेरिका, ईरान में अपनी सेना नहीं उतारेगा। प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताते हुए उन्होंने कहा था, 'उन्होंने बहुत बुरा काम किया है, उन्होंने अपने लोगों के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया है और अब उन्हें इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है तो देखते हैं क्या होता है। हम इस पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।'

 

प्रदर्शनकारियों पर ट्रंप ने कहा था 'मुझे उम्मीद है कि ईरान में प्रदर्शनकारी सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि यह अभी बहुत खतरनाक जगह है। मैं ईरानी नेताओं से फिर कहता हूं कि आप गोलीबारी न करें, क्योंकि फिर हम भी गोली चलाना शुरू कर देंगे।'

 

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100 से ज्यादा शहरों में फैला प्रदर्शन

गिरती करंसी के खिलाफ ईरान में 28 दिसंबर को प्रदर्शन शुरू हुए थे। सबसे पहले तेहरान के बाजार में दुकानदारों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

 

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, दो हफ्तों में ये प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल गए हैं और 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं।

 

कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो रही है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी ने बताया कि इन प्रदर्शनों में अब तक 72 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।

 

इस बीच ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हैं, उन्हें 'खुदा का दुश्मन' माना जाएगा। ईरान में इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है।

 

वहीं, अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की है। उन्होंने शनिवार को एक मैसेज जारी कर लोगों से हड़तलाल करने को कहा। साथ ही प्रदर्शनकारियों को तेहरान में सरकारी इमारतों पर कब्जा करने को कहा।