ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को खो दिया है। सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स (IRGC) की टॉप लीडरशिप खत्म हो चुकी है। रक्षा विभाग के कई अधिकारी मारे गए हैं। ईरान को हर तरफ से जख्म मिल रहा है लेकिन ईरान ने घुटने नहीं टेके हैं। डोनाल्ड ट्रंप, खुद मध्यस्थता चाहते हैं। अब उन्होंने ईरान को नई धमकी दी है कि अगर ईरान पर हमले जारी रहेंगे और अमेरिकी मौतें हो सकती हैं, जब तक सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। 

अमेरिका और इजरायल संयुक्त तौर पर हमला बोल रहे हैं। ईरान ने बदला लेते हुए इजरायल, अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए। तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई घायल हुए। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि और मौतें हो सकती हैं, लेकिन ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' तब तक चलेगा जब तक ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, मिसाइलें और नेवी खत्म नहीं हो जाती। 

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8 देशों से एक साथ निपट रहा ईरान, अमेरिका तबाह

इजरायल और अमेरिका ने मिलकर 28 फरवरी 2026 से ईरान में तबाही मचाई है। ईरान ने जवाब में अमेरिकी सहयोगियों को घुटने पर ला दिया है। खाड़ी देशों में डर का माहौल है, क्योंकि ईरान ने अब अमेरिकी बेस के अलावा सिविलियन जगहों को भी निशाना बनाया। इजरायल के कई शहरों में घुसकर ईरान मार रहा है। तेल अवीव, हाइफा और येरुशलम तक इजरायल ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। उन ठिकानों पर हमला किया है, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं।

बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय को ईरान ने तबाह कर दिया है। कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस पर मिसाइल हमले हुए हैं। कत के अल उदेद एयरबेस को ईरान ने उड़ाया है। संयुक्त अरब अमीरात के अल-धफरा एयरबेस और दुबई के अबू धाबी के पास के इलाके तबाह हो चुके हैं। जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले हुए हैं। ईरान के हमले में सबसे ज्यादा नुकसान सऊदी अरब को पहुंचा है। रियाद और पूर्वी क्षेत्रों में भीषण हमले हुए हैं। इराक के आर्मी बेस भी तबाह हुए हैं।
 

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इजरायल का तेल अवीव। Photo Credit: PTI

असर क्या हुआ है?

ईरान तनाव की वजह से तेल की कीमतें 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ गईं हैं। ईरान में इंटरनेट बंद है और सड़कें खाली हैं। कई देशों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। यह युद्ध अब क्षेत्रीय युद्ध बन चुका है, जिसमें हिजबुल्लाह भी शामिल हो गया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हमारे लक्ष्य तय हैं, हम ईरान में सारी ताकतों को खत्म करेगा। अब अमेरिका, ब्रिटिश एयरबेस पर उतरने की तैयारी करना चाह रहे है। यह युद्ध, अब नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) युद्ध की तरफ जाता दिख रहा है। 

अमेरिका पर भारी पड़ा है ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पर ऑपरेशन जारी रहेगा और अमेरिकियों को और जानें गंवानी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा है कि सभी लक्ष्य हासिल होने तक हमले रुकेंगे नहीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और 5 गंभीर रूप से घायल हुए। कुवैत में अमेरिकी बेस तो पूरी तरह से तबाह हो चुका है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इन मौतों का बदला लेंगे और ईरान को पहले जैसा हमला नहीं करने देंगे। 

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अब किसके हाथ है ईरान की बागडोर?

आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) ने खामेनेई की सटीक जानकारी अमेरिका को दी, जिसका नतीजा यह हुआ कि खामेनेई मारे गए। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि एक-दो दिन में नया लीडर चुना जा सकता है।

ईरान को कितना नुकसान पहुंचा चुके हैं ट्रंप?

अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 24 घंटों में 1000 से ज्यादा ईरान के टारगेट पर हमले किए गए। इनमें कमांड सेंटर, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, IRGC मुख्यालय और नेवल बेस शामिल हैं। अमेरिका ने B-2 स्टेल्थ बॉम्बर और फाइटर जेट इस्तेमाल किए। 

इजरायल ने तेहरान के दिल में हमले किए, जिसमें खामेनेई का कंपाउंड तबाह हुआ। सैटेलाइट इमेज से धुआं और तबाही दिख रही है। ईरान की नेवी के 9 जहाज डुबोए गए। इजरायल ने कहा कि कई दिन और लड़ाई अभी जारी रहेगी। ज्यादा दिनों तक चले जंग का मतलब है ज्यादा तबाही।

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अमेरिकी युद्ध पोत। Photo Credit: PTI

ईरान कैसे बदला ले रहा है?

ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने इजरायल पर मिसाइल दागी, जिसमें बेइत शेमेश शहर में 9 लोग मारे गए। हिजबुल्लाह ने भी लेबनान से मिसाइल और ड्रोन लॉन्च किए। खाड़ी देशों में ईरान ने अमेरिकी बेस और सिविलियन जगहों पर हमले किए। UAE में 165 बैलिस्टिक मिसाइल, 2 क्रूज मिसाइल और 541 ड्रोन आए, जिनमें से ज्यादातर रोके गए लेकिन दुबई एयरपोर्ट, होटल और पोर्ट क्षतिग्रस्त हुए। बहरीन में US 5वें फ्लीट पर हमला किया, कतर, कुवैत और ओमान में भी हमले जारी हैं। UAE में 3 मौतें और 58 घायल हुए हैं। 

तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?

UAE, बहरीन, कतर, कुवैत में पहली बार इतने बड़े हमले हुए। ये देश अमेरिका के सहयोगी हैं, इसलिए ईरान ने उन्हें निशाना बनाया। दुबई और अबू धाबी में एयरपोर्ट क्षतिग्रस्त हैं, होटल जल रहे है, आम नागरिक और प्रवासी बेहद डरे हुए है। खाड़ी के देशों ने चेतावनी दी है कि अब वे अपना बचाव करेंगे। तेल कीमतें एशिया में खुलते ही 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 79 डॉलर तक पहुंच गई हैं। कई उड़ानें डायवर्ट हो रही हैं, लोग घबराए हुए हैं। 

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ईरान कैसे मजबूत पड़ रहा है?

ईरान के पास सिर्फ एक सेना नहीं है। उसके पास सेनाओं का जखीरा है। हिजबुल्लाह ने खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए इजरायल पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए। इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के टारगेट पर हमले किए, जिसमें बेरूत के दक्षिणी इलाके में धमाके हुए।                         

ईरान ने क्या गंवाया है?

ईरान में एक स्कूल पर हमले में 153 लोग मारे गए, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। तेहरान में इंटरनेट बंद है। हर जगह धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। अमेरिकी-ईरानी लॉस एंजिल्स में सड़कों पर नाच रहे है, ट्रंप को शुक्रिया कह रहे हैं। यूरोपियन यूनियन का कहना है कि युद्ध बढ़ना नहीं चाहिए। कांग्रेस को ब्रिफिंग दी जाएगी। युद्ध कितना चलेगा, यह तय नहीं, लेकिन अमेरिका-इजरायल दोनों को ईरान धो रहा है। ईरान ने साफ कहा है कि मरते दम तक, जंग जारी रहेगी।